कोरबा।World Cancer Day 2021: शिक्षक लक्ष्मी उन सशक्त महिलाओं में एक हैं जिन्होंने अपनी दृढ़ता और आत्मबल से न केवल रक्त कैंसर जैसे भयावह रोग को परास्त किया बल्कि अपने कर्तव्य पथ पर पूरी निष्ठा के साथ वापसी की। यह जानलेवा बीमारी भी उन्हें उनके दायित्वों को पूरा करने से ज्यादा दिनों तक रोक न सकी। कैंसर से उनकी जंग तब शुरू हुई, जब वह तीसरे स्टेज में पहुंच चुकी थीं।

पर उनके साथ पति, परिवार और दो छोटे बच्चों का प्यार था, जिसकी ताकत के सहारे उन्होंने रगों में घूमते रोग को शिकस्त देकर जिंदगी की यह लड़ाई जीत ली। लक्ष्मी तिवारी कटघोरा विकासखंड के प्राथमिक शाला जूनाडीह की सहायक शिक्षिका (एलबी) के पद पर कार्यरत हैं। सितंबर 2013 में तबीयत खराब होना शुरू हुआ।

उन्हें बार-बार बुखार आना, कमजोरी महसूस होना, जैसी शिकायतें आई। कोरबा में जांच कराई तो पहले उन्हें टीबी बताकर दवाइयां शुरू की गई। राहत न मिली तो रायपुर जाकर जांच कराई। वहां भी उन्हें टीबी ही बताया गया। साथ में एक चिकित्सक ने बड़े अस्पताल में कुछ और टेस्ट कराने की सलाह दी।

इस बार की टेस्ट रिपोर्ट में परिस्थितियां बदल चुकी थीं। अक्टूबर 2013 में डायग्नोस हुई और उन्हें रक्त कैंसर (एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया) होने की पुष्टि की गई। इसके बाद सही दिशा में इलाज शुरू हुआ और मार्च 2014 में वह ठीक हुईं। आज वह बिल्कुल स्वस्थ हैं।

वे सरल मुस्कान से सदैव बच्चों को उत्साहित करती रहती हैं। अपनी क्षमता बोध से शैक्षिक विकास के दायित्व निभा रहीं हैं। लक्ष्मी ने कहा कि मुझे मेरे पति सुशील तिवारी का भरपूर प्यार व सहयोग मिला, जिससे इस बीमारी से लड़ने की हिम्मत मिली। मुझे कभी नहीं लगा कि मेरे बाल चले गए, शरीर कमजोर हो गया, क्योंकि हर कदम पर मेरे पति मेरे साथ रहे। उन्हीं की हिम्मत ने मुझे कैंसर से लड़ने की ताकत दी और मैंने जिंदगी जीत ली।

डाक्टर बोले अब छह माह की सांसें शेष, सातवें माह लौट आई काम पर

कोरबा-रायपुर से महानगर मुंबई तक के बड़े अस्पताल व डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इलाज में खर्च की बजाय उन्हें नियती को मान लेने की बात कही गई। डाक्टरों ने कहा- उनके पास ज्यादा से ज्यादा छह माह की सांसें शेष है, पर लक्ष्मी सातवें माह में ही कैंसर को पंगु साबित कर दिया।

अक्टूबर से मार्च तक मेडिकल व अवैतनिक अवकाश पर रहीं और फिर काम पर वापसी कर अपनी जिम्मेदारियां निभाने पूरे उत्साह से जुट गईं। जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय के मार्गदर्शन, संकुल के नोडल प्रधानपाठक सर्वेश सोनी व शैक्षिक समन्वयक अनिल कौशिक के सहयोग से लक्ष्मी अपने विद्यार्थियों को सतत नवाचार आधारित शिक्षा दे रहीं हैं।

अपनी आवाज देकर पूरी की भीकू भाई की कहानी

कोरोनाकाल की चुनौतियों से जूझते हुए भी शिक्षिका लक्ष्‌मी सतत नवाचार कर स्कूल के बच्चों के लिए पूरी निष्ठा से शिक्षा के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करतीं रहीं। लक्ष्मी न केवल आनलाइन अध्यापन व आफलाइन मोहल्ला क्लास मे अपनी पूरी क्षमता के साथ डटी रहीं, बल्कि सतत टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) निर्माण कर उसका सदुपयोग बच्चों के लिए किया।

परिणाम यह रहा कि संपर्क फाउंडेशन के आप होते तो क्या करते कार्यक्रम में भीकू भाई की कहानी के पोडोकस्ट में अपनी आवाज देकर उसे पूरा किया। उन्होंने इस कार्यक्रम में प्रस्तुति के लिए चयनित होकर अपनी शैक्षिक योग्यता व कार्यक्षमता का परिचय दिया।

अपने अनुभवों से दूसरों में भर रहीं हौसला

चार महीन अस्पताल के बिस्तर पर गुजारा, 100 से ज्यादा बार कीमोथेरेपी की दर्दभरी प्रक्रिया से गुजरकर भी लक्ष्मी ने खुद को मजबूत रखा। अपनी व अपने परिवार की उन कठिन परिस्थितियों को यूं ही भुला देने की बजाय उन्होंने उन अनुभवों को दूसरों में हौसला भरने का हथियार बना लिया।

अध्यापन कार्य के बाद समय निकालकर अब वे लोगों से मिलती हैं और कैंसर से जूझने वालों को सही दिशा में आगे बढ़कर इस बीमारी पर जीत हासिल करने प्रेरित व प्रोत्साहित भी करती हैं। इस मुहिम में हर क्षण साथ निभाने वाले उनके पति सुशील तिवारी भी मदद करते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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