कोरबा । कोल इंडिया से संबद्ध साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने कोयले की बढ़ती मांग के बीच भूमिगत सुराकछार खदान का एक फेज सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया है। इससे उत्पादन में आई कमी का असर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब जैसे राज्यों के पावर प्लांटों में होने वाली आपूर्ति पर पड़ेगा। वहीं एसईसीएल ने आने वाले दिनों में बलगी खदान को भी बंद करने का निर्णय ले लिया गया है, जिससे उत्पादन पर और ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

एसईसीएल कोरबा क्षेत्र अंतर्गत संचालित भूमिगत सुराकछार खदान वर्ष 1963 में रशियन पद्धति से शुरू हुई, तब कोल इंडिया का राष्ट्रीयकरण नहीं हुआ था। अभी भी खदान में 200 लाख टन कोयला का भंडार है, पर पुरानी पद्धति होने की वजह से खदान लगातार घाटे में चल रही है। वर्ष 2021-22 में कोरबा क्षेत्र की भूमिगत खदानों से 250 करोड़ का नुकसान कंपनी को हुआ था। वर्ष 2022-23 में भी इतना ही घाटा होने का अनुमान है। सुराकछार खदान भी घाटेे वाले खदानों में शामिल है। इसलिए प्रबंधन ने सुराकछार की मेन माइंस को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा के साथ ही भूमिगत खदान बंद करने का एक बड़ा कारण घाटा भी है। अधिक गहराई होने पर ज्यादा संसाधनों की खपत के बाद भी उत्पादन नाकाफी होता है। बंद किए जा रहे फेज से प्रतिदिन 200 टन कोयला का उत्पादन हो रहा था और पूरी खदान का उत्पादन 400 टन प्रतिदिन है जबकि यहां 500 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। सुराकछार सबएरिया अंतर्गत संचालित खदानों में अभी मुख्य खदान व खदान नंबर 3-4 चल रहा। 1-2 नंबर व 5-6 नंबर खदान बंद हैं। वहीं 3-4 नंबर खदान में भी डिप्लेयरिंग (पिल्लर गिराने) का काम चल रहा है। इसके साथ ही इस खदान की भी उल्टी गिनती चल रही है।

प्रबंधन पहले डीजीएमएस से कराएं जांच

इस बीच श्रमिक संगठनों ने खदान बंद करने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं। साउथ इस्टर्न कोयला मजदूर कांग्रेस (एसईकेएमसी) के अध्यक्ष गणेश दास का कहना है कि एसईसीएल ने एक ओर अगले पांच साल का रोड मैप तैयार कर भूमिगत खदानों से होने वाले 130 लाख टन कोयला उत्पादन को बढ़ा कर 300 लाख टन का लक्ष्य निर्धारित किया है। दूसरी ओर पिछले 15 साल के अंदर बंद खदानों को निजी कंपनियों को पुन: प्रारंभ किए जाने की योजना पर काम किया जा रहा। ऐसे में खान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) की रिपोर्ट के बिना खदान बंद किया जाना समझ से परे है।

अभी भी निकल सकता है आठ साल तक कोयला

सुराकछार खदान में अभी आने वाले आठ साल तक कोयला निकलेगा। जानकारों का दावा है कि अभी तीन वर्ष तक बिना किसी बाधा कोयला निकाला जा सकता है। इसके बाद लगभग 1.50 मीटर मोटी पत्थर की परत (डिप) है, उसे हटाने के बाद पांच साल तक कोयले का उत्पादन किया जा सकेगा। इस खदान के बंद होने से यहां कार्यरत इन कर्मियों को अन्यत्र तबादला किया जाएगा। दरअसल अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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