कोरबा। Korba News : रोजगार, मुआवजा, बसाहट, कोयला परिवहन में 20 फीसदी आरक्षण समेत पुनर्वास ग्रामों की बुनियादी समस्याओं पर गेवरा, दीपका, कुसमुंडा व कोरबा एरिया प्रबंधन से चर्चा उपरांत सहमति बन गई और खदान बंद कराने का निर्णय स्थगित कर दिया, पर दीपका से बैठक का सहमति पत्र मिलने पर विलंब होने पर भू-विस्थापितों ने कार्यालय का घेराव कर दिया। सहमति पत्र मिलने के चार घंटे बाद कार्यालय के गेट से हटे। प्रबंधन को एक माह का वक्त देते हुए कहा है कि इस दौरान समस्या का निदान नहीं हुआ तो खदान बंद कराया जाएगा।

भू-विस्थापितों के आंदोलन को टालने के लिए साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) प्रबंधन ने भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के पदाधिकारियों से शुक्रवार की देर रात तक चर्चा की। इस दौरान सभी मांगो पर सहमति बन गई। प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय स्तर की समस्याओं का निराकरण जल्द किया जाएगा, शेष बिंदुओं पर मुख्यालय निर्णय लेगा। सहमति बनने के बाद गेवरा, कुसमुंडा व कोरबा एरिया प्रबंधन ने बैठक में हुई चर्चा व सहमति पर मिनट्स जारी कर भू-विस्थापितों को उपलब्ध करा दिया।

शनिवार को ग्राम रलिया में समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ बैठक की और प्रबंधन के साथ हुई वार्ता की जानकारी देते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। इस बीच दीपका प्रबंधन से सहमति पत्र नहीं मिलने पर विलंब होने घेराव करने का निर्णय लेते हुए काफी संख्या में ग्रामीण महाप्रबंधक व प्रोजेक्ट कार्यालय पहुंच कर घेराव कर दिए। प्रबंधन के सहमति पत्र उपलब्ध कराए जाने के बाद शाम पांच बजे आंदोलन स्थल से वापस लौटे।

कोई भी नहीं जा सका अंदर

महाप्रबंधक व प्रोजेक्ट कार्यालय के गेट में घेराव करने की वजह से कोई भी न तो अंदर जा सका और नहीं बाहर निकल सका। कर्मियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिन भर कर्मी कार्यालय के अंदर ही फंसे रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि एक माह के भीतर समस्या का निदान नहीं किया जाता है तो पुनः आंदोलन कर घेराव किया जाएगा। शाम को गेट खुलने पर कर्मियों ने राहत की सांस ली।

भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के सचिव ब्रजेश श्रीवास ने बताया कि एसईसीएल प्रबंधन के साथ वार्ता होने पर कोयला उत्पादन बंद करने का निर्णय स्थगित कर दिया गया, पर दीपका प्रबंधन ने समझौता वार्ता का मिनट्स देने में विलंब किया तो महाप्रबंधक व प्रोजेक्ट कार्यालय का घेराव किया गया। चार घंटे तक गेट बंद रखा गया। इससे कोई भी कर्मी अंदर नहीं जा सका। प्रबंधन को एक माह का वक्त दिया गया है। इस दौरान स्थानीय स्तर की मांग पूरी नहीं की जाती है तो अनिश्चितकाल के लिए खदान बंद कराई जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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