कोरबा । जिला स्तर पर 179 सहायक शिक्षकों का स्थानांतरण करते हुए शिक्षा विभाग ने सूची जारी की है। इस पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने अनेक विसंगतियां होने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि सुदूर और बीहड़ क्षेत्र में मुश्किल परिस्थितियों के बीच अध्यापन कार्य कर रहे 55 प्रतिशत दिव्यांग शिक्षकों, कुष्ठरोग व अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित जरूरतमंद शिक्षकों की अर्जी दरकिनार कर दी गई। वहीं अपात्रों का स्थानांतरण कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ओमप्रकाश बघेल का कहना है कि मंगलवार को जारी की गई सहायक शिक्षकों की स्थानांतरण सूची में बहुत सी विसंगतियां हैं। जिला स्तर पर 179 सहायक शिक्षकों को इधर से उधर किया गया है। वास्तव में जो पात्र हैं, उनका स्थानांतरण नहीं हो पाया है। कई ऐेसे कर्मी, जो 55 से 60 प्रतिशत दिव्यांगता है, उनकी विशेष आवश्यकता को दरकिनार करते हुए आवेदन के बाद भी मांगे गए स्थल पर स्थानांतरण का लाभ नहीं दिया गया। कई ऐेसे स्कूल भी हैं, जहां बच्चों की दर्ज संख्या कम है पर बिना जरूरत वहां भी प्रशासनिक स्थानांतरण की प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त शिक्षक भेज दिए गए। इसी तरह गंभीर बीमारियों से ग्रसित शिक्षकों को स्थानांतरण नहीं दिया गया। इनमें कुंज बिहारी रात्रे शामिल हैं, जो बीहड़ क्षेत्र सरभोंका बसाहट पोड़ी-उपरोड़ा में शिक्षकीय कार्य कर रहें है। बघेल का कहना है कि कुंजबिहारी कुष्ठरोग से ग्रसित हैं, जिनका स्थानांतरण नहीं हुआ। उन्होंने सरईश्रृंगार, बिरदा-कटघोरा में स्थानांतरण किए जाने की मांग की थी। बघेल का कहना है कि 70 प्रतिशत स्थानांतरण पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक के शिक्षकों का किया गया है पर यहां भी पात्रों को छोड़ दिया गया। प्रशासनिक स्थानांतरण में ब्लाक को केंद्रित करने की जगह अन्य ब्लाक में स्थानांतरित कर दिया गया। इन विसंगतियों पर सुधार किया जाना चाहिए।

दिव्यांग शिवकुमारी को 70 किमी का चक्कर

ओमप्रकाश बघेल ने बताया कि पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत सहायक शिक्षिका शिवकुमारी बघेल अपने गृह ग्राम से 70 किलोमीटर दूर कोरबी-पसान के फुलसर प्राथमिक स्कूल में पदस्थ हैं। पैर से 55 प्रतिशत दिव्यांग होने के कारण प्रमाण पत्र समेत उन्होंने आवेदन किया था और पोड़ी ब्लाक में ही प्राथमिक शाला जुराली, पटेल पारा और गदेलीपारा में से किसी में भी भेज दिए जाने की मांग की थी, पर उनका स्थानांतरण नहीं किया गया।

यहां दर्ज संख्या कम पर अतिरिक्त शिक्षक भेज दिए

इसी तरह शासकीय स्कूल गोकुलनगर, भालूसटका, जोगियाडेरा, दर्राभांठा में बच्चों की दर्ज संख्या कम है, वहां पर दो-दो तीन-तीन शिक्षकों का अतिरिक्त स्थानांतरण कर दिया गया है। तबादले के बाद जहां पर रिक्त हुआ, उसकी जगह प्रशासनिक स्थानांतरण कर दिया गया। बघेल का कहना है कि प्रभारी मंत्री के कार्यालय में कुल 209 के तबादले का अनुमोदन हुआ था, लेकिन 179 का ही ट्रांसफर किया गया। पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण का नियम होता है, पर उसे कोई आधार ही नहीं माना गया। आपसी स्थानांतरण को भी महत्व नहीं दिया गा।

एक शिक्षक वाले 100 प्राथमिक शाला

जिले के सरकारी स्कूलों में नियमानुसार शिक्षकों की पदस्थापना नहीं किए जाने के कारण प्राथमिक कक्षाओं की पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा। चार साल पहले एकल शिक्षकों की संख्या 72 थी, वह बढ़कर अब 100 हो गई है। प्राथमिक स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों की पदोन्नाति और सेवानिवृत्ति के अनुपात में नई भर्ती नहीं की जा रही है। इस वजह से शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों की संख्या लगाार बढ़ रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति दूरस्थ गांव की है, जहां कोई भी शिक्षक अध्यापन के लिए जाना नहीं चाहता।

0 प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की संख्या

पदनाम- स्वीकृत- भरे- रिक्त

प्रधाानपाठ माशा- 514- 336- 178

शिक्षक- 2319- 1566- 753

प्रधानपाठक प्राशा- 1464- 276 1188

सहायक शिक्षक- 3240- 3156- 84

व्यायाम शिक्षक- 77- 52- 25

सहायक ग्रेड-2- 124- 104- 20

भृत्य- 900- 561- 339

स्थानांतरण के लिए 400 से भी अधिक आवेदन आए थे। सभी को प्रक्रिया में लेना संभव नहीं था। सूची पात्रता के आधार पर जारी की गई है। जिन्हे आपत्ति है वे शासन प्रशासन के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।

जीपी भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Yogeshwar Sharma

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