विकास पांडेय, कोरबा Chhattisgarh News । सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर जिन जमीनों पर बंजर होने का दाग था, आज वही दो हजार आदिवासी किसानों के सिर की पगड़ी बन गई। एक-एक कर नाबार्ड की वाड़ी परियोजना से जुड़ते गए किसानों ने दिन-रात कड़ी मेहनत की और अपने पसीने से सींच कर काजू के बाग तैयार किए। अब उसी जमीन पर हजारों पौधे लहलहा रहे है। कोरबा जिले के करतला का काजू अब कर्नाटक के काजू के मुकाबले छत्तीसगढ़ में खड़ा हो गया है। न केवल राज्य में, बल्कि झारखंड व ओडिशा तक भेजा जा रहा है।

जिले के सौ फीसदी किसान धान की पारंपरिक फसल लेते आए है, लेकिन इससे हटकर कृषि कार्य करने की शुरुआत हो गई है। करतला ब्लॉक के दो हजार किसानों ने करीब 1,300 एकड़ भूमि में काजू के 30 हजार पेड़ों का बागान विकसित कर लिया है। 22 हजार पेड़ से इस वर्ष 22 टन काजू का उत्पादन हुआ है।

करीब नौ साल की मेहनत अब रंग लाने लगी है। किसानों ने तो सहकारी समिति का गठन कर बिना किसी सरकारी मदद के काजू प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित कर ली है। पहले कच्चा माल सप्लाई करते थे, जिससे पूरे दाम नहीं मिल पाते थे। प्रोसेसिंग यूनिट में गांव की महिलाओं को भी काम मिल गया, वहीं हर साल काजू उत्पादन में वृद्धि भी हुई।

यह आर्गेनिक इसलिए दूसरों से बेहतर

जय गुरुदेव सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष चंद्रभानु राठिया ने बताया कि करतला का काजू कर्नाटक से बेहतर है, क्योंकि यह पूरी तरह ऑर्गेनिक है। हमारे यहां रसायनयुक्त खाद का उपयोग नहीं किया जाता। न ही आधुनिक मशीन से प्रोसेसिंग होती है। प्रोसेसिंग की काफी कुछ प्रक्रिया मैनुअल है, इसलिए हमारा काजू गुणवत्ता में उत्कृष्ट है। ब्रांडिंग की दिशा में भी हम काम कर रहे हैं। आकर्षक पैकिंग के साथ खुदरा बाजार में हम ब्रांड उतारेंगे।

पेड़ों के बीच की जगह में सब्जी की फसल

नवापारा के किसान लाखन सिंह राठिया ने बताया कि वर्ष 2013 में वह नाबार्ड के वाड़ी विकास कार्यक्रम से जुड़ा। उसके बाद से उसकी आमदनी कई गुना बढ़ गई। पहले अपनी एक एकड़ भूमि को वह महज 300 रुपये के किराए पर दे देता था। अब काजू, नींबू, आम के पेड़ों के बीच की जगह में सब्जियों का उत्पादन कर हर साल एक लाख रुपये से अधिक कमा लेता है।

साल में दो फसल से 48 हजार आमदनी

एक किसान की बाड़ी में कम से कम 30 पेड़ लगे हैं और एक पेड़ से करीब पांच किलोग्राम काजू फल उत्पादन होता है। प्रोसेसिंग के बाद सवा किलो काजू निकलता है, जिसे 800 रुपये किलो में विक्रय किया जाता है। इस तरह साल में दो बार फसल लेने पर एक किसान को कम से कम 48 हजार की आमदनी हो जाती है। पहली बार उत्पादन में 30 गांव के दो हजार किसानों ने 11 टन प्राप्त किया था, जो इस सीजन में दोगुना होकर 22 टन उत्पादन दर्ज किया गया है। आगामी वर्षों में नए पेड़ों से उत्पादन और बढ़ेगा।

अनार भी लगाए, धान अलग

किसानों ने इस वर्ष अपनी बाड़ी में अनार के पौधे भी लगाए हैं, जिसके अगले कुछ वर्षों में तैयार होने पर अनार का उत्पादन लेकर आमदनी बढ़ाई जाएगी। इससे पूर्व काजू के साथ-साथ उनकी बाड़ी में नींबू व आम भी लगाए गए, जिनमें फल पहले से प्राप्त हो रहा है। काजू के साथ आम व नींबू उत्पादन के माध्यम से भी वे आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह सभी को मिलाकर प्रति किसान साल में एक लाख से अधिक की आमदनी सिर्फ बाड़ी से प्राप्त कर रहे। इसके अलावा फलदार पेड़ों के बीच रिक्त पड़ी जगह पर सब्जी से आमदनी व परंपरागत धान की फसल वे अपने खेतों में अलग से ले रहे हैं।

नौ साल में 200 से बढ़कर हुए दो हजार किसान

नाबार्ड के वाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत ग्राम बरतोरी विकास शिक्षण समिति के अध्यक्ष सूर्यकांत सौलखे ने करतला के ग्रामीणों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने की मुहिम शुरू की थी। शुरुआती वर्ष 2011 में 200 किसानों को जोड़ा गया और उनकी बाड़ी में काजू के पौधे रोपित किए गए। इसके बाद साल-दर-साल किसान जुड़ते गए और वर्तमान में 30 गांव के दो हजार आदिवासी कृषक जुड़ गए हैं और उनकी बाड़ी में 22 हजार पौधे लहलहा रहे हैं। वे सिर्फ काजू पर ही निर्भर नहीं, आम, नींबू व शेष जगह पर सब्जी भी उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर रहे।

योजना-नाबार्ड का वाड़ी विकास कार्यक्रम

ब्लॉक-करतला

गांव-30

किसान-2000

भूमि-1300 एकड़

काजू के पेड़-30,000

फल दे रहे-22,000

इस वर्ष उत्पादन-22 टन

प्रति किसान आय-48 हजार

- कोरबा का वातावरण व जमीन काजू के लिए उपयुक्त है। नौ साल के प्रयास व किसानों की कड़ी मेहनत का फल अब मिलने लगा है। कभी दो वक्त की जुगत के लिए धान के छोटे-छोटे खेतों पर बैठे बादलों का मुंह ताकने वाले किसानों के मुख पर आर्थिक हरियाली सुशोभित हो रही है। करतला के लिए काजू नया क्रॉप है, विश्वास है कि जल्द ही यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ में काजू के हब के रूप में पहचान बनाएगा। - सूर्यकांत सौलखे, अध्यक्ष, ग्राम बरतोरी विकास शिक्षण समिति

- नाबार्ड चाहता है कि कोरबा की काजू के हब के रूप में पहचान बने। हमने करतला विकासखंड में सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है, जिसका विस्तार पूरे जिले में हो, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठाकर आर्थिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकें। - संजीव कुमार प्रधान, डीडीएम, नाबार्ड

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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