कोरबा। Korba News: शासकीय कालेजों में उपलब्ध सुविधाओं पर गौर करें तो लैब-लाइब्रेरी, भवन और मैदान समेत अधोसंरचनाओं में कहीं कोई कमी नहीं। पर अकादमिक स्टाफ की सबसे बड़ी जरूरत आज भी अधूरी है। कालेजों में शासन से मंजूर सेटअप के विपरीत शिक्षकीय संसाधन आज भी कोसों दूर हैं। शिक्षकों की पर्याप्त संख्या के अभाव में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे चल रही।

जिले में संचालित दस शासकीय उच्च शिक्षा संस्थाओं की बात करें तो किसी में भी स्वीकृत सेटअप के अनुसार टीचिंग स्टाफ नहीं है। सभी कालेजों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 190 है, जबकि पदस्थापना अब 100 से भी कम है। अतिथि प्राध्यापकों पर पाठ‌यक्रम का जिम्मा होने से दफ्तर की कागजी कार्रवाई व अतिरिक्त गतिविधियों की व्यस्तता के बहाने नियमित शिक्षक कक्षाएं लेने से बचते हैं। इसका असर छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक स्तर पर पड़ता है। अधिक से अधिक कक्षाएं अतिथि शिक्षक ही लेते हैं। यूं कहें कि कॉलेजों में छात्रों की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भरोसे हो रही है कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा। नियमित व अतिथि प्राध्यापकों के अध्यापन में अंतर को देखें तो दोनों के कक्षा लेने की प्रणाली काफी अलग होती है।

अतिथि प्राध्यापकों के क्लास लेने के तरीके से छात्रों को लाभ तो मिलता है, पर एक नियमित प्राध्यापकों के अनुभव का लाभ कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण व लाभकारी होता है, जो अपने छात्रों को असाइनमेंट देकर विषय विशेष की जानकारी देते हैं। विषयवार देखें तो पीजी कालेज में केमेस्ट्री के दो, प्राणी शास्त्र दो, वाणिज्य एक, मनोविज्ञान विषय के एक ही शिक्षक हैं। नवीन कालेज जटगा में सेटअप जारी हुआ, सात की नियुक्ति के लिए, पर तीन की ही पदस्थापना की गई और मात्र एक ने ज्वाइनिंग दी। यहां पढ़ाने के लिए कटघोरा कालेज से चार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।

पदस्थापना 101 की, रिक्त पड़े 89 पद

प्राध्यापक-सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पडे 89 पदों पर भर्ती नहीं होने से संबंधित कालेजों में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को किसी न किसी व्यवस्था के तहत प्रबंधन अध्यापन कराते हैं। कहीं जनभागीदारी तो कहीं स्ववित्तीय मद से काम चलाया जा रहा। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कालेजों को अलग शासन से हर वर्ष आदेश जारी होता है। संविदा के रूप में आठ से 10 माह के लिए नियुक्त होने वाले ये अतिथि शिक्षक संबंधित कालेजों में अपनी सेवाएं देते हैं और इस बीच संबंधित विषय के नियमित प्राध्यापक कक्षा से दूरी बना लेते हैं।

अधीक्षक और लैब तकनीशियन कर रहे बाबू का काम

शासकीय पीजी कालेज में बगैर हास्टल ही वहां के अधीक्षक की पदस्थापना तीन साल पहले ही हो चुकी है। प्रबंधन हास्टल शुरू होने तक अधीक्षक से लेखापाल का काम ले रहा है। इसी तरह मिनीमाता कालेज में भी व्यवस्था बनाई गई है। वहां पदस्थ लैब टेक्नीशियन की सेवाएं लेखापाल के रूप में ली जा रही है। यही स्थिति लगभग सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में देखी जा सकती है। जिले में चार बड़े कालेज हैं जहां छात्रों की संख्या 1500-2500 से भी अधिक है।

विद्यार्थी बढ़े पर सेवानिवृत्ति से घट गया स्टाफ

कालेजों में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया बीते चार साल से नहीं हुई है। इसके कारण विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंड का पालन वर्तमान में कोरबा ही नहीं प्रदेश के किसी भी कालेज में नहीं हो रहा। एक ओर छात्रों की संख्या बढ़ रही है तो दूसरी ओर प्रोफेसरों की घटती जा रही। चार साल पहले छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश भर के कालेजों के लिए केवल 65 प्रोफेसरों की भर्ती की थी। जिले में छह की ही पदस्थापना हुई थी।

Posted By: Himanshu Sharma

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