कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मधुमक्खी पालन से हाथियों को भगाने की योजना को दो साल बाद भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। वन विभाग ने इसके लिए हाथी प्रभावित गांव के करीब छह सौ ग्रामीणों को लाखों रुपये खर्च कर प्रशिक्षण भी दिया। इससे शहद उत्पादन के साथ हाथियों के हमले के घटनाओं को रोकने की योजना थी। फंड के अभाव में इस दिशा में अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।

समय के साथ जिले के जंगल में भ्रमण कर रहे हाथियों की संख्या भी बढ़ते जा रही। पिछले कुछ दिनों से हाथियों का उत्पात कम रहा, पर एक बार फिर पसान रेंज में हाथी ग्रामीण के मकानों को निशाना बनाने लगे हैं। यूं तो वन विभाग ने हाथियों से बचाव के लिए कई योजनाएं तैयार की। प्रमुख योजनाओं में मधुमक्खी पालन की योजना भी शामिल है। कौशल विकास के तहत ग्रामीणों को इसका प्रशिक्षण दिया गया था। अब जब ग्रामीण इस कार्य को शुरू करना चाह रहे, तो मदद नहीं मिल रही है। वन विभाग के पास फंड नहीं है। हाथी के हमलों को देखते हुए विभाग ने निर्णय लिया गया था कि प्रभावित गांव में लोगों का मधुमक्खी पालन के गुर सिखाए जाए। ये रोजगार की दृष्टि के साथ-साथ हाथी गांव की सीमा में प्रवेश ना करें इसके लिए भी जरुरी था। जिले भर ग्रामीणों को करीब छह माह तक बाहर से एक्सपर्ट बुलाकर कौशल विकास की ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि वे अपनी जान बचाने के साथ बेहतर मुनाफा भी कमा सकें। हाथी, मधुमक्ख्यिों से घबराने के साथ ही उन्हें यह डर रहता है कि मधुमक्खी उनके सूंड और आंखों में काट सकती हैं। मधुमक्ख्यिों का झुंड हाथियों को परेशान करता है और उन्हें वापस चले जाने के लिए मजबूर करता है। लंबे समय तक हाथी इसे अपनी याददाश्त में बात रखते है।

इन योजनाओं पर फिर चुका है पानी

0 वन विभाग ने हाथी-मानव द्वंद्व को रोकने के लिए करीब पांच साल पहले हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग की शुरुआत की थी । इसमें हल्का करंट रहता है, जिससे हाथी गांव के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।

0 वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में टेंपरेरी ट्रांजिस्ट कैंप की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत विभाग जंगल में हाथियों को चारा देता था। विभाग का मकसद था कि इससे हाथी गांव की तरफ रुख नहीं करेंगे।

0 कर्नाटक से छह प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को फरवरी 2018 में छत्तीसगढ़ लाया गया। विभाग का मानना है कि हाथी-मानव द्वंद्व रोकने में कुमकी हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

0 हाथियों के पल-पल की जानकारी से अवगत होने के लिए वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर हाथियों में सैटेलाइट कलर आइडी लगाया जा रहा है।

0 वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सोलर बजुका नामक योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत पुतला बनाकर इसे खेतों में खड़ा कर दिया जाता था। हाथी जब खेत में पहुंचते थे तो उसे करंट लगता था और वह भाग जाते थे।

0 हाथियों के गले में घंटी बांधने का आदेश जारी किया गया। इसके लिए विभाग ने 24 घंटी खरीदी थी, लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। अब विभाग दुकानदार को घंटी वापस करने की तैयारी कर रहा है।

0 रायपुर और महासमुंद के बार्डर पर करंट वाले बैरिकेट्स यानी एलीफेंट अलर्ट बैरिकेट्स लगाने की योजना बनी है। इसका मकसद हाथियों के रास्ते को बदलना है।

किस जिले के कितने गांव प्रभावित

सरगुजा में 17, सूरजपुर में 48, बलरामपुर में 42, धरमजयगढ़ में 18, कोरबा में 17, रायगढ़ में 20, कटघोरा में 12, महासमुंद में 17, बालौदाबाजार में 20

फिर दो मकान तोड़े, आदिवासी परिवार बेघर

गौरेला- पेंड्रा- मरवाही जिले के जंगल से एक बार फिर 23 हाथियों का झूंड पसान रेंज के जंगल में लौट आया है। पिछले दो दिन से हाथी उत्पात मचा रहे हैं। ग्राम बर्रा के दो ग्रामीणों का मकान अब तक तोड़ चुके हैं। इसकी वजह से ग्रामीण पेड़ के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी मकान तोड़ कर महुआ, धान व चावल को खा गए। सूचना मिलने के बाद भी वन अमला समय पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहा है कि रेंजर फोन नहीं उठाते हैं, इसलिए समय पर सूचना नहीं पहुंचती है।

करतला परिक्षेत्र में लगे फेंसिंग तार भी क्षतिग्रस्त

करतला वन परिक्षेत्र में सौर ऊर्जा चलित फेंसिंग लगाया गया, पर यह भी कारगार साबित नहीं हुआ। कई स्थानों में हाथियों ने करंट प्रभावित फेंसिंग को तोड़ दिया, तो कुछ स्थानों में अव्यवस्था की वजह से फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो गए। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में क्षतिग्रस्त फेंसिंग को क्षेत्र के ग्रामीण उठा कर ले गए। उल्लेखनीय है कि हाथियों को रोकने के लिए इस योजना को लागू किया गया था। इसमें सौर ऊर्जा के अलावा कम क्षमता की बैटरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत पीवीसी पाइप को थोड़े- थोड़े दूरी में खड़ा कर उसमें जीआई तार का घेरा लगा दिया जाता है और इसी तार में करंट प्रवाहित किया जाता है। हाथी जब भी इस फेंसिंग को पार कर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो जीआइ तार में प्रवाहित होने वाला करंट का झटका उन्हें लगता है जिससे वे वापस लौट जाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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