कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जशपुर की जानलेवा घटना ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। गांजा तस्करों के बुलंद हौसलों का परिणाम ऐसा भी हो सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की रही होगी। पर सच्चाई यही है कि नशे का यह काला कारोबार बेलगाम होता दिख रहा। यहां यह बताना जरूरी है कि गांजा तस्करी के मुख्य कारिडोर में कोरबा भी शामिल है, जहां 250 किलोमीटर दूर ओडिशा के संबलपुर से खेप लेकर निकलने की कोशिश करते तस्करों को कई बार पकड़ा गया है। पर सरगना अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, जो दूर किसी ठिकाने में बैठे अपने कारोबार को बेखौफ संचालित कर रहा।

अगर आपने राह चलते किसी कैश वैन को देखा, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके अंदर बैग या पेटियों में रुपये भरे हों। हो सकता है कि वह कैश वैन पैसों की बजाय गांजे से भरी बोरियां छुपाई गई हों। इसी तरह सायरन बजाती कोई एंबुलेंस आपसे आगे निकलने का रास्ता मांगे, तो शायद मरीज को जल्द से अस्पताल ले जाने की बात सोचकर आप अपनी गाड़ी किनारे कर लें। पर यह भी संभव है कि उस एंबुलेंस में किसी मरीज की बजाय कोई तस्कर अपनी गांजे की खेप लेकर प्रदेश की सीमा पार करने और मध्यप्रदेश पहुंचाने की हड़बड़ी में हो। ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि जिले के मार्गों में ऐसा पहले हो चुका है। पहले पाली मार्ग में नुनेरा के पास एक रिहायशी क्षेत्र में कैश वैन तो पाली के पास ही एक एंबुलेंस लावारिस छोड़ दिया गया था। इन दोनों वाहनों में में भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया था। कोरबा की सड़कों से गांजा लेकर गौरेला-पेंड्रा होते मध्यप्रदेश के अनूपपुर जाते पकड़े गए मामलों की पूरी फेहरिस्त है। पाली मुख्य मार्ग के अलावा पसान, बाल्को, बेलगरी नाला पुल व कोरकोमा मार्ग में भी भारी मात्रा में गांजे से भरे वाहनों को पकड़ा जा चुका है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में पुलिस ने यह पता भी लगा लिया है कि नशे के इस कारोबार को कौन संचालित कर रहा और उनका सरगना कौन है, वह कहां का रहने वाला है। इतनी जानकारियों के बाद भी पुलिस की पहुंच अब तक उससे दूर है। समझना मुश्किल हो रहा कि इन तस्करों के लिए आखिर तीन राज्यों को पार कर गांजा की इतनी बड़ी मात्रा को यहां तक ला पाना कैसे मुमकिन हो पा रहा। खासकर प्रदेश के सीमा क्षेत्र में जांच और निगरानी व्यवस्था की पोल खुल रही।

जिस जिले में घुसे, वहीं की नंबर प्लेट, वाहन में गुप्त चैंबर

बताया जा रहा कि ओडिशा से गांजे की खेप लेकर निकले तस्कर अपने साथ वाहन में कई अलग-अलग नंबर प्लेट भी रखे होते हैं। जिस राज्य व जिले में वह वाहन प्रवेश करता है, वहीं की नंबर प्लेट लगा दी जाती है। इस तरह स्थानीय वाहन होना देख किसी को शक नहीं होता और पुलिस की आंखों में धूल झौंक दी जाती है। इतना ही नहीं, जिस तरह से कुछ साल पहले तक भीड़ में पाकिटमारी से बचने लोग अपनी पतलून में दर्जी से खास चोर पाकिट बनवाया करते थे, उसी तरह तस्करी में प्रयोग किए जाने वाले वाहनों को माडिफाइ कराकर गांजा छुपाने खास चैंबर बने होते हैं।

सरगना तो दूर वाहन मालिकों तक का सुराग नहीं

पूर्व में पकड़े गए आरोपितों से जानकारी मिली थी कि इस गिरोह का मुख्य सरगना जांजगीर-चांपा में जैजैपुर निवासी वरुण चंद्रा और मध्यप्रदेश के अनूपपुर अंतर्गत ग्राम भादा का दौलत केंवट है। वरूण चंद्रा बरगड़ से गांजा लाने का काम करता था। इसके बाद उसकी आपूर्ति इस क्षेत्र में की जाती थी। अनूपपुर में रहने वाला दौलत केंवट गांजा की डिलिवपरी लेता और वह क्षेत्र में खपाने का काम करता था। छह माह पहले जिला पुलिस ने फरार आरोपित वरूण चंद्रा व दौलत केंवट को पकड़ने विशेष टीम गठित कर जल्द गिरफ्तार करने की बात कही थी। पर ऐसा अब तक नहीं हो सका है।

तीन राज्यों की पुलिस को नाकाम साबित कर रहे

अब तक के पकड़े गए मामलों के दौरान जांच में यह बात स्पष्ट हुई कि जांजगीर-चांपा अंतर्गत नवागढ़ इस गिरोह का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से तीन राज्यों से गांजा का परिवहन होता था। पिछले कई साल से यह गिरोह इस मार्ग से गांजा की खेप खपाने का अवैध कारोबार कर रहा। इस तरह ओडिशा, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में गांजा लाने-ले जाने के कारोबार से जुड़े तस्करों का यह अंतरराज्यीय गिरोह तीन राज्यों की पुलिस को लगातार चकमा दे रहा। हाथ आए आरोपितों की धरपकड़ बड़ी मुस्तैदी से की गई, पर नेटवर्क को तोड़कर गिरोह खत्म करने में पुलिस नाकाम है।

कभी रूट बदलते हैं तो कभी छुपाने की तरकीब

तस्कर कभी कैश वैन, कभी एंबुलेंस तो कभी हरी-भरी सब्जियों के बीच गांजा छुपाकर परिवहन करते हैं। ओडिशा के संबंलपुर से गांजा उठाया जाता है, जिसे पहले जांजगीर-चांपा में डंप किया जाता है और उसके बाद छत्तीसगढ़ में कोरबा, गौरेला-पेंड्रा, मध्यप्रदेश के अनूपपुर व शहडोल में खपाया जाता है। जिले में कोरबी, मोरगा, जटगा और पसान होते हुए अनूपपुर व शहडोल तक इनके कारिडोर का रास्ता है, जिसमें कई बार तस्कर पकड़े गए हैं। इसके अलावा बताती-कोरकोमा, दीपका व बांकीमोंगरा में भी प्रकरण दर्ज किए गए। इस तरह स्पष्ट है कि वे कभी रूट तो कभी तरीके बदलकर वे यह कारोबार संचालित कर रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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