कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धान खरीदी के लिए जिले में पांच लाख प्लास्टिक बारदानों का उपयोग किया जाएगा, इसकी मांग विपणन विभाग ने शासन से की है। 44 उपार्जन केंद्रों में इस बार 12 लाख 50 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्‌य रखा गया है। इसके लिए 20 लाख बारदानों की आवश्यकता होगी। अब तक केवल 6.50 लाख पुराने बारदाने ही संग्रहित किए गए हैं। 3.50 लाख नए बारदानों की आपूर्ति हुई है। दोनों ही उपलब्धता आवश्यकता से कम है।

इससे पहले डेढ़ से दो लाख प्लास्टिक बारदाने ही उपयोग किए जाते थे ,लेकिन इस वर्ष कमी का देखते हुए संख्या बढ़ा दी गई है। समय पर आपूर्ति नहीं हुई तो धान खरीदी का कार्य प्रभावित होगा। कोरोना काल में नए बारदानों की बुनाई नहीं हुई है। ऐसे में राज्य शासन भी बारदाना आपूर्ति में बेबस है। यही वजह है कि अधिक धान पुराने बारदानों से खरीदी करने की तैयारी की जा रही है। बीते वर्ष 50-50 फीसदी नए-पुराने बारदानों में खरीदी हुई थी। नए बारदानों की कम आपूर्ति और पुराने का संग्रहण कम होने से प्रशासन परेशान है। लाकडाउन के दौरान पीडीएस दुकानों के बंद रहने से बारदाना संग्रहण पहले से प्रभावित है। निजी दुकान संचालक और मिलरों ने अपनी सुविधा के लिए बारदाने काफी संख्या में डंप कर लिए हैं । इससे भी संग्रहण प्रभावित हो रहा है। कुछ दिन पहले जिला प्रशासन की टीम ने छापामार करवाई की थी। सीतामढ़ी के एक गोदाम से 70 हजार बारदाने जब्त किए गए थे। बारदाने की कमी को देखते हुए विपणन विभाग ने निजी दुकान संचालक और मिलर्स के लिए दिशा निर्देश जारी किया है, कि जिनके पास बारदाने है वे विपणन अथवा समिति में निर्धारित मूल्य में जमा करा दें, अन्यथा धान खरीदी शुरू होने के बाद छापामार करवाई की जाएगी और बारदाने जब्त किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पहले भी ड्रेनेज के लिए प्लास्टिक बारदानों का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब इसकी संख्या बढा दी गई है। नए धान में नमी रहती है और प्लास्टिक बारदाने की भराई में वह सूख नहीं पाता। इससे मिलिंग के समय कनकी अधिक निकलती है। प्लास्टिक बोरी के धान उठाव के लिए मिलर्स आगे नहीं आते और मिलिंग कार्य में देरी होती है।

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32 हजार किसान बेचेंगे धान

धान खरीदी के लिए पंजीयन का काम पूरा हो चुका है। बीते वर्ष की 27 हजार 300 किसानों ने पंजीयन कराया था। इस वर्ष 5 हजार 123 नये किसान जुड़े हैं। खरीफ वर्ष में इस वर्ष 32 हजार 423 किसान धान की बिक्री करेंगे। बीते वर्ष 10 लाख 90 हजार क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। मानसून का साथ होने के कारण इस बार फसल भी बेहतर हुई है। पंजीकृत किसानों कि संख्या बढ़ने से केन्द्रों में धान की आवक भी अधिक होगी। जिसका सीधा असर बारदानों की आवश्यकता पर पड़ेगी।

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उपार्जन केंद्र में किसानों को गुजारनी पड़ेगी रात

समय रहते उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त बारदानों की आपूर्ति नहीं हुई तो बिक्री के लिए पहुंचने वाले किसानों को परेशानी होगी। धान खरीदी के अंतिम समय अधिक समस्या होती है। समय पर बारदाना उपलब्ध नहीं होने पर धान बेचने के लिए केंद्र पहुंच चुके वापस लौटना मुश्किल होता है। ऐसे में उन्हे केंद्र में ही रतजगा कर बारदाने आने का इंतजार करना पड़ता है। इधर विपणन विभाग ने गोदाम में 6 लाख 50 हजार बारदानों का संग्रहण तो कर लिया है, लेकिन उपार्जन केंद्र तक पहुंचाने के लिए अब तक वाहन का इंतजाम नही हो सका है।

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बारदानों का संग्रहण जारी है। शासन से एक हजार लाट प्लास्टिक बारदानों की मांग की गई है। मिलर और निजी दुकान संचालकों को भी बारदाने जमा करने के लिए कहा गया है, जमा नहीं करने पर छापामार कार्रवाई की जाएगी।

जान्हवी जिलहरे, जिला विपणन अधिकारी

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Posted By: Nai Dunia News Network

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