कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रकम मिलने की आस में सुबह से आकर भूखे-प्यासे कतार में खड़े किसान पांच घंटे अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। अगर कोई समस्या थी, तो बता देते ही आज काम नहीं हो सकेगा। दोपहर के तीन बज गए, तो अचानक कहते हैं अपने-अपने घर चले जाओ। कोई 40 तो कोई 50 किलोमीटर दूर से आया था। समस्या बताई तो समझने की बजाय भड़क गए और कहा- आपको जो करना है करो, रुपये नहीं मिलेंगे।

अपनी समस्या बताते हुए किसानों की यह शिकायत जिला सहकारी बैंक की बरपाली शाखा से सामने आई है। किसानों ने बताया कि बैंक से अपने खाते में आई राशि आहरित करने करीब 70 किसान अपने-अपने घरों से तैयार होकर सुबह ही पहुंच गए थे। बैंक खुलते ही उन्होंने कतार बना ली और अपनी बारी आने का इंतजार करने लगे। बैंक में काफी भीड़ भी थी। क्यों न हो, सभी को जरूरत होती है। इसलिए हम भी चुपचाप खड़े होकर प्रक्रिया का पालन कर रहे थे। एक-एक कर पांच घंटे गुजर गए और दोपहर के तीन बज गए। उसके बाद बैंककर्मियों ने आकर कह दिया कि आज काम नहीं हो पाएगा। अपने घर चले जाओ। इतनी दूर-दूर से आए ग्रामीण हताश हो गए। अपनी समस्या और जरूरत बताते हुए रकम जारी कर देने की गुजारिश करने लगे। पर उन्होंने बात सुनने की बजाय घुड़की देनी शुरू कर दी। किसानों का आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने उनसे कहा कि जहां शिकायत करना हो करें, उन्हें रुपये नहीं मिलेंगे। बरपाली बैंक में परेशान होकर शिकायत करने वाले किसानों में धनेश राम राठिया बांधापाली, धनश्याम पटेल रामपुर, पवन कुमार पटेल सेंद्रीपाली, नत्थूराम राठिया बांधापाली, भोजराम राठिया डोंगाआमा समेत अन्य शामिल हैं।

कतार तोड़कर बिचौलियों के पासबुक पास

सेंद्रीपाली के किसान पवन कुमार पटेल ने बताया कि एक ओर उन्हें घर जाने कह दिया गया पर दूसरी ओर वहीं खड़े बिचौलिए किस्म के लोगों को कतार तोड़ चुपचाप भीतर बुला लिया गया। इस बीच दस पासबुक भी पास कर दिए गए और उनका काम कर दिया गया। किसानों की जरूरत के लिए खुले इस बैंक को भी अधिकारियों ने कमाई का जरिया बना लिया है। मनमानी कर रहे शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

खेती का सीजन है, किसी के घर शादी है

बांधापाली के किसान नत्थूराम ने बताया कि हम किसानों ने खेती का सीजन ही सबसे महत्वपूर्ण होता है, जब खर्च का दौर शुरू होता है। खेतों को सजाने-संवारने और बारिश के लिए तैयार करने के दस खर्चे होते हैं। इसके अलावा कई लोगों के घर में शादियां भी होनी हैं, जिसके लिए रुपये की दरकार है। ऐसे में बैंक के खाते में रखे रुपये समय रहते न मिल पाएं, तो उसका क्या फायदा। ऐसे में हम भला बैंक से मदद न मांगें तो कहां जाएं।

खाता मेरा, बैंक सरकारी तो उन्हें क्या परेशानी

ग्राम डोंगाआमा से आए किसान भोजराम राठिया ने बताया कि जिला सहकारी बैंक को किसानों का हितैषी बैंक कहा जाता है। पर यहां तो किसानों को ही ऐसे भगा दिया जा रहा, जैसे वह अपनी रकम लेने नहीं, दूसरों की छीनने आए हों। खाता हमारा और बैंक सरकार की, तो फिर यहां कार्यरत कर्मचारी को उन्हें रकम देने में क्या परेशानी हो रही, यह समझ के परे हैं। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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