कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मतांतरण और अन्य जाति में शादी करने वालों को जनजाति की सूची से अलग करने की मांग को लेकर जन जाति सुरक्षा मंच ने डिलिस्टिंग महासभा से पहले रैली निकालकर प्रदर्शन किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह मतांतरण नहीं राष्ट्रांतरण का षडयंत्र है। जो अपने पूर्वजों व धर्म का नहीं वह देश का कैसे हो सकता है।

सभा से पहले महर्षि बाल्मिकी आश्रम से रैली निकाली गई। यह कोसाबाड़ी, सुभाष चौक, घंटाघर से होते हुए आदिवासी शक्तिीठ पहुंची। देवालय में पूजा के पश्चात वापस ओपन थियेटर पहुंच कर सभा में परिवर्तित हो गई। यहां जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि राज्य का कोई भी गांव व शहर मतांतरण की समस्या से अछूता नहीं रहा। यह सब कौन कर रहा है, क्यों कर रहा है, यह जाने बिना लोग बहकावे में आ रहे हैं। भगत ने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वालों ने जिस दिन अपना धर्म छोड़ा उसी दिन उनकी आरक्षण समाप्त हो गई। आदिवासी महिलाओं से शादी कर उनके माध्यम से सत्ता का सुख भोगने वालों के खिलाफ यह आंदोलन है। अब हम अपनी संस्कृति से कुठाराघात करने वालों का अपमान नहीं सहेंगे। सरकार जब तक ऐसे लोगों का आरक्षण समाप्त नहीं करती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन को देख मिशनरी थर्राने लगे हैं। देश में जब अंग्रेज आए थे तब इसी तरह से देश के लोगों को प्रलोभन दिया और एक दिन हम पर ही राज करने लगे। भगवान राम ने जब लंका पर चढ़ाई की तो उनके साथ केवल वानर भालू ही नहीं बल्कि वनवासी कोल किरात भी थे। धर्म को स्थापित करने के लिए फिर से आदिवासियों को एक जुट होना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री व रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक ननकीराम कंवर ने कहा कि मिशनरी के नाम पर कुछ मुठ्ठी भर लोग हमें हमारी धर्म संस्कृति से अलग कर हम पर विदेशी संस्कृति थोपना चाहते हैं। जब तक समाज सजग नहीं होगा, तब तक उसे ठगने का काम चलता रहेगा। रैली महाभा में शामिल होने के लिए जिला भाजपा अध्यक्ष डा. राजीव सिंह, पूर्व महापौर जोगेश लांबा, भाजपा महामंत्री संतोष देवांगन, श्यामलाल मरावी, रघुराज सिंह, आरएसएस के कोरबा प्रमुख किशोर बुटोलिया, कैलाश नाहक, जुड़ावन सिंह ठाकुर, आदि शामिल थे।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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