कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

जगमग रोशनी से दूसरों के घरों में रोशनी बिखेरने वाले कुम्हारों के जीवन में खुशी और उत्साह की जो लहर दिखाई देनी चाहिए, वह दिखाई नहीं देती। पुश्तैनी व्यवसाय को संभाल रहे कुम्हारों का जीवन स्तर जैसा होना चाहिए, वैसा नहीं है।

यह कहना है सीतामढ़ी कुम्हारपारा निवासी योगेश प्रजापति का। बारहवीं कक्षा तक गणित विषय में पढ़ाई करने के बाद युवा योगेश घर में ही मिट्टी के करवा, दीया, धूपावली आदि तैयार करता है। युवा कारीगर प्रजापति ने बताया कि वह आगे की पढ़ाई करना चाहता है, किंतु घर की आर्थिक दशा सुदृढ़ नहीं होने के कारण पुश्तैनी कारोबार में ही जीविका की तलाश करनी पड़ रही है। प्रजापति ने बताया कि इस व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है, अब पहले की तरह मुनाफा नहीं हो पाता। शहर के बाजार में बाहर से आयातित आर्टिपिᆬशियल सामानों की खपत हो रही है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह युवाओं को प्रशिक्षित करे। लागत कम करने के लिए निःशुल्क मिट्टी उत्खनन की अनुमति दे। साथ ही मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए रियायत दर में ईंधन उपलब्ध कराए। शहर के सीतामढ़ी मोहल्ले का नाम केवल कुम्हारों के कारण कुम्हारपारा पड़ गया है। यहां कुम्हारों की बड़ी आबादी निवास करती है। सालों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुम्हार मिट्टी के बर्तन खिलौने, दीये, मूर्ति, कलश सहित अन्य वस्तुएं बनाते आ रहे हैं। पर्व विशेष में इसे बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। कुम्हारों के लिए चलाए जा रहे तमाम तरह की योजनाओं का लाभ जैसा इन्हें मिल पाना चाहिए, मिल नहीं पाया है। कुम्हार अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नजर नहीं आते। कुम्हारपारा की धनबाई कुंभकार ने बताया कि वह मिट्टी के खिलौने, दीये बनाने का कार्य बचपन से करती आ रही है। आज इस उम्र में आने के बाद भी यह काम कर रही है। आज से 20 साल पहले और अब की कमाई में जमीन आसमान का अंतर आ गया है। पहले घर आकर लोग सामान ले जाया करते थे, अब तो गली-गली में घूमने के बाद भी पूरे सीजन दीये खप नहीं पाते, इसलिए मुनाफा काफी घट गया है।

चाह कर भी नहीं छोड़ सकते

पुश्तैनी व्यवसाय को संभाल रहे हेमलाल कुंभकार ने बताया कि मिट्टी के दीये, खिलौने और अन्य सामान बनाना उनका पुश्तैनी कार्य है। इसे चाहकर भी नहीं छोड़ सकते। पहले की तुलना में मुनाफा जरूर घट गया है, लेकिन पर्व विशेष में सामानों की डिमांड रहती है। पहले की तुलना में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। मार्केट में तरह-तरह के रंग बिरंगे डिजाइनर दीये आने से बिक्री में कमी आई है। वहीं योगेश का कहना है कुम्हारों संगठित होकर नियमित बाजार के लिए स्थल की मांग की जानी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर सामानों को बिक्री करने में सुविधा हो।

कर मुक्त से राहत

कलेक्टर किरण कौशल ने निर्देश जारी किया है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों मिट्टी के दिए बेचने वाले कुम्हारों से किसा भी प्रकार का कर न लिया जाए। दीपावली पर्व पर बनाए जाने वाले मिट्टी के दीये के विक्रय को प्रोत्साहित करने के लिए सभी को मिट्टी के दीये खरीदने का आग्रह किया है। मिट्टी के दीये बनाकर बाजार में बेचने के लिए लाने पर इन ग्रामीण तथा कुम्हारों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को मिट्टी के दीये उत्सव के मौके पर उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित करें।

Posted By: Nai Dunia News Network