कोरबा, नईदुनिया न्यूज। विभिन्न त्योहारों एवं पर्वों पर मूर्तिकारों की ओर से निर्मित की जाने वाली मूर्तियों के निर्माण में अघुलनशील सामग्री एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है अर्थात्‌ मूर्ति निर्माण में ऐसी मिट्टी का उपयोग हो जो घुलनशील हो। इसके साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई भी निर्धारित की गई है, जिसका पालन किया जाना आवश्यक है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली के आदेश में मूूर्तिकार की ओर से त्योहारों के अवसरों पर निर्मित की जाने वाली मूर्तियों की ऊंचाई के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यूनल के दिए गए आदेश के अनुसार जिन स्थानों में मूर्तियों का विसर्जन तालाब, नदी आदि में किया जाता है, उन स्थानों में निर्मित व स्थापित की जाने वाली मूर्तियों की ऊंचाई पांच फीट से अधिक न हो।

पर्यावरण संरक्षण एवं जल प्रदूषण रोकने की दिशा में मूर्तियों की ऊंचाई निर्धारण के साथ-साथ मूर्ति निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी, सामग्री एवं रंगों के प्रयोग के संबंध में भी आवश्यक दिशा निर्देश है। इनका पालन आवश्यक है। मूर्तियों के निर्माण में ऐसी मिट्टी का उपयोग होना चाहिए जो पानी में घुुलनशील हो, ऐसे रंग उपयोग में लाए जाने चाहिए जो इको फ्रेंडली हो तथा जिनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

साथ ही मूर्ति निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा अन्य अघुलनशील सामग्रियों के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। मूर्ति निर्माण में सिंथेटिक केमिकल, पेंट्सए डाई आदि का उपयोग भी प्रतिबंधित है। नगर पालिक निगम ने मूर्तिकारों से कहा है कि निर्देशों का पालन न किए जाने की स्थिति में संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विसर्जन भी होगा गाइड लाइन के अनुरूप

आयुक्त राहुल देव ने नगर की विभिन्न पूजा समितियों से कहा है कि मूर्तियों का विसर्जन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से जारी गाइड लाइन के अनुरूप ही करें। मूर्ति विसर्जन के पूर्व पूजा सामग्री फूल, वस्त्र, कागज एवं प्लास्टिक से बनी सजावट की वस्तुओं को अलग करके रखें तथा इन सामग्रियों को पानी में न डालें, ताकि जल स्त्रोतों का पानी दूषित न हों। उन्होंने कहा है कि मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित स्थानों पर ही करें, ताकि विसर्जन के दौरान एकत्रित सामग्री का समुचित निष्पादन सुनिश्चित हो सके।

पूजा पंडाल को रखना होगा स्वच्छ

आयुक्त ने निगम क्षेत्र की समस्त पूजा पंडाल समितियों से कहा है कि स्थापित किए गए पूजा पंडाल के आसपास स्वच्छता व साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें तथा पूजा पंडालों के पास डस्टबिन रखवाएं। प्रसाद वितरण एवं भंडारा आदि के पश्चात संग्रहित होने वाले अपशिष्ट को डस्टबिन में संग्रहित करके रखें। डस्टबिनों के पास संकेतक लगाएं, ताकि श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण के पश्चात अपशिष्ट को डस्टबिन में ही डालें। उन्होंने कहा है कि प्रतिबंधित पॉलीथिन डिस्पोजल आदि का उपयोग न करें तथा इनके स्थान पर वैकल्पिक साधनों को अपनाएं।

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