कोरबा । गोठान विहीन गांव की महिलाएं भी अब वर्मी कंपोस्ट खाद बना सकेंगी। इसके लिए जिला पंचायत के तत्वावधान में राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं समूह से जुड़ी महिलाओं को निश्शुल्क प्रक्षिण दे रहीं है। घर की बाड़ी में स्वयं कोटना (टैंक) बनाकर महिलाएं आसान विधि से कंपोस्ट खाद तैयार करेंगी। इसका उपयोग अपने खेतों के साथ सरकारी दर पर विक्रय भी कर सकेंगी।

जिले 412 में 173 ऐसे ग्राम पंचायत हैं जहां अभी तक गोठान की सुविधा नहीं है। ऐसे में यहां गोबर बिक्री की सुविधाा नहीं होने से महिलाओं को लाभ नहीं मिल रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए महिलाओं को खाद तैयार करने के लिए टैंक बनाने की जानकारी दी जा रही है। इसकी शुरूआत पोड़ी उपरोड़ा के दूरस्थ ग्राम पंचायतों से की गई है। ग्राम पंचायत चंद्रौटी की तुलसी महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को इसका दायित्व दिया गया है। समूह की अध्यक्ष बालकुंवर का कहना है कि टैंक बनाने की विधि बहुत ही आसना है, इसके लिए किसी राजमिस्त्री को बुलाने की जरूरत नहीं है। घरों के आसपास पड़े उपयोगहीन ईंट और मिट्टी के गारे से इसका निर्माण किया जा सकता है। दो फीट गहरे गड्ढे में चारों ओर झरोखेदार दीवार खड़ी की जाती हैं। घर के गोशाला से निकाले गए गोबर साधारण गड्ढे के बजाए टैंक में डालना उचित होगा। टैंक भरने के बाद उपर से मिट्टी ढंक कर छोड़ना होता है। वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार होने में दो से ढाई माह का समय लगता है। गड्ढे से खाद को निकाल कर खेत में डालने से उपज में लाभ होगा। आमतौर पर साधारण गड्ढे में डाले जाने वाले कचरे से साल में एक बार ही खाद निकाला जाता हैं। घर में बने टैंक से हर दो माह खाद तैयार किया जा सकता है।

नीम पत्तों के मिश्रण से फसल होंगे निरोग

वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की इस विधि में खास बात यह है कि इसमें गोबर और घर से निकलने वाले कचरों के साथ नीम व करंज के सूखे या गीले पत्तों को डालना आवश्यक है। महिलाओं का कहना है कि इस खाद के डालने से फसल निरोग रहेंगे। खाद बनाने की इस विधि में कांच और प्लास्टिक के सामानों को टैंक से दूर रखना है।

तीन पंचायतों में प्रशिक्षण पूरा

वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए अब तक तीन ग्राम पंचायतों की महिलाओं को घर-घर जाकर प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम सेमरा, गुरूद्वारी, पत्थरफोड़ शामिल हैं। महिलाओं का कहना कि घर टैंक का निर्माण होने से घर के बाहर बेकार पड़े गोबर भी अब उपयोग में लाए जा सकेंगे। घर में वर्मी कंपोस्ट तैयार होने से इसे धान के अलावा सब्जियों की खेती के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

लागत में कमी और पैदावार में बढ़त

गांव-गांव वर्मी कंपोस्ट खाद के बारे में जानकारी देने का उद्देश्य खेती की लागत में कमी और पैदावार में बढ़ोतरी करना है। समूह की महिला चंद्रकली का कहना है कि फसल उत्पादन के लिए अब तक रासायनिक खाद पर निर्भर थे। घर में कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए टैंक होन से खेतों को रासायनिक खाद से मुक्ति मिलेगी साथ ही खेतों की उर्वरा क्षमता बढ़ेगी।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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