कोरबा । नईदुनिया प्रतिनिधि

विद्युत कंपनी का एकीकरण करने उच्च प्रबंधन ने मंथन शुरू कर दिया है। अमलीजामा कब तक पहनाया जाएगा, अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। एकीकरण किए जाने से अफसरों के ग्रेडेशन का विवाद होने की संभावना जताई जा रही है। अफसर वरिष्ठता को लेकर ज्यादा चिंतित हैं।

सीएसईबी विखंडन के बाद पांच कंपनी का गठन किया गया। वर्तमान में होल्डिंग, उत्पादन, पारेषण, वितरण तथा ट्रेडिंग कंपनी अस्तित्व में हैं। विखंडन के बाद कंपनी की आर्थिक स्थिति डगमगाने से विलय करने की मांग उठ रही है। लंबे समय से श्रमिक संघ इसके लिए प्रबंधन एवं राज्य सरकार से मांग भी कर रहे हैं। राज्य में सरकार बदलने के बाद अब एकीकरण का एक बार फिर दो कंपनी बनाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है, हालांकि अभी सैद्धांतिक रूप से सहमति बनी है। दो कंपनी होगी या तीन कंपनी, इस बारे में भी अंतिम रूप से निर्णय नहीं लिया जा सका है। कंपनी से जु़ड़े जानकारों का कहना है कि कंपनी का विलय होने पर इंजीनियरों को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि पद कम होंगे और उन्हें पदोन्नाति तथा ग्रेड का नुकसान झेलना पड़ेगा। इन इंजीनियरों का कहना है कि दो कंपनी बनने की स्थिति में ग्रेडेशन प्रभावित होगा और उनकी वरिष्ठता भी प्रभावित होगी, इसलिए कई अफसर तीन कंपनी बनाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। अफसरों की आपसी खींचातानी से यह मामला अब फंसता हुआ नजर आ रहा है। यही वजह है कि इंजीनियर दो कंपनी की बजाय तीन कंपनी उत्पादन, पारेषण तथा वितरण बनाने में ज्यादा जोर दे रहे हैं, ताकि ग्रेड व वरिष्ठता बनी रहे। तीनों कंपनी में ग्रेडेशन अलग-अलग होता है, बावजूद इंजीनियर पुरानी व्यवस्था नहीं चाह रहे हैं।

सर्वाधिक मैनपावर उत्पादन व वितरण कंपनी में

विद्युत कंपनी में लगभग 17500 कर्मचारी-अधिकारी विभिन्ना पदों पर कार्यरत हैं। इनमें सर्वाधिक कर्मचारी-अधिकारी उत्पादन कंपनी तथा वितरण विभाग में कार्यरत हैं। इसके बाद पारेषण कंपनी का नाम आता है। होल्डिंग एवं ट्रेडिंग कंपनी में काफी कम संख्या में अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं।

वित्त व एचआर विभाग वाले ज्यादा चिंतित

कंपनी एकीकरण से इंजीनियर जितने परेशान हैं, उससे ज्यादा वित्त एवं मानव संसाधन एचआर वाले अधिकारी-कर्मचारी परेशान हैं। इन दोनों विभाग के कर्मियों को ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन्हें एक करना होगा। ऐसी स्थिति में एक लेखापाल होगा, जबकि वर्तमान में सभी पांच कंपनी में अलग-अलग लेखापाल हैं। इसी तरह मानव संसाधन विभाग की स्थिति बनी हुई है। इस मुद्दे को लेकर भी प्रबंधन को पत्र लिखा गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network