कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। 57 साल की बुजुर्ग महिला दस साल से दाहिने घुटने के दर्द से पीडित थी। घुटना पूरी तरह से घिस गया था व जोड भी आपस में चिपक चुके थे। चार साल से चल-फिर पाने में असमर्थ वह अपने दर्द से राहत की आस लेकर सिद्धि विनायक हास्पिटल के डायरेक्टर व अस्थि रोग विशेषज्ञ डा शतदल नाथ के पास पहुंची। उन्होंने घुटने का प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। गहन अध्ययन व चिकित्सा कौशल का प्रयोग कर सफल आपरेशन किया गया। अब वह चल सकती है। अपने पैरों पर फिर से खडे हो पाने की खुशी उसके चेहरे पर देखी जा सकती है।

पिछले दिनों जशपुर की रहने वाली इस बजुर्ग का सफल आपरेशन कोसाबाडी स्थित सिद्धि विनायक हास्पिटल में किया गया। वह पिछले दस साल से अपने दाहिने घुटने के दर्द से परेशान थी। चार साल पहले उसका चलना-फिरना व उठना-बैठना भी बंद हो गया था। अस्पताल के डायरेक्टर व अस्थि रोग विशेषज्ञ डा शतदल नाथ ने मरीज का परीक्षण किया। एक्स-रे व अन्य जांच में मरीज के घुटने पूरी तरह से घिस जाने व जोड के चिपक जाने की पुष्टि हुई। परिजनों से चर्चा में पता चला कि बुजुर्ग के लिए नित्य कर्म के लिए भी काफी परेशानी होती है। मर्ज का गहन अध्ययन व जांच रिपोर्ट के आधार पर डा नाथ ने यह निष्कर्ष निकाला कि घुटना प्रत्यारोपण से वह ठीक हो सकेगी। डा नाथ व उनकी टीम ने इसके लिए विस्तृत कार्य योजना बनाई। इसके अनुरूप डा नाथ व उनकी टीम ने लगभग दो घंटे में मरीज का सफल आपरेशन किया। आपरेशन के बाद डा नाथ ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सिद्धि विनायक हास्पिटल में आकर इस प्रकार की जटिल सर्जरी से न सिर्फ कोरबा के लोगों, बल्कि बिलासपुर व सरगुजा संभाग के जिलों के मरीज भी लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को दिया है, जिनके अथक प्रयास के कारण ऐसे चुनौतिपूर्ण केस हल कर हास्पिटल इस मुकाम को हासिल कर सका।

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सर्जरी के 48 घंटे बाद वाकर के सहारे चली

घुटना प्रत्यारोपण के लिए तीन भाग में प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है। फिमोरल कंपोनेंट, टीबियल कंपोनेंट व पटेलर कंपोनेंट। इनके साथ घुटने के चारों ओर मांसपेशियों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है। इन सब बिंदुओं का ध्यान रखते हुए डा नाथ व उनकी टीम ने तैयार की गई योजना का अनुसरण करते हुए मरीज का घुटना प्रत्यरोपण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। मरीज ने आपरेशन के 48 घंटे बाद ही वाकर के सहारे चलना शुरू कर दिया। डा नाथ ने विश्वास जताया है कि मरीज अगले तीन सप्ताह में छडी के सहारे व छह सप्ताह में ही बिना वाकर या किसी अन्य के सहारे के स्वतंत्र रूप से चल सकेंगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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