कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा का इतिहास 119 साल पुराना है। उस समय यहां भगवान जगन्नाथ की फोटो देखकर नीम की लकडी की मूर्ति बनाई गई थी। जिसकी पूजा वर्षों तक चली। काफी समय तक यहां से निकलने वाली एकमात्र रथयात्रा में दूर-दूर से लोग आते थे। समय के साथ लोगों में बढती आस्था का परिणाम यह है कि अब एक नहीं अनेक स्थानों से उत्साह के साथ रथयात्रा निकलने लगी है। इस बार भी 4 जुलाई को रथयात्रा का माहौल दादरखुर्द के साथ कोरबा, बाल्को व गेवरा-दीपका में खास रहेगा। रथयात्रा की तैयारियां चल रही है।

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का इतिहास ग्राम दादरखुर्द से भले ही 119 साल से जुडा है पर वहां के लोग मूर्ति स्थापना के साथ पूजा अर्चना 124 साल पहले ही शुरू कर दिए थे। दादरखुर्द की पहचान भले ही सिमट गई हो, पर 124 साल पहले रथयात्रा के नाम से आसपास के जिलों में वहां की चर्चा व ख्याति बनी हुई थी। समय के साथ अब रथयात्रा को लेकर क्षेत्र विशेष व उत्कल समाज के लोगों की मौजूदगी से बढती गई और एक साथ कई स्थानों से रथयात्रा निकलने लगी है, जो इस साल 4 जुलाई को निकलेगी।

पुरी जाते—जाते गांव में बनवा दिया मंदिर, गांव वालों की मदद से निकाल रहे यात्रा

दादर्रखुर्द निवासी कृष्णा द्विवेदी ने बताया गांव के गौटिया सुकलाल राठिया से सुना है कि जगन्नाथ स्वामी का 124 साल पुराना इतिहास है। गांव के ही रामभरोस थवाइत व उनके छोटे भाई झाडूराम ने छोटे से मंदिर में मूर्ति स्थापित की थी। दोनों भाई अक्सर भगवान के दर्शन करने पुरी जाते थे। उनके मन में जिज्ञासा जागी व पुरी से जगन्नाथ स्वामी की एक फोटो लेकर गांव आए। उस फोटो को देखकर गांव में ही महानीम की लकडी को भगवान का आकार देकर मंदिर में स्थापित किए। पूजा का दौर लगभग दशकों तक चलता रहा। धीरे-धीरे गांव वालों की मदद से पुरी में निकलने वाली रथयात्रा के रूप में गांव में निकालने की परंपरा शुरू हो गई, जो आज तक जारी है।

गांव पर जगन्नाथ स्वामी की कृपा, ग्राम का हुआ विकास

भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी बताते है कि जब से गांव के लोग जगन्नाथ स्वामी की आस्था में जुटे हैं, तब से गांव का विकास हुआ है। प्रारंभ में गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बडी मुश्किल से लोगों के घरों में चूल्हे जलते थे। धीरे-धीरे गांव के लोगों की तरक्की हुई। उन्हीं की कृपा है कि आज पूरे गांव के लोग समृद्ध है। स्वामी की रथयात्रा में गांव का हर व्यक्ति सहयोग करने आगे रहता है।