कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना संकट का असर प्रदेश व देश के अन्य राज्यों के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिखाई देने लगा है। विद्युत संयंत्रों में वाश्ड कोल का पर्याप्त स्टॉक होने से वाशरी का कोयला जाम पड़ा है। दूसरी ओर जिन विद्युुत संयंत्रों में 100 एमएम कोयले की डिमांड है, पर लॉकडाउन के चलते इस क्वालिटी का कोयला एसईसीएल नहीं दे पा रहा। वर्तमान में 250 एमएम कोयला उपलब्ध है, लेकिन इन्हें लोड करने पावर प्लांटों में मजदूर नहीं है। इसके चलते वे एसईसीएल से उत्पादित बड़े आकार का कोयला भी लेना नहीं चाहते। फलस्वरूप, केवल एक सप्ताह में ही कोयला डिस्पैच 29 फीसदी घट गया है।

दस दिन पहले जहां प्रतिदिन रेलवे 45 से 46 रैक डिस्पैच कर रहा था, साइडिंग में कोयला नहीं पहुंचने के कारण वर्तमान में 35-36 रैक ही भेज पा रहा। साइडिंग में कोयला नहीं होने के कारण रेलवे के कई एमटी रैक लोडिंग के इंतजार में यहां-वहां यार्ड में खड़े हैं। खासकर विद्युत संयंत्रों में कोयले की जरूरत का बड़ा हिस्सा कोरबा से पूरा होता है। मानिकपुर से लेकर कुसमुंडा व दीपका-जूनाडीह तक 15 कोयला लोडिंग प्वाइंट से रेलवे अपने रैक के जरिए राजस्थान, गुजरात, पंजाब, बिरसिंहपुर-पाली (मध्य प्रदेश) व उत्तर भारत के विद्युत संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति करता है। दीगर राज्यों के अलावा प्रदेश के भीतर रायगढ़ लारा, डीबी पावर डभरा, विमला रॉबर्टसन, बिरसिंगपुर-पाली के मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, मोजरवेयर अनूपपुर, भिलाई स्टील प्लांट, बीएसपीडी, स्थानीय में बाल्को, सीएसईबी, लैंको में एसईसीएल से उत्पादित कोयला साइडिंग से मालगाड़ियों में लोड कर पहुंचाया जाता है। पर विद्युत संयंत्रों में बिजली की डिमांड घट गई है। दूसरी ओर उनके पास कोयले का पर्याप्त स्टॉक भी मौजूद है। इस तरह डिमांड का घटना, मजदूरों की कमी, बिजली की मांग में गिरावट व साइडिंग तक कोयला सप्लाई करने रोड ट्रांसपोर्टेशन के प्रभावित होने के कारण रेलवे के रैक खाली खड़े लोडिंग का इंतजार कर रहे। परिणामस्वरूप कोयला डिस्पैच भी लगभग 29 फीसदी घट गया है।

-1.21 टन से घटकर प्रोडक्शन 87 टन

21 मार्च तक औसतन प्रतिदिन कोरबा से 45 रैक भेजे जा रहे थे। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन से सीधे दस रैक घट गए और उसके बाद 36-33 रैक प्रतिदिन डिस्पैच हो रहे थे। कुसमुंडा एरिया में औसतन प्रोडक्शन एक लाख 15 हजार से एक लाख 20 हजार टन हो रहा था। पिछले कुछ दिनों से विभिन्न कोयला लोडिंग प्वाइंट में कोयला प्रोडक्शन ड्रॉप हो गया है, जिससे यह आंकड़ा भी घटकर 87 से 88 हजार टन हो गया है। न्यू कुसमुंडा साइडिंग (एनके-टू) में औसतन प्रतिदिन साढ़े छह रैक डिस्पैच किए जा रहे थे, जो पिछले दो दिन से शून्य हो गया है। 22 मार्च से यहां लोडिंग पूरी तरह से बंद हो गया है। यहां प्रतिदिन 25 से 30 हजार टन कोयला ट्रांसपोर्ट होता था, जो अब शून्य हो गया है।

-सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टिंग बंद

इसी तरह कुसमुंडा का साइडिंग नंबर-टू है, वहां सीधे छह रैक का नुकसान प्रतिदिन हो रहा है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि कुसमुंडा में एसईसीएल बड़े साइज (250 एमएम) का कोयला दे रहा है। बड़े आकार का कोयला रिलीज करने के लिए विद्युत संयंत्रों में मजदूरों की जरूरत होती है। लॉकडाउन के कारण मजदूर ही उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए विद्युत संयंत्र कोयला ले ही नहीं रहे हैं। संयंत्र छोटे आकार के कोयले (100 एमएम) की डिमांड कर रहे। सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्ट बंद हो गया है। यही वजह है जो 22 मार्च से कुसमुंडा के साइडिंग नंबर-टू में कोयला ही नहीं आ रहा और इस तरह लोडिंग ठप होने के कारण यहां से रेलवे को प्रतिदिन छह रैक का नुकसान उठाना पड़ रहा।

