कोरबा । जब कभी जंगल में हाथियों की चिंघाड़ गूंजती, गांव के लोग घरों में दुबक जाते। पर एक युवा ऐसा भी था, जिसे हाथियों के डर से ज्यादा अपने गांव के लोगों की जिंदगी प्यारी थी। यही वजह है जो वह दिन-रात की परवाह किए बगैर अपनी जान दांव पर लगाने तत्पर रहता और घर का सुकून छोड़कर कर वक्त-बे-वक्त लोगों की मदद के लिए निकल पड़ता। दहशत में जिंदगी गुजारने मजबूर ग्रामीणों की हिम्मत बढ़ाने वाला वह साहसी युवक अब नहीं आएगा। एक बार फिर डरे हुए लोगों की फिक्र में वह अंतिम बार अपने घर से निकला, पर इस बार जिंदगी हार गई और हाथी का आतंक जीत गया।

हम बात कर रहे हैं कोरबी सर्किल के ग्राम खरपरीपारा के हिम्मती हाथी मित्र नाथूराम साहू (28) की। सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात उसे एक बिगड़ैल हाथी ने अपने पैरों तले कुचलकर मार डाला। उस रात भी वह अपने घर पर परिवार के साथ कुछ अच्छी पर अंतिम घड़ियां गुजार रहा था, जब हाथी के गांव में घुस आने की खबर उसे मिली।

देर रात करीब 11.30 बजे हाथी के गांव में आबादी के बीच मंडराने की बात सुनकर उसे ग्रामीणों को बचाने की अपनी शपथ याद आई। घर में छुपकर बैठ जाने की बजाय अपने आप को लोगों की मदद के लिए समर्पित करने का संकल्प ले चुके नाथूराम बाहर निकल कर डर का सामना करने निकल पड़ा।

इससे पहले कि वह लोगों को सतर्क कर पाता, उसका सामना रात के घुप अंधेरे में खड़े उस हाथी से हो गया, जो पहले ही कई लोगों को अपने कोप का शिकार बना चुका है। अंधेरे का फायदा उसे मिला और छुपकर खड़े दंतैल ने अचानक की उसकी ओर दौड़ लगा दी।

इससे पहले की नाथूराम संभल पाता, दंतैल ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया और पैरों तले रौंदकर मौत के हवाले कर दिया। दूसरों की जान बचाते-बचाते नाथूराम अंतिम वक्त दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया और मौके पर ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए।

-वन विभाग ने एक अदद टॉर्च भी नहीं दिया

वन विभाग के आला अधिकारी ग्रामीणों की 24 घंटे सातों दिन सुरक्षा का दावा करते हुए मैदान में डटे रहने का दावा करते नहीं थकते। वे लगातार ग्रामीण युवाओं की मदद करने प्रेरित करते हैं। उन्हें विभाग की जिम्मेदारी उठाने हाथी मित्र के रूप में मुफ्त की मदद तो चाहिए, पर टॉर्च व जैकेट जैसी अहम सुविधा भी देने से ऐतराज है। मृतक नाथूराम जब घर से निकला, तो उसके पास ऐसा कोई संसाधन मौजूद नहीं था, जो अंधेरे में मौत बनकर इंतजार कर रहे दंतैल को वक्त रहते देख पाता। अभी वह दर्रीपारा के पास ही पहुंचा था, कि पत्तियों की ओट में छिपा दंतैल उसकी ओर झपट पड़ा। अगर उसके पास भी एक बड़ा टॉर्च होता, तो शायद वक्त रहते उसकी नजर दंतैल पर पड़ जाती और उसकी जान बच जाती।

-सीसीएफ ने ठोंकी थी पीठ, दो छोटे बच्चे

खुद की जान खतरे में डालकर हाथियों से ग्रामीणों की जान बचाने में लगे नाथू की मौत ऐसे हो जाएगी, किसी ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी। पिछले माह वन अमले के साथ फूलसर दौरे पर रहे सीसीएफ वाइल्ड लाइफ बिलासपुर अनिल सोनी ने भी नाथूराम के समर्पण की सराहना करते हुए पीठ थपथपाई थी। तरीफ तो खूब मिली, पर जरूरी संसाधनों की मांग दरकिनार कर दी गई। नाथूराम की चार साल पहले ही शादी हुई थी और उसके दो छोटे बच्चे भी हैं। इस घटना के बारे में जिसने भी सुना, एक पल के लिए विश्वास न कर सका। नाथूराम की असमय मौत से क्षेत्र में शोक की लहर है और खासकर खरपरीपारा के लोगों में सदमा है कि 24 घंटे तैयार रहने वाला हिम्मतवर मददगार नाथू अब नहीं रहा।

-कलेक्टर के निर्देश का इंतजार करते बैठे अफसर

उल्लेखनीय है कि दूसरे चरण के मतदान के दिन कलेक्टर किरण कौशल ने हाथी प्रभावित पोड़ी-उपरोड़ा के संवेदनशील गांवों का दौरा किया था। वन विभाग के अफसरों को बोलते-बालते थककर नाउम्मीद हो चले ग्रामीणों ने इस मौके पर कलेक्टर से ही बड़े टॉर्च की सुविधा देने की गुजारिश की थी। इस पर कलेक्टर ने भी उनकी जरूरत को समझते हुए हर गांव में 25 टॉर्च व 25 जैकेट अविलंब प्रदान करने के निर्देश वन विभाग के अफसरों को दिए थे। सवाल ये उठता है कि स्थित से भली-भांति परिचित होकर भी आखिर वन विभाग के आला अधिकारी कलेक्टर के निर्देश का इंतजार क्यों करते रहे? अगर टॉर्च व जैकेट की खर्च बचाने में ही उनकी रुचि है तो फिर इस तरह बचाव के ढोल पीटने की क्या जरूरत?

-हिंसक दंतैल ने सात दिन में तीसरे को मारा

जिस दंतैल ने हाथी मित्र नाथराम साहू को कुचलकर मार डाला, उसने सप्ताह भर के भीतर तीन लोगों की जान ले ली है। दूसरे चरण की मतदान तिथि से पहले उसने रात को दो लोगों पर हमला किया था, जिसमें एक बुजुर्ग की मौत मौके पर हो गई, जबकि महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। केंदई, ऐतमानगर व जडगा वनपरिक्षेत्र में पिछले एक अरसे से हाथियों का दल विचरण कर रहा है।

इनमें एक दंतैल के मदमस्त होने के कारण झुंड से अलग हो गया है, जो बौराए यहां-वहां भटक रहा है। हमलावर हो जाने के कारण यह दंतैल उत्पाती हाथी गणेश की तरह व्यवहार कर रहा है और शाम होते ही आबादी की ओर चला आता है। आम ग्रामीणों के साथ उसे खदेड़ने जुटी टीम की ओर भी दौड़ाकर हमला करने की कोशिश में रहता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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