कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले की एकमात्र तकनीक शिक्षण संस्था आइटी कालेज (इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी) कब ताले में बंद हो जाए, यह कहा नहीं जा सकता। यह हुआ, तो एक बार फिर युवाओं को इंजीनियरिंग पढ़ने कम से कम 100 किलोमीटर दूर बिलासपुर या 200 से ढाई सौ किलोमीटर दूर रायपुर-दुर्ग की दौड़ लगानी होगी। ऐसी नौबत न आए, इसके लिए स्वशासी के रूप में संचालित आइटी कालेज का शासकीयकरण करने जरूरत है। आइटी को सरकारी का दर्जा दिलाने विधानसभा अध्यक्ष डा चरणदास महंत से लेकर सांसद व दो विधायक भी पत्र लिख मुख्यमंत्री से मांग कर चुके हैं। पर इसकी फाइल पिछले छह माह से मंत्रालय के दफ्तरों में यहां से वहां घूम रही।

छत्तीसगढ़ को नए राज्य का दर्जा मिलने के बाद से एक भी नया शासकीय इंजीनियरिंग कालेज प्रदेश में नहीं खुला है। इस बीच अनेक शासकीय उच्च शिक्षण संस्थाएं शुरू की गईं, पर 15 साल के भाजपा शासन में एक भी तकनीकी शिक्षण संस्था देने पर ध्यान नहीं दिया गया। इस बीच प्रदेश में एक के बाद एक धड़ाधड़ इंजीनयरिंग कालेज खुलते गए, जिससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ दोनों स्व शासी इंजीनियरिंग कालेजों की दशा खराब होती गई। परिणाम स्वरूप वर्तमान में तकनीक संस्थाओं पर अस्तित्व का संकट उठ खड़ा हुआ है। अगर आइटी कालेज का अस्तित्व बचाना है, जो उसका शासकीयकरण ही एकमात्र विकल्प शेष रह गया है। स्वशासी से शासकीय होने का तमगा लगते ही इंजीनियरिंग में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों का एडमिशन व संस्था की दशा सुधर जाएगी। आइटी कालेज में सर्वसुविधायुक्त भवन, हास्टल, परिसर, प्रयोगशाला संयंत्र पर्याप्त हैं, पर वर्तमान में आइटी कालेज में स्टाफ कम है। शासकीयकरण का दर्जा मिलने पूरी सुविधाएं आ जाएंगी। स्थानांतरण प्रक्रिया से स्टाफ की कमी दूर हो जाएगी। एडमिशन शत-प्रतिशत हो जाएगा। आइटी कालेज को शासकीय इंजीनियरिंग कालेज का दर्जा देने की मांग करते हुए अब तक विधानसभा अध्यक्ष डा चरणदास महंत, सांसद ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर, पूर्व गृहमंत्री एवं रामपुर विधायक ननकीराम कंवर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिख चुके हैं।

53 साल से एक भी शासकीय कालेज नहीं खुला

सबसे पहले रायपुर में वर्ष 1956 में पहला शासकीय इंजीनियरिंग कालेज खुला। इसके बाद वर्ष 1964 में बिलासपुर और वर्ष 1968 में खुले जगदलपुर समेत प्रदेश में मात्र तीन शासकीय इंजीनियरिंग कालेज संचालित हैं। इसके बाद से प्रदेश में कोई भी नया इंजीनियरिंग कालेज नहीं खुला है। जिसकी कुल क्षमता एक हजार से अधिक नहीं है, जिसके कारण हर साल एडमिशन के समय इन संस्थाओं में विद्यार्थियों के बीच अत्यधिक होड़ की स्थिति देखने को मिलती है। इसके बाद स्व शासी संस्था के रूप में वर्ष 2008 में आइटी कोरबा व 2001 में केआइटी रायगढ़ को शुरू किया गया, जिनकी स्थिति डांवाडोल है।

