कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कुसमुंडा खदान में नियोजित नारायणी ठेका कंपनी के मजदूरों ने काम बंद कर हड़ताल कर दी। इससे खदान में मिट्टी निकालने का काम बंद हो गया है। मजदूरों का कहना है कि दीपावली पर्व नजदीक पहुंच चुका है और अभी बोनस का वितरण नहीं किया गया है। जल्द निर्णय नहीं लिए जाने अनिश्चतकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मेगा परियोजना कुसमुंडा में नारायणी ठेका कंपनी को मिट्टी निकालने (ओबी) का काम सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि कंपनी का काम खत्म हो चुका था, पर उसके कार्य की समयावधि का विस्तार किया गया है। कंपनी के अधीन भारी वाहन में चालक, परिचालक समेत अन्य कार्य के लिए काफी संख्या में कर्मी कार्यरत हैं। इन कर्मियों प्रत्येक वर्ष विरोध जताने के बाद दीपावली पर बोनस प्रदान किया जाता था, पर इस बार कंपनी ने बोनस देने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। सोमवार को दीपावली का पर्व है। राशि का भुगतान न होने पर रविवार को चालक- परिचालक समेत अन्य सभी कर्मियों ने काम बंद हड़ताल कर दी। सभी भारी वाहनों को प्रथम पाली में ही खड़ा कर दिया गया। इन कर्मियों का कहना है कि सभी निजी कंपनियों में दीपावली का बोनस प्रदान कर दिया गया है। गेवरा व दीपका खदान में नियोजित केजे सिंह ठेका कंपनी ने भी अपने कर्मियों को भुगतान कर दिया, पर नारायणी कंपनी ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। यहां तीन साल से बोनस देने में टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है और जब तक विरोध नहीं किया जाता है, तब तक राशि प्रदान नहीं की जाती है।

इस बार भी कंपनी ने यही रास्ता अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों को बोनस का प्रावधान है , जो उन्हें मिलना चाहिए अन्यथा अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। बताया जाता है कि कंपनी ने बोनस प्रदान करने का आश्वासन दिया है, पर राशि कब तक प्रदान की जाएगी। इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। कर्मियों के काम बंद करने से मिट्टी उत्खनन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है, यदि जल्द ही निर्णय नहीं लिया जाता है तो भविष्य में कोयला उत्पादन भी प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

यहां बताना होगा कि एसईसीएल में कार्यरत नियमित कर्मियों को 76500 रुपये बोनस प्रदान किया गया, इस दौरान श्रमिक संघ प्रतिनिधियों ने ठेका मजदूरो को भी बोनस प्रदान करने की मांग प्रबंधन के समक्ष रखी थी। तब प्रबंधन ने आश्वस्त भी किया था, पर इस अमल नहीं किए जाने पर प्रबंधन ने भी चुप्पी साध ली है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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