कोरबा । वनमंडल के कोरबा रेंज में लगभग सभी बीट में पिछले दो सप्ताह से दावानल की स्थिति है। इसकी वजह से वनस्पति जलकर स्वाहा हो रहे हैं। जंगल मे आग लगने से वनस्पतियों के अलावा पक्षियों और छोटे जीव-जंतु भी नष्ट हो रहे हैं। पर वन विभाग के अधिकारी आग बुझाने व आग से बचाव करने कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे है। इसके कारण अब बाकी के बीट के वन्य क्षेत्र भी आग के चपेट में हैं।

दावानल पर रोक के साथ वनों की सुरक्षा की कवायद ढीली नजर आ रही है। वन संपदा की सुरक्षा का संकल्प लेने वाले अधिकारी-कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं भीषण आग पर काबू पाने वन विभाग के पास कोई उपकरण तक नहीं है। आग स्वभाविक भी लगती है और जानबूझकर भी लगाई जाती है। यह हरकत उन ग्रामीणों की होती है, जो वन संपदा के लिए जंगल जाते हैं।

कोरबा रेंज के प्रत्येक बीट में फायर वाचर को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बीट गार्ड को सख्ती के साथ आग पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उनके पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है, जिसकी सहायता से आग बुझाने के लिए समुचित प्रयास किया जा सके। जहां आग लगी है, इसके कुछ दूर आगे व पीछे दोनों तरफ सूखी पत्तियों को हटा दिया जाता है। इससे आग आगे नहीं फैलती है। यह स्थिति भी तभी कारगार साबित होगी, जब आगजनी की सूचना दिन के उजाले में मिले।

केवल सूचना मिलने तक सैटेलाइट प्रणाली का लाभ

वन विभाग के पास आगजनी की त्वरित सूचना के लिए सैटेलाइट प्रणाली तो है, पर उसका लाभ केवल सूचनाएं एकत्रित करने तक सीमित रह गया है। जंगल के किसी स्थान में आग लगने की घटना सैटेलाइट से मिलने पर संबंधित रेंज व बीट को अलर्ट कर दिया जाता है, ताकि वे आग बुझाने के फौरी प्रयास शुरू कर दें। संसाधनों की कमी के चलते मैदानी अमला अलर्ट पाकर भी लाचार हो जाता है और आग बुझाने की कवायद धरी की धरी रह जाती है। परिणाम स्वरूप कई किमी के दायरे में आग बढती जाती है और उसकी चपेट में आए वन क्षेत्र जलकर राख में तब्दील हो जाते हैं।

2126.470 वर्ग किमी के दायरे में फैला वनमंडल

पांच वन परिक्षेत्रों और 88 बीटों में बंटा कोरबा वनमंडल 2126.470 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। एक ओर सड़क से शुरू होने वाली आग से बचने अग्नि पट्टिकाओं की व्यवस्था है, तो दूसरी ओर अग्नि प्रहरी भी नियुक्त किए जाते हैं।

इतने विस्तृत क्षेत्र में फैले जंगल में महज 90 से 100 अग्नि प्रहरियों की तैनाती होती है। इस तरह देखा जाए तो प्रति एक प्रहरी के जिम्मे 23 किलोमीटर जंगलों में आग पर नजर रखने की होती है। वन के विस्तृत क्षेत्र में अग्नि प्रहरी लगातार जंगल का पैदल भ्रमण कर न केवल यदा-कदा उठने वाले धुएं पर नजर रखते हैं, आग लगने की वजह बनने वाली परिस्थितियों को भी बनने से पहले ही रोक देने की कोशिशों में जुटे रहते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags