दर्री/कोरबा, नईदुनिया न्यूज। शहरी संस्कृति से प्रभावित युवा पीढ़ी भले ही फ्रेंडशिप डे का सेलिब्रेशन एक-दूसरे की कलाई पर फ्रेंडशिप बेंड बांधकर करे, पर गांव में आज भी सदियों पुरानी मितान संगवरी की परंपरा बड़े ही आत्मीयता के साथ निभाता है। दो ऐसे ही परिवार मिले, जो गांव की संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रहे। खास बात यह है कि दोनों परिवार की बहुएं परस्पर गियां बनकर जीवनभर गाढ़ी मित्रता बनाए रखने का संकल्प लेती आ रहीं और वर्तमान में तीसरी पीढ़ी मित्रता का धर्म निभा रही।

छत्तीसगढ़ की मितान और गियां संस्कृति को बड़े ही स्नेह से आत्मसात कर चल रहे ये परिवार धनवारपारा कलमीडुग्गू में निवास करते हैं। यहां रहने वाली 68 साल की रिंगमिनबाई ने यह परंपरा अपनी सास से पाई और खुद उसका अनुसरण करते हुए अपनी बहू को स्थानांतरित की।

उसके बाद उनकी बहू शिवकुंवर पड़ोस में ही रहने वाली बुत कुंवर की गियां बनी, पर समय से पहले ही बुत कुंवर उन्हें छोड़ गईं। इसके बाद बुत कुंवर की बहू जयकुंवर व शिवकुंवर की बहू मीना ब्याहकर ससुराल आईं। उन्होंने भी दोनों परिवारों के गहरे रिश्ते से जुड़ी इस परंपरा को धारण किया और वर्तमान में वे दोनों भी गिया हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ों से मिली यह सीख पाकर वे खुश हैं और बुढ़ापे तक अपना यह संकल्प निभाने की बात सोचकर हमेशा उत्साहित भी रहती हैं। चाहे घर में कोई सब्जी बनी हो, व्यंजन या पकवान, हमेशा एक-दूसरे से साझा करना, सुख-दुख की घड़ी में साथ रहना अच्छा लगता है और वे चाहते हैं कि अगली पीढ़ी में भी उनकी दोस्ती की यह परंपरा बढ़ती रहे।

भेद-भाव और ऊंच-नीच से परे एक धर्म

गांव में जब कोई मितान या गियां बनकर एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का वादा करता है, तो उनका यह संकल्प धर्म, जाति, समाज और भेद-भाव के सारे बंधनों से परे होता है। अगर परिवार के मुखिया मितान बने, तो पूरा परिवार एक-दूसरे का हो जाता है और उस परिवार के चाचा, मामा, बुआ और मौसी दूसरे परिवार के साथ उन्हीं रिश्तों में बंध जाते हैं। अलग-अलग समाज और परिवार की बातों से परे हटकर दोनों परिवार और मितान एक अनूठे धर्म का पालन करते हैं। यह धर्म तब तक निभाया जाता है, जब तक कि इन मित्रों के शरीर में जीवन की एक भी सांस बाकी रहती है।

अपशब्द तो दूर नाम भी नहीं पुकारते

फिल्मों या सोशल मीडिया की बात करें, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कुछ इस तरह हावी है कि अपशब्दों का इस्तेमाल भी फैशन बनता जा रहा। खासकर दोस्तों में एक-दूसरे को अपशब्द कहकर संबोधित करना आम बात हो गई है। गांव में गियां व मितान बनने वालों के लिए यह सब काफी महत्वपूर्ण होता है, जिसमें दोनों दोस्तों के बीच का संबोधन काफी आत्मीय व सम्माननीय होता है। मितान बनने वाले आपस में एक-दूसरे को अपशब्द या तेज आवाज में बात करना तो दूर, एक-दूसरे का नाम भी नहीं पुकारते। अगर कुछ कहना हो तो बस गियां या मितान कहकर संबोधित किया जाता है, पर नाम नहीं पुकारा जाता।

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Posted By: Nai Dunia News Network