कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

धान की फसल तेजी से बढ़ने लगी है। पौधे में आते बाली के पᆬूल पर पिछले सप्ताह हुई बारिश का असर अब दिखने लगा है। बूंदाबांदी से धान के फूल में झड़ने की स्थिति निर्मित हुई है। ऐसे में बदरा धान की संभावना से किसान चिंतित हैं।

पानी की कमी से जूझ रहे खेतों के लिए असमय बारिश एक ओर वरदान साबित हुआ है, वहीं धान की बालियों को प्रभावित किया है। जिले में पखवाड़े भर से बारिश का दौर जारी रहा। अलग-अलग स्थानों में खंड वर्षा जारी रही। खेतों में मोटे किस्म के धान की बालियां आने लगी है। पतले प्रजाति के धान में फूल आने लगे हैं। किसानों की मानें तो असमय होने वाली बारिश व बूंदाबांदी के कारण धान के फूल में झड़न होती है। इससे वह बीज के रूप में विकसित नहीं हो पाता। इस तरह से किसानों को अपेक्षित पैदावार नहीं मिल पाती। बारिश के कारण व तेजी से मौसम में हो रहे परिवर्तन के चलते धान के पौधों में कीट प्रकोप का भी असर दिखाई देने लगा है। धान की बेहतर पैदावार के लिए आशान्वित किसान अब बारिश की बजाय मौसमी बीमारी से निजात की जुगत में लग गए हैं। मौसमी परिवर्तन व बारिश का दौर जारी रहने के कारण दवाओं का छिड़काव संभव नहीं हो पा रहा है। लिहाजा किसान बारिश थमने का इंतजार कर रहे हैं। तनाशोख पत्तीछेदक माहो आदि बीमारियों से ग्रस्त हो रहे धान की फसल के लिए दवा छिड़काव रोकथाम बेकार ही साबित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर से नवंबर माह के बीच धान की फसल तेजी से विकसित होते हैं। धान की बालियों में दाने आने की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है। लिहाजा ऐसे समय में कीट प्रकोप भी तेज हो जाता है। उस पर मौसमी मार के चलते किसानों को उत्पादन के नाम पर घाटे के सौदे का निर्वहन करना पड़ता है। जुलाई में लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने के कारण किसानों को रोपाई के लिए खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। थरहा रोपाई में होने वाली लेटलतीफी दूरगामी असर करता है। कई बार समय पर बारिश नहीं होने के कारण किसानों को वयस्क थरहा का रोपाई के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिसका भी उत्पादन पर आंशिक असर होता है। जिले में जारी बारिश का दौर यदि लंबे समय तक जारी रहा तो यह फसल के लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है।