कोरबा(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हसदेव नदी दर्री बांध की दायी तट नहर का तटबंध टूटने से सीतामढ़ी का एक इलाका जलमग्न हो गया। 50 से अधिक घरों में चार फीट पानी भर गया। घर के सामान पूरी तरह भीगकर खराब हो गए। बर्तन पानी में यहां-वहां तैरते नजर आए। तड़के करीब पांच बजे हुई घटना उस वक्त लोग घर में सो रहे थे। पहले तो बाढ़ आ जाने की आशंका हुई पर बाद में नहर का पानी बस्ती में घुस आने की खबर आई। बाद में आनन-फानन में नहर का पानी आपूर्ति बंद कराया गया, इसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

शहर से निकली दर्री बांध नहर की जर्जर दशा में सुधार नहीं कराने का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। खासकर नहर के मोड़ वाले स्थान में पानी के प्रवाह का असर पडने से तट का प्लास्टर टूट चुका है। बताना होगा कि हसदेव नदी के बायी तट नहर सीतामणी क्षेत्र से गुजरती है। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए जांजगीर जिले तक गई हुई है। पानी की मांग होने पर नहर से पानी छोड़ा जाता है। खरीफ वर्ष में वर्षा कम होने से माह भर से लगातार पानी छोड़ा जा रहा था। मंगलवार को जब तटबंध टूटा तो नहर पानी से लबालब भरा हुआ था। पानी के पूरे वेग के साथ बस्ती में पहुंचने के कारण लोगों को सामान को सुरक्षित जगह ले जाने का मौका नहीं मिला। निचली बस्ती में पानी घुसने से सबसे अधिक असर बंसोड़ मोहल्ला, इमलीडुगु, भैयालाल गली और खंडाला मोहल्ला में देखने को मिला। सूचना मिलने पर मौके पर कोरबा एसडीएम हरिशंकर पैकरा पर पहुंचे। पानी के भराव को देखते हुए नहर का गेट बंद कराया गया। गेट से बस्ती की दूरी 11 किलोमीटर होने के कारण जल प्रवाह कम होने में एक घंटे का समय लग गया। अधिकारी ने प्रभावितों को सीतामढ़ी प्रायमरी स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ठहराने की व्यवस्था की। दोहपर तक पानी उतरने के बाद अधिकांश लोग अपने घर वापस हो गए। नगर निगम, पुलिस और राजस्व की टीमें लगी रही। लोगों के नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। घर में पानी भर जाने के कारण लोगों के पास खाने-पीने का सामान नहीं बचा । बहरहाल टूटे नहर में मरम्मत कार्य चल है।

मरम्मत नहीं होने का नतीजा भुगत रहे लोग

स्थानीय पार्षद सुफल दास महंत कहना है कि शहर के भीतर से हो गुजरी नहर का समय सीमा पर मरम्म्त नहीं किया जा रहा है। जर्जर नहर की दशा साल दर साल दयनीय होती जा रही है। निचली बस्ती के जलमग्न होने से लोगों को जो नुकसान हुआ है उसका जिम्मेदार सिंचाई विभाग है। विभाग के अधिकारी गर्मी के समय नहर की मरम्मत करा सकते हैं, लेकिन देखने भी नहीं आते। पहले तो नहर में मिट्टी कटाव के लिए बोरियां भी भरी जाती थी अब वह भी नहीं किया जा रहा। चार साल पहले नहर का मरम्मत किया गया था उसके अगले ही मासनून में प्लास्टर में कटाव शुरू हो गया था। समय पर मरम्मत हो जाती तो यह हादसा नहीं होता।

दस लाख से अधिक का नुकसान

बस्ती में पानी घुसन से 10 लाख से भी अधिक का नुकसान हुआ है। इनमें सर्वाधिक रसद सामान हैं। इमलीडुग्गु निवासी वीरेंद्र पांडे का कहना है कि नहर का पानी सीधे हमारे घर में घुस गया। इससे पहले कि हम संभल पाते पानी तीन से चार फीट तक घर के कमरे में भर गया। मेरा एक छोटा सा टेंट हाउस है। आगामी उत्सव के लिए हाल ही में नया सामान खरीदा था। सजावजट के सामान पानी में भीगने से अनुपयोगी हो गए हैं।

जब तक संभलते सब कुछ अस्त-व्यस्त

इसी तरह उर्मिला अग्रवाल ने बताया कि सुबह लगभग साढे छह बजे घर में पानी भर गया। जब हम संभलते तब तक सब कुछ अस्त-व्यस्त हो चुका था राशन का सामान भी पानी के साथ बह गया है। अब हमारे पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं बचा है।

प्रति वर्ष मिलता है 84 करोड़ का राजस्व आय

दर्री बांध के दायी और बायी तट नहर से औद्योगिक संयंत्र और सिंचाई के लिए पानी देने के एवज में 84 करोड़ का राजस्व आय प्राप्त होता है। आय के लिहाज से त्वरित मरम्मत नहीं होना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है। आय संकलन में जल संसाधन की ओर से जितनी तत्परता दिखाई जाती है वह शीघ्रता मरम्मत राशि आवंटन कराने में नहीं दिखा जाती। जल संसाधन के नहर और बांध आय का जरिया बन के रह गए हैं। समय रहते मरम्मत नहीं किए जाने से इससे भी बड़ी घटना की संभावना है।

नहर का तटबंध टूटने के कारण सीतामढ़ी के निचली बस्ती में पानी भर कर गया। नगर से जल प्रवाह को बंद करा दिया गया है। बस्ती से पानी उतर चुका है। स्थिति नियंत्रण में है। निगम प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाया गया है।

विजेंद्र पाटले, अपर कलेक्टर

Posted By: Nai Dunia News Network

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