प्रदीप बरमैया, कोरबा । उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर लेने वाले 80 हजार हितग्राहियों ने आज तक रिफिलिंग ही नहीं कराई, बावजूद इनके खाते में राशि शासन की ओर से भेजी गई। इन हितग्राहियों को अब दो माह की राशि नहीं दी जाएगी। क्षेत्र में कोयला व लकड़ी आसानी से उपलब्ध होने के कारण हितग्राही रिफिलिंग नहीं करा रहे हैं।

जिले में उज्ज्वला योजना के तहत एक लाख 34 हजार हितग्राहियों ने गैस सिलेंडर लिया था। इन हितग्राहियों को शासन से राशि प्रदान की जाती है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन अवधि में लोगों के घर में चूल्हा जलता रहे, इसलिए अप्रैल माह में 833.50 रुपये सभी हितग्राहियों के खाते में डाले गए थे।

पूरा माह बीत गया, पर अभी तक सिर्फ 46 हजार हितग्राहियों ने ही सिलेंडर रिफिलिंग कराया। पिछले एक वर्ष से हो रहे रिफिलिंग पर नजर डाली जाए, तो इस दौरान लगभग 45 हजार लोग ही रिफिलिंग कराते रहे हैं और राशि मिलने के बाद केवल एक हजार अधिक हितग्राहियों ने ही रिफिलिंग कराई।

अभी तक यह आरोप लगाया जाता रहा है कि हितग्राहियों को सिलेंडर बुक कराने के लिए राशि नहीं दी जा रही है, पर अब राशि मिलने के बाद भी सिलेंडर नहीं ले रहे हैं। उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को डीएमएफ मद से सिलेंडर दिए गए थे। इस पर डीएमएफ के 17 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, पर इस राशि का लाभ नहीं मिला। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि उज्ज्वला गैस कनेक्शन देने के पीछे सरकार का उद्देश्य गृहणियों को रसोई धुंआ से निजात दिलाना था।

गैस सिलेंडर और किट दिए जाने के बाद भी शहर को कोयले के धुएं से मुक्त नहीं कराया जा सका है। शहरी क्षेत्र के झुग्गी बस्ती के लोग सिलेंडर की बिक्री कर देते हैं, उससे मिलने वाली राशि से राशन लेते हैं। दूसरी ओर जंगल में लकड़ी आसानी से मिलने और रिपिᆬलिंग सेंटर की दूरी अधिक होने से गांव की रसोई में अब लकड़ी ईंधन से भोजन पक रहा है।

घर पहुंच सुविधा नहीं

रसोई गैस की उक्त राशि से वितरण को घर पहुंच सेवा देनी है, लेकिन एजेंसी संचालक नियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लॉकडाउन के बाद भी सिलेंडर गोदाम में लोगों की भीड़ लग रही है। जिले में इंडेन, भारत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 18 एजेंसी है। इसके अलावा बाजार हॉट में भी सहायक एजेंसी संचालित करना है, ताकि दूरदराज के ग्रामीणों को सुविधा मिले। सुविधा नहीं दिए जाने के कारण गांव के लोग सिलेंडर सुविधा से वंचित हैं।

किस एजेंसी के हितग्राहियों को कितनी राशि

एजेंसी राशि

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 5.14 करोड़

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन 0.71 करोड़

हिंदुस्तान पेट्रोलियम 1.07 करोड़

-केवाईसी अपग्रेड नहीं होने से खाता बंद

बैंक में लेन-देन नहीं होने से कई हितग्राहियों का खाता ब्लॉक हो गया है। ऐसे हितग्राहियों के खाते में राशि जारी होने को लेकर संशय बनी हुई है। बैंक खाते में सरकारी राशि जारी हो सके, इसके लिए हितग्राहियों को ब्लॉक खाता खुलवाने केवाईसी की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। यही वजह है कि मुफ्त सिलेंडर के लिए अभी पूरे हितग्राहियों के खाते में राशि जारी नहीं की जा सकी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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