कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

सुबह-शाम दोनों वक्त ओपीडी सेवा शुरू करने सरकारी आदेश के विरोध में आखिरकर डॉक्टरों ने कामबंद हड़ताल शुरू कर दिया है। गुरुवार को दोपहर तीन बजे तक आदेश वापस लेने का समय दिया गया था। आदेश नहीं आने पर जिला अस्पाताल सहित सीएचसी के 18 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। जिला अस्पताल में सुबह से ही इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज हलकान रहे। ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड को आयुर्वेद डॉक्टरों के भरोसे छोड़े जाने से मरीजों को इलाज बगैर निराश लौटना पड़ा।

जिला अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों के पहुंचने का क्रम अन्य दिनों की तरह सुबह से ही जारी रहा। डॉक्टरों ने दोपहर तक समय दे रखा था कि तीन बजे तक सरकार उनकी मांगों के बारे में विचार करती है तो वे काम पर रहेंगे। ड्यूटी पीरियड में होने के बाद डॉक्टर नए मरीजों का इलाज करने से बचते रहे। पुराने मरीजों के ही इलाज की औपचारिकता जारी रही। रूटिन चेकअप के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को रेपᆬर का राह दिखाया गया। महिलाओं को लेकर पहुंची मितानिनों को भी ग्रामीणों की खरी खोटी सुननी पड़ी। नकटीखार से आई महिला रीमन ने बताया कि डॉक्टरों के हड़ताल से उसका रूटिन चेकअप नहीं हो पाया। मदनपुर से पहुंचे रमेश राठिया ने बताया कि वह अपने बच्चे की इलाज के लिए आया था, किंतु डॉक्टर्स के नहीं रहने से अब व निजी अस्पताल जाने पर मजबूर हैं। पहले से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में गिनती के विशेषज्ञ हैं। उनके भी भी हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर आयुर्वेदिक डॉक्टर बैठे थे। इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज डॉक्टर बदल जाने से वापस हो गए। अन्य दिनों की तरह पुरुष और महिला वार्ड में रूटिन चेकअप के लिए रात के समय डॉक्टर नहीं पहुंचे। भले ही अन्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की उपस्थिति कम थी लेकिन दूरदराज से पहुंचने वाले मरीजों के लिए बिना इलाज वापस लौटना परेशानी का सबब बना रहा।

निजी अस्पाल जाने की मजबूरी

सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के बेमुद्दत हड़ताल पर चले जाने से सबसे अधिक समस्या दूरदराज से पहुंचने वाले लोगों को हो रही है। अस्पताल में इलाज की अपेक्षा लेकर पहुंचने वाले इमरजेंसी जैसे प्रसव आदि के मरीजों को मजबूरीवश निजी अस्पताल की राह पकड़नी पड़ रही है।

पोड़ी-उपरोड़ा व पाली में हड़ताल बेअसर

पोड़ी-उपरोड़ा और पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हड़ताल बेअसर रहा है। डॉक्टर अन्य दिनों की तरह उपस्थित रहे। ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड अन्य दिनों की तरह खुले रहे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस आशय की जानकारी देते हुए कहा कि करतला, कटघोरा एवं कोरबा में भी वैकल्पिक चिकित्सकों की व्यवस्था की गई है।

प्रमोशन ड्यू, बनाई दूरी

हड़ताल पर जाने वालों डॉक्टरों में आपसी सामंजस्य का अभाव देखा जा रहा है। हड़ताल में शामिल कुछ डॉक्टरों का प्रमोशन ड्यू है, इसलिए हड़ताल से दूर रहे। यही नहीं डॉक्टरों की मांग के संबंध में कुछ भी कहने से बचते रहे। दोपहर के बाद डॉक्टरों के चले जाने के बाद कार्यरत डॉक्टर भी चले गए।

डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से व्यवस्था दुरुस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। सीनियर डॉक्टर्स अपनी निर्धारित समय के अलावा अतिरिक्त ड्यूटी दे रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सकों को भी दायित्व दिया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी इलाज की सुविधा जारी है।

- डॉ. बीबी बोडे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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राज्य संगठन की ओर से शासन को दो टाइम ओपीडी सेवा आदेश वापस लेने के लिए दोपहर तीन बजे तक का अल्टीमेटम दिया गया था। आदेश यथावत जारी रहने से डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने का मूड पहले से बना लिया था। जब तक संगठन का आदेश नहीं आता, तब तक सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे।

- डॉ. रविकांत सिंह राठौर, जिला संगठन अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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