कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिंचाई सुविधा की कमी की वजह से आज भी जिले के किसान मानसून आश्रित खेती पर निर्भर हैं। एक से 26 जून की स्थिति में 1040.6 मिमी वर्षा हो चुकी है, यह बीते वर्ष की तुलना में 246.5 मिमी अधिक है। इसके बाद भी खेती में प्रगति नहीं है। जिले के अधिकांश किसान रोपा खेती करते हैं, जिसके लिए थरहा तैयार करना जरूरी है। मानसून की सक्रियता के अभाव में रोपा बोआई पिछड़ने लगी है।

खरीफ वर्ष की तैयारी पर मानसून की देरी भारी पड़ने लगी। 15 जून को हुई झमाझम बारिश से माना जा रहा था कि जुलाई माह अंत तक खरीफ की 50 फीसद प्रारंभिक खेती कर ली जाएगी। सप्ताह भर से हो रही खंड बारिश ने किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी हैं। किसानों को खेत में पानी भरने का इंतजार है। जिले में खरीफ का रकबा एक लाख 29 हजार 285 हेक्टेयर है, जिसमें 81 हजार 760 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। जिले में अब तक हुई वर्षा पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक है। इसके बाद भी खेती कार्य में प्रगति नहीं आ पाई है।

रोपा खेती के पहले थरहा तैयार करना पड़ता है, जिसके लिए खेत में पानी का भराव होना जरूरी है। इससे खेत में कीचड़ तैयार कर धान की बोआई की जाती हैं। 15 से 20 दिन के भीतर थरहा तैयार होता है, जिसे खेत में पर्याप्त दूरी में रोपाई की जाती हैं। बारिश में देरी को देखते हुए कृषि विभाग की ओर से किसानों को सूखा बोआई के लिए कहा जा रहा था , लेकिन उसका समय समाप्त हो चुका है। अब सूखा बोआई की गई तो उपज प्रभावित होगा। अब तक हुई वर्षा पर गौर किया जाए तो सबसे अधिक कटघोरा तहसील में 270.3 मिमी दर्ज की गई है। इसी तहर सबसे कम 54.2 मिमी वर्षा हरदीबाजार तहसील में हुई है। जिन किसानों ने जून माह के पहले सप्ताह में बोआई की थी उनके लिए थम-थम कर हो रही वर्षा लाभ दायक है। मिट्टी में नमी आने के किसानों ने रोपा बोआई के खेतों की जोताई शुरू कर है लेकिन थम-थम कर हो रही बारिश से खेती के लिए अनुकूल वातावरण नहीं बन रहा।

कोदो व मक्का के लिए कर रहे किसानों को प्रेरित

जिला कृषि विभाग ने इस बार धान की खेती 9456 हेक्टेयर कम कर दी है। धान के बदले अन्य फसल लगाने के लिए किसानों को प्रेरित की जा रही। विभाग की ओर 1000 एकड़ में प्रदर्शन खेती भी लगाई जाएगी, इसके लिए करतला और पाली के किसानों को चिन्हांकित किया गया है। धान की तरह इस बार कोदो की भी खरीदी की जाएगी। अनुभव नहीं होने के कारण किसान इसकी बोआई के लिए सीमित किसान ही सामने आ रहे हैं। अब तक जिले में 340 किसानों ने कोदो बोआई के लिए कृषि विस्तार अधिकारियों को सूचना दी है।

लिफ्ट एरिगेशन को नहीं मिली स्वीकृति

लिफ्ट एरिगेशन से जिले के कोरबा, पोड़ी उपरोड़ा व करतला विकासखंड 23 हजार हेक्टेयर खेतों को सिंचित किया जा सकता है। योजना को बजट में शामिल करने के लिए जलसंसाधन विभाग पत्र भी लिखा जा चुका है। दो साल पहले 13 करोड़ की स्वीकृति मिली थी लेकिन राशि आवंटन नहीं होने से यह योजना कागज में ही समिट गया है। मायनर के जलाशय ग्रीष्म में सूख चुके हैं, ऐसे में आश्रित खेतों को पानी मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। वर्षा जल संरक्षण के लिए किसानों के पास संसाधन नहीं होने की वजह जब तक बारिश नहीं होगी तब तक खेती को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

28 से सघन बारिश की संभावना

मौसम के जानकारों की माने तो 28 जून सघन बारिश की संभावना है। किसानों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मैदान खेतें में सीमित दिनों के भीतर तैयार होने वाले फसल बोने के लिए कहा जा रहा। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार किसान पानीदार जमीन में पतला और सुगंधित धान की बोआई करें। इससे उन्हे खुले बाजार में बिक्री करने से अधिक लाभ मिलेगा। किसानों को व्यवसायिक खेती से जोड़ने के लिए प्रेरित की जा रही है।

0 जिले में एक जून से अब तक हुई वर्षा

तहसील- मिलीमीटर में

कोरबा- 93.4

करतला- 179.0

कटघोरा- 263.1

दर्री- 106.1

पाली- 182.0

हरदीबाजार- 54.0

पोड़ी उपरोड़ा- 148.6

जिन किसानों के पास सिंचाई सुविधा से उन्हे रोपा खेती के लिए कहा जा रहा, वहीं वर्षा आश्रित खेती करने वालो सूखा बोआई के लिए प्रेरित किया जा रहा। 28 जून से सक्रिय मानसून की संभावना जताई जा रही।

अनिल शुक्ल, उप संचालक, कृषि

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close