कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कक्षा आठवीं का एक छात्र त्रैमासिक परीक्षा से बचने के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ ली और स्कूल पहुंच कर प्राचार्य को सुना दी। चाकू के नोक पर अपहरण किए जाने की बात सुन प्राचार्य हैरान रह गए और उसके अभिभावकों को इसके अवगत कराया। पुलिस को इसकी सूचना दे दी गई। पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो उसकी पोल खुल गई।

ग्राम तिलकेजा में रहने वाला एक किसान का 15 वर्षीय पुत्र गांव के ही सरकारी मिडिल स्कूल में अध्ययनरत है। सोमवार को उसकी त्रैमासिक परीक्षा थी। वह इसमें शामिल नहीं होना चाहता था, क्योंकि वह इसकी तैयारी नहीं थी। अभिभावक के सामने घर से वह सुबह करीब 9.30 बजे परीक्षा देने निकल गया। 10 बजे से परीक्षा थी। दबाव में बच्चे ने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ ली। इसको सच साबित करने बकायदा उसने दो अंजान राहगीरों को रोका और लिफ्ट मांग कर जानबूझकर बाइक में बीच में बैठा, ताकि आसपास में देखने वालों को यह लगे कि अपहरणकर्ता उसे बीच में बैठा कर ले गए।

आगे जाकर वह बाइक से उतर गया और करीब 10.30 बजे स्कूल पहुंचा। प्राचार्य एलके श्रीवास उससे कुछ सवाल जवाब करते, इसके पहले ही अपहरण की अपनी कहानी सुनाने लगा। उसने बताया कि वह परीक्षा देने स्कूल आ रहा था। तब बाइक में सवार दो लोग उसके गले में चाकू अड़ा कर बैठे लिया और अपहरण कर अपने साथ ले जाने लगे। किसी तरह वह बच कर भाग निकलने में सफल रहा। उरगा पुलिस की टीम सूचना पर स्कूल पहुंची और बच्चे से घटनाक्रम की जानकारी ली। जितने बार भी उससे पूछा गया, वह हर बार बयान बदलता था। इससे पुलिस को संदेह हुआ और थोड़ी सख्ती दिखाई तो उनसे यह स्वीकार कर लिया कि परीक्षा में शामिल नहीं होने के लिए यह प्रपंच किया।

बाइक सवार थे अंजान, तीन किलोमीटर बाद उतरा

प्राचार्य श्रीवास ने बताया कि स्कूल खुले 75 दिन हो चुके है, पर छात्र केवल 12 दिन ही स्कूल आया है। यही वजह है कि उसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी है। जिन लोगों से उनसे लिफ्ट लिया, वो गांव के नहीं थे, इसलिए उन्हें पता नहीं चल सका कि स्कूल जाने के बहाने बैठा बच्चा उनके साथ कहीं और जा रहा है। करीब तीन किलोमीटर जाने के बाद वह बाइक से उतर गया।

Posted By: Abrak Akrosh

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