विकास पाण्डेय, कोरबा। Korba News: शहर से लगे रमणीय पर्यटन स्थल काफी प्वाइंट पर आकर आप अपना हृदय न हार जाएं, यह संभव नहीं। सुनहरी सुबह हो या सिंदूरी शाम, यहां घूमने आने वालों का तांता लगा ही रहता है। घने वन्य क्षेत्र में पहाड़ के ऊपर छोटी सी पहाड़ी में यह प्वाइंट विकसित किया गया है, ताकि सैलानी यहां पर बैठकर मीलों दूर हरी-भरी वादियों को निहारने का आनंद ले सकें। मंशा के विपरीत यहां की शुद्धता में मिलावट घोलने वालों की भी कमी नहीं, जिनके लिए यह नशावृत्ति का ठिकाना बन गया है। इसका पता तब चला जब प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेकर युवाओं के एक समूह ने यहां सफाई अभियान चलाया। काफी प्वाइंट पर चाय-काफी के डिस्पोजल कप की जगह बीयर की करीब डेढ़ हजार बोतलें निकलीं।

काफी प्वाइंट जिला मुख्यालय से करीब 25 व बाल्कोनगर से 15 किलोमीटर दूर है। शहर के शोर से बाहर निकलकर जैसे ही काफी प्वाइंट जाने के मार्ग पर आएं, तो लगभग हर वक्त लोग पैदल या साइकिल पर सैर करते मिल जाएंगे। इस क्षेत्र को विशेषकर सेहत के प्रति जागरूक नागरिकों व प्रकृतिप्रेमियों के लिए जाना जाता है। पर्यावरण, वन्य जीवों, प्रकृति संरक्षण और विशेषक सरीश्रृपों के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्था रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यूअर सोसायटी (आरसीआरएस) की टीम इन दिनों विभिन्न पर्यटन स्थलों में जाकर स्वच्छता अभियान चला रही।

संस्था के अध्यक्ष व सर्पमित्र अविनाश यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में करीब 50 युवाओं की टीम इस मुहिम से जुड़ी हुई है। यह समूह हर रविवार को जिले के अलग-अलग पर्यटन स्थलों में जाकर वहां छोड़ा गया पर्यटकों का कचरा चुनकर मणिकंचन केंद्र के हवाले कर देती है। इसी क्रम में इन युवाओं ने काफी प्वाइंट में दो बार अभियान चलाया, जिसमें यहां कोने-कोने से पहली बार में 632 व इस रविवार देशी-विदेशी मदिरा व बीयर की 812 बोतलें मिलीं। यह बोतलें पहाड़ी के ऊपर, मार्ग के किनारे, नीचे खाई में जहां-तहां फेंकी गई थी। करीब डेढ़ हजार बोतलें एकत्र कर नगर पालिक निगम के स्वच्छता केंद्र के हवाले कर दिया गया।

अब तक समेटा 500 किलोग्राम से अधिक कचरा

केवल काफी प्वाइंट पर चलाई गई इस मुहिम से आरसीआरएस की टीम ने टूटकर बिखरी पड़ी व साबुत बोतलों के अलावा पांच सौ किलोग्राम से अधिक कूड़ा-करकट समेटकर मणिकंचन केंद्र को दिया है। इनमें प्लास्टिक की पानी की बोतलें, पालीथिन, डिस्पोजल प्लेट, कप, ग्लास व अन्य कचरा शामिल है। पर्यावरण के बीच जाकर आप और हम शांति का आनंद प्राप्त करते हैं। आरसीआरएस ने पर्यटकों से आग्रह किया है कि प्रकृति जिस प्रकार हमारी हर जरूरत पूरी करती है, उसी प्रकार प्रकृति का भी ख्याल रखना हम सबका व्यक्तिगत दायित्व है। इसलिए कचरा स्थल पर छोड़ने की बजाय अपने साथ वापस ले आएं।

दुर्लभ जीवों और वनस्पतियों का बसेरा

बाल्को का यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए काफी प्रसिद्ध हैं, जहां अनेक वनस्पितयों एवं दुर्लभ जीवों का बसेरा है। अविनाश ने कहा कि इन कचरों से न केवल पर्यावरण व प्रकृति को नुकसान पहुंचता है, वन्य जीव आकर्षित होकर चले आते हैं। डिस्पोजल में चिपके खाने के कण के साथ प्लास्टिक भी उनके पेट में जा सकता है, जो उसे बीमार कर सकता है। इसी तरह कांच के टुकड़ों से वे घायल भी हो जाते हैं। उन्होंने खुद भी कई बार वन्य जीवों को कांट के टुकड़े लगने से घायल होते देखा है। कई बार सर्प भी कांच के कटकर चोटिल हो जाते हैं। घने जंगल में समय पर उपचार नहीं मिल पाने से ऐसे घायल जीव अंतत: मर जाते हैं।

पहुंच मार्ग पर हो चुकी है कई घटनाएं

काफी प्वाइंट व उससे पहले पड़ने वाले घने वन्य क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की चहलकदमी घटनाओं के रूप में अक्सर सामने आती रहीं हैं। बाल्को पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत इस पर्यटन स्थल में सैर के लिए जाने वालों के साथ लूट की कई घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस विभाग से भी समय-समय पर पहुंच मार्ग की शुरुआत में स्थित वन विभाग के नाके पर जांच अभियान चलाया जाता है। इसके बाद भी नशे की आदत में पड़ चुके युवा व असामाजिक कार्यों में लिप्त व्यक्ति यहां आकर अपनी नशे की जरूरत पूरी करने का रास्ता निकाल ही लेते हैं। यही वजह है जो इतनी ज्यादा मात्रा में इस पर्यटन स्थल पर मदिरा की बोतले पाई गईं।

Posted By: Himanshu Sharma

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