कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने शहर के कुछ दुकानों में जांच कार्रवाई की। इस दौरान कुछ में साफ-सफाई को लेकर लापरवाही मिली तो कहीं पर तय नियम व कायदे भी दरकिनार करते पाए गए। अफसरों ने दुकान संचालकों को नियमित सफाई और नियमों के अक्षरशः पालन करने की समझाइश दी। इस दौरान वहां से खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए गए।

गुरुवार को हुई यह जांच कार्रवाई कोरबा शहर में चली। अफसर एवं तकनीकी अमले की टीम ने टीपी नगर स्थित रवि स्वीट्स, निहारिका में संचालित सर्वमंगला फ्लोर मिल एवं अनाज भंडार में दबिश दी। रवि स्वीट्स से जहां बर्फी के सैंपल लिए, वहीं फ्लोर मिल से आटा व बेसन का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है। दोनों ही स्थानों में नियम-कायदों का पालन करने कहा गया। खासकर रवि स्वीट्स में साफ-सफाई को लेकर लापरवाही भी उजागर हुई, जिसमें अपेक्षित सुधार जल्द से जल्द किए जाने की समझाइश संचालक को दी गई। स्वादिष्ट मिठाइयों को बाजार में सजा देख हर किसी के मुंह में पानी आ जाना स्वाभाविक है। सजावटी चकाचौंध के बीच रंग-बिरंगी मिठाइयों से सजे दुकानों में ढेर सारा खोवा व मावा के बीच छुपे मीठे जहर को हर कोई समझ नहीं पाता और परिवार समेत इन्हें इस्तेमाल कर अपना स्वास्थ्य खराब कर लेता है। नकली खोवा तथा वनस्पति घी के इस्तेमाल से बनाई गई इन मिठाइयों की असलीयत का पता लगाना हर किसी के लिए संभव नहीं। नकली मावा या मिठाइयों की गुणवत्ता सही है, अथवा नहीं इसका पता लगाने की जिम्मेदारी जिला खाद्य एवं आयुष विभाग की होती है। निरीक्षण की कार्रवाई में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरआर देवांगन, भीष्मदेव सिंह कंवर व विकास भगत शामिल रहे।

अखबार का प्रयोग, लाइसेंस डिस्प्ले गायब

जांच टीम में रहे खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के निरीक्षक विकास भगत ने बताया कि संस्थानों में अब भी अखबार का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को संधारित करने किया जा रहा है। इसे लेकर समझाइश दी गई है कि वे खाने-पीने की चीजों को न्यूज पेपर पर न रखें और न ही ग्राहकों को इस्तेमाल करने दें। इसी तरह लाइसेंस डिस्प्ले नहीं किया जा रहा था और रसोईघर में ग्लोव आदि का प्रयोग भी नहीं किया जा रहा था। इन सबको लेकर भी संचालकों को समझाइश देते हुए निर्धारित की गई व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने कहा गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति इन कमियों के कारण बीमार न हो।

सूजी या वनस्पति घी का प्रयोग

विभाग का कहना है कि ज्यादातर मामलों में व्यवयासी अपने सामान की गुणवत्ता खराब करके बेचते हैं। मिठाई बनाने शुद्ध खोवा, छैने या मावा की बजाय वनस्पति घी या नकली घी अथवा सूजी मिला देते हैं। इस तरह जो कीमत मिठाई के एवज में ग्राहकों से वसूली जाती है, वास्तव में दिया गया सामान उस कीमत के मुकाबले कम गुणवत्ता का होता है। ऐसा प्रकरण पाए जाने पर होटल संचालक के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। त्योहारों में तैयार होने वाली मिठाइयों में मिलावट व खराब गुणवत्ता के सामानों का इस्तेमाल अथवा रासायनिक रंगों का प्रयोग सबसे ज्यादा संभावित होता है।

एफएसएसएआइ के मानकों का पालन

कार्रवाई के दौरान टीम का नेतृत्व कर रहे जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरआर देवांगन ने आम लोगों से अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए खाद्य सामग्री की सुरक्षा एवं हाइजीन को लेकर सावधान रखने की गुजारिश की है। उन्होंने कहा कि लेबलिंग व पैकेजिंग में दर्ज होने वाली अनिवार्य जानकारी व सूचनाएं अंकित होना चाहिए, जिसका ध्यान खरीदारी के वक्त ग्राहक भी ध्यान में रखें। उपभोक्ता उनका अवलोकन कर निर्धारित तिथि के भीतर इस्तेमाल करें। इन जानकारियों के अभाव में कई बार एक्सपायरी डेट निकलने के बाद भी खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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