सुरेश देवांगन कोरबा (नईदुनिया)। गले की खराश मिटाने वाला अदरक इन दिनों कोरबा जिले के 82 नवाचारी किसानों की जिंदगी की खराश मिटा रहा है। पाली ब्लाक के उड़ता गांव के अलावा आसपास के इन किसानों ने परंपरागत धान की फसल छोड़कर इसे अपनाया है और धान की खेती से सात गुना अधिक लाभ भी कमा रहे हैं।

एक एकड़ खेत में 18 क्विंटल धान होता है। 2500 रुपये मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 45000 रुपये है। इसे तैयार करने में 10 हजार रुपये की लागत आती है। इस तरह शुद्ध लाभ 35 हजार रुपये है। एक एकड़ खेत में 50 क्विंटल अदरक होता है। थोक मूल्य में 50 रुपये की दर से बिक्री के आधार पर इसकी कीमत दो लाख 50 हजार है। एक एकड़ में बोआई की लागत 45 हजार रुपये आती है। इस तरह शुद्ध लाभ दो लाख पांच हजार है जो कि धान के मुकाबले सात गुना है।

जिला उद्यानिकी विभाग की देखरेख में पिछले साल 40 किसानों ने इसकी शुरुआत की थी। लेकिन, जब आसपास के किसानों ने उत्पादन व आय को देखा तो उन्होंने भी अदरक की खेती अपना ली। उद्यानिकी विभाग की उपसंचालक आभा पाठक ने इन किसानों की खेती को माडल के रूप में प्रस्तुत कर अन्य किसानों को प्रेरित करने और आगामी सालों में इसका दायरा और बढ़ाने की बात कही है। अदरक की खेती गर्म और आर्द्रता वाले स्थानों में की जाती है। पाली ब्लाक के गांव की मिट्टी इसके अनुरूप है इसलिए इस क्षेत्र का चयन किया गया है। खास बात यह है कि इस ओर रूचि लेने वाले किसानों की संख्या प्रति वर्ष बढ़ती जा रही। एक ही भूमि पर लगातार धान की फसल लेने से भूमि जनित रोग व कीटों में वृद्धि होती है। फसल परिवर्तन करने से किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। साल दर साल खेती करने से अब किसान प्रशिक्षित होते जा रहे हैं। उड़ता के किसान प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार उचित जल निकास विधि से खेती कर रहे। इस विधि से अदरक कंद अधिक विकसित होते हैं।

सोंठ बनाने किया जाएगा प्रशिक्षित

प्रशासन ने अदरक से सोंठ बनाने के लिए भी किसानों को प्रशिक्षित करने की तैयारी कर ली है। किसान बाजार में अदरक खपाने की जगह खुद सोंठ तैयार करेंगे। सामान्य अदरक की तुलना में सोंठ को अधिक समय तक भंडारण कर रखा जा सकता है। सोंठ की कीमत 200 रुपये किलो है। इससे किसानों की आमदनी और बढ़ जाएगी। इस नकद फसल की ओर तेजी से किसान प्रेरित हो रहे हैं।

औषधीय गुण के साथ रसोई में भी मांग

औषधीय गुण होने की वजह से रसोई में इसकी खासी मांग है। वैदिक काल से अदरक का उपयोग मसाले, औषधियां तथा सौंदर्य सामग्री के रूप में हमारे दैनिक जीवन में चला आ रहा। खुशबू के लिए आचार व चाय के साथ कई व्यजंनों में उपयोग किया जाता है। सर्दी, खांसी व जुकाम की दवा के लिए भी यह लाभकारी है। स्थानीय बाजार में भी अच्छी मांग होने से हाथों-हाथ थोक बिक्री हो जाती है।

छह माह में तैयार हो जाती है फसल

ग्राम जरमौहा निवासी कृषक रामभरोस का कहना है कि धान की तुलना में हमें अदरक की खेती से अच्छा लाभ मिल रहा। धान को तैयार होने में सात माह का समय लग जाता है। वहीं अदरक की फसल छह माह में ही तैयार हो जाती है। इसमें कटाई, मिसाई से लेकर उपार्जन केंद्र में बिक्री के लिए परिवहन का भी झंझट नहीं है। भुगतान के लिए इंतजार भी करना पडता। अदरक की खरीदी के लिए व्यवसायी बाड़ी तक पहुंचते हैं।

कीट रोग से मुक्ति दिलाने की विधि भी आसान

अदरक के साथ हल्दी, प्याज, लहसुन व मूंगफली की फसल भी लिया जा सकता है। फसल को रोग एवं कीटों से मुक्ति दलाने की विधि आसान है। कंद फसल की विविधता की वजह से अन्य फसलों की तुलना में इसमें किसानों को कीटनाशक दवा डालने की आवश्यकता नहीं होती। विशेष बात बात यह है कि धान की तुलना में 40 प्रतिशत कम पानी में अदरक में खेती हो जाती है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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