-जगह-जगह खाली खड़े हैं रैक

वाशरी में भी रेलवे प्रतिदिन आठ से नौ रैक डिस्पैच होता था, जो डिमांड नहीं होने के कारण छह रैक हो गया है। साइडिंग में कोयला नहीं है और कोल ट्रांसपोर्ट भी नहीं हो पा रहा है। प्रोडक्शन भी गिरा है। रेलवे रैक देने की स्थिति में है, पर अनेक जगह एमटी रैक भी लोडिंग का इंतजार करते खड़े हैं, स्टेबल्ड हो गए हैं। वर्तमान में एनटीपीसी एक्सचेंज यार्ड में भी दो रैक स्टेबल्ड हैं, कोरबा यार्ड में भी एक रैक स्टेबल्ड हैं और लगभग हर एमटी रैक लोडिंग प्वाइंट में आ रहे, वे भी कोरबा में दो से तीन घंटे रुक-रुककर जा रहे। एसईसीएल की ओर से प्रोडक्शन व साइडिंग के लिए कोल डिस्पैच हो नहीं पा रहा है।

-लक्ष्य 150 एमटी, न्यूके-टू में 23 रैक का रिकॉर्ड

22 मार्च से कोरोना व लॉकडाउन का प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे पहले प्रतिदिन 45 से 46 रैक प्रतिदिन भेजा जा रहा था। 19 मार्च को कुसमुंडा की साइडिंग से रेलवे ने इस साल एक ही दिन में 23 रैक डिस्पैच करने का रिकॉर्ड भी बनाया है, जो कि अब तक का हाईयेस्ट रैक डिस्पैच है। यहां तीन साइडिंग हैं, जहां से कोल लोडिंग व डिस्पैच किया जाता है।

-लॉकडाउन से अडाणी के रोड ट्रांसपोर्ट ठप

जूनाडीह में पांच साइडिंग है और साइलो मिलाकर सात जगह कोयला लोड होता है। जूनाडीह की दो साइडिंग में कोयला नहीं आ रहा है। इसमें अडाणी व निजी कांट्रैक्टर्स ट्रकों से रोड के जरिए ट्रांसपोर्ट करते हैं। लॉकडाउन के कारण इनकी ट्रकों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा है। इससे साइडिंग नंबर एक व दो में प्रतिदिन चार रैक का नुकसान रेलवे को उठाना पड़ रहा है। गेवरा स्टेशन के एनटीपीसी एक्सचेंज यार्ड में रैक रखी हुई है। रैक लगने के तीन से चार घंटे बाद लोडिंग शुरू हो रही।

-गुजरात-राजस्थान में घटी वाश्ड कोल की मांग

जूनाडीह साइडिंग में रोज चार रैक का नुकसान हो रहा। वॉशरी से निकलने वाला वाश्ड कोल राजस्थान व गुजरात जाता है, जिसकी डिमांड कम है। उनके पास स्टॉक लेवल पर्याप्त है और इंडस्ट्रियल स्लो डाउन है। बिजली की डिमांड कम होने के कारण भी वाश्ड कोयले की मांग भी कम हो गई है, इसलिए जब बिजली की डिमांड बढ़ेगी, तभी कोयला मांगा जाएगा और उसके बाद ही वाशरी से वाश्ड कोल का डिस्पैच फिर से रफ्तार पकड़ सकेगा। वर्तमान में वाशरी कोल डिस्पैच नहीं कर पा रहा है। परिणामस्वरूप वर्तमान स्थिति में वाशरी में भी कोयले के स्टॉक पहाड़ जैसा जमा हो चुका है, जिसे सतत रैंप के जरिए स्टॉक का उचित व्यवस्थापन का प्रयास किया जा रहा है।

-मुख्य बिंदु

- कोरोना के कारण सड़क मार्ग से कोयले का ट्रांसपोर्टेशन प्रभावित हो रह।

- कुसमुंडा साइडिंग या वाशरी में रोड ट्रांसपोर्टेशन करने सक्षम है, पर कोयले की डिमांड नहीं है ।

- वाशरी का वाश्ड कोल गुजरात-राजस्थान के विद्युत संयंत्रों में भेजा जाता है।

- वर्तमान में बिजली की मांग कम होने के कारण वहां इंडस्ट्रियल स्लो डाउन की स्थित है।

- वर्तमान में यहां कोल वाशरी से वाश्ड कोल की डिमांड नहीं है।

- रॉ कोल में जिन खदानों से जो बड़ा कोयला भेजा जा रहा है, उसकी भी डिमांड नहीं है।

- ऐसा इसलिए, क्योंकि संयंत्रों में बड़ा कोयला रिलीज करने मजदूरों की जरूरत होती है।

- संयंत्रों को 100 एमए चाहिए, जबकि 250 एमएम कोयला प्रोडक्शन हो रहा।

- वर्तमान में लॉकडाउन के चलते मजदूर उपलब्ध नहीं हैं।

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-ऐसे गिरा कोल प्रोडक्शन

15 मार्च 121000 टन

16 मार्च 118000 टन

17 मार्च 121000 टन

18 मार्च 118000 टन

19 मार्च 111000 टन

20 मार्च 108000 टन

21 मार्च 115000 टन

22 मार्च 88000 टन

23 मार्च 95000 टन

24 मार्च 87000 टन

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फैक्ट फाइल

21 मार्च को रैक डिस्पैच 47 रैक

19 मार्च को अकेले न्यूके-टू में23 रैक

22 मार्च को रैक डिस्पैच 36 रैक

24 मार्च को रैक डिस्पैच 40 रैक

*विद्युत संयंत्रों को जरूरत 100 एमएम कोल,

उत्पादित किया जा रहा 250 एमएम।

-औसतन ड्रॉप प्रोडक्शन15 से 18 हजार एमटी प्रतिदिन

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