कोरबा/एतमानगर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कारीछापर के जंगल में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही। लगातार लकड़ी की तस्करी की जा रही है, इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

कटघोरा वनमंडल अंतर्गत एतमानगर परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कारीछापर के जंगल में साजा व साल के वृक्ष हैं। इस जंगल की हरियाली पर इन दिनों लकड़ी तस्करों की नजर लग गई है। वन माफिया इमारती लकड़ियों के चक्कर में साल-साजा के साथ अन्य हरे-भरे बड़े वृक्ष को अंधाधुंध काट रहे। एक तरफ सरकार वन की रक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही, वहीं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इसे नजरअंदाज कर रहे। ग्रामीणों को वनोपज के साथ-साथ वन विभाग को भी राजस्व देने वाला जंगल अब तस्करों के हवाले हो गया है। जंगल से अब तक दर्जनों की तादाद में साजा-साल सहित अन्य पेड़ काट दिए गए है। एतमानगर के पी-74 जंगल में जहां पहले हरियाली थी, अब वहां कीमती पेड़ों के कटे ठूंठ देखे जा सकते हैं। इस प्रकार घने जंगल का अस्तित्व खतरे में आ गया है। वनपरिक्षेत्र अंतर्गत डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड की तैनाती में जंगल की सुरक्षा का दायित्व होता है और गश्त की जाती है। वहीं इसकी मॉनिटरिंग रेंजर करते हैं, लेकिन एतमानगर वनपरिक्षेत्र का हाल तो अंधेर नगरी-चौपट राजा की तर्ज पर चल रहा है, जिसके कारण जंगल की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। गौरतलब है कि बीते 28 दिसंबर को केंदई रेंज अंतर्गत हुए एक मादा हाथी की मौत के मामले में शासन ने प्रभारी वनमंडलाधिकारी डीडी संत को निलंबित कर दिया है तथा उनके स्थान पर जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी वनमंडलाधिकारी (एसडीओ) जितेंद्र उपाध्याय को प्रभारी कटघोरा वनमंडलाधिकारी बनाया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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