प्रदेश में तीन शासकीय, एक हजार सीट भी नहीं

प्रदेश में सिर्फ तीन शासकीय इंजीनियरिंग कालेज हैं, जहां कुल एक हजार सीट भी नहीं। इससे हर साल हजारों युवा निजी कालेज में महंगी फीस देकर दाखिले को विवश होते हैं। आदिवासी जिला में आइटी कालेज को शासकीय तकनीकी संस्था का दर्जा मिलने से न केवल कोरबा, बल्कि पड़ोसी जिला जांजगीर-चांपा, अंबिकापुर, सरगुजा संभाग के जिले, जशपुर व पत्थलगांव जैसे क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जो बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग-भिलाई की दौड़ लगाने विवश हैं। यह सभी जिले कोरबा से कवर होते हैं, जहां दशकों से शासकीय इंजीनियरिंग कालेज की प्रतीक्षा है। इनके लिए कोरबा आइटी वरदान साबित होगा।

विस अध्यक्ष डा महंत ने सीएम को यह लिखा

आइटी कालेज में अध्ययन कर अब तक दस हजार छात्र-छात्राएं इंजीनियरिंग की डिग्री ले चुके हैं, जिनमें 80 प्रतिशत विद्यार्थी विभिन्ना संस्थाओं में कार्यरत हैं और कुछ स्वरोजगार स्थापित कर देश की आर्थिक व सामाजिक उन्नाति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह संस्था स्थापना वर्ष से ही जरूरत अनुरूप स्टाफ एवं संसाधनों की कमी से जूझ रहा। नियमित प्राचार्य, उच्च स्तरीय विषय विशेषज्ञ की पदस्थापना नहीं होने से मौजूदा स्टाफ पर अत्यधिक कार्यभार है। आदिवासी अंचल के साथ निकटस्थ जिले के युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आइटी कालेज को शासकीयकृत करने आवश्यक कार्रवाई करें।

पहले सीट की होड़ पर बीते वर्ष दस एडमिशन

वर्ष 2008 में शुरू हुए 13 साल पुराना आइटी कालेज पालिटेक्निक भवन में पांच साल चला, तब यहां 240 सीट थी और एडमिशन को लेकर मारा-मारी की स्थिति थी। कंप्यूटर साइंस, सिविल, मैकेनिकल व ईईई में 60-60 सीटें थीं, जो एडमिशन कम होने से कंप्यूटर की 60 सीट घटा कर 30 कर दी गईं हैं। वर्तमान में यहां के तीन ब्रांच में 60-60 एक ब्रांच में 30 मिलाकर कुल अब 210 सीटें उपलब्ध हैं। वर्तमान में कालेज के सभी ब्रांच मिलाकर चारों वर्ष में मात्र 116 छात्र-छात्राएं ही अध्ययनरत हैं। मेडिकल कालेज का बोर्ड लग जाने से प्रवेश प्रक्रिया पर काफी असर हुआ और बीते सत्र 2020-21 में यहां मात्र दस एडमिशन ही हुए।

उप सचिव सीएम ने प्रमुख सचिव तकनीकी से कहा

विधानसभा अध्यक्ष डा महंत व सांसद ज्योत्सना के पत्र को आधार रखते हुए मुख्य मंत्री सचिवालय से उप सचिव ने तीन फरवरी को मंत्रालय तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को एक पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी कोरबा के शासकीयकरण के लिए प्राप्त पत्र को ध्यान रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई करें और मुख्यमंत्री सचिवालय के साथ सांसद को भी अवगत कराएं। पर इस बात को छह माह गुजरने को हैं, अब तक कार्रवाई अधूरी है।

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कब किसने लिखा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र

0 सबसे पहले विधानसभा अध्यक्ष डा चरणदास महंत ने इसी साल 15 जनवरी को आइटी कालेज का शासकीयकरण करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा था।

0 इसके बाद 20 जनवरी को सांसद ज्योत्सना महंत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख क्षेत्र अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के युवाओं की जरूरत बताते हुए आइटी कालेज को शासकीय करने की मांग कर पत्र लिखा था।

0 इसी तरह 20 जनवरी को पूर्व गृहमंत्री एवं रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने भी मुख्यमंत्री बघेल को पत्र लिखकर आइटी कालेज की शुरूआत से लेकर वर्तमान दशा से अवगत कराया व शासकीयकरण करने की मांग की।

0 इसके बाद आठ फरवरी को कटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर ने भी सीएम को पत्र लिख क्षेत्र के युवाओं की आवश्यकता के लिए आइटी को सरकारी संस्था बनाने की मांग रखी।

0 मुख्य मंत्री सचिवालय की उप सचिव ने तीन फरवरी को मंत्रालय तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को एक पत्र लिख नियमानुसार कार्रवाई कर अवगत कराने कहा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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