प्रदीप बरमैया

कोरबा (नईदुनिया)। साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की खुली कोयला खदानों में उत्पादन के लिए किए जाने वाले विस्फोट को नियंत्रित करने प्रबंधन अब अत्याधुनिक मशीन माइक्रोमेट का इस्तेमाल करेगी। अभी तक मिनीमेट का उपयोग किया जाता रहा है। विस्फोट के बाद होने वाले कंपन का मशीन सूक्षमता से माप करेगा। कम्प्यूटर से जोड़ कर रिपोर्ट की प्रिंट निकाली जा सकेगी। अधिक तीव्रता होने पर निगरानी दल शीर्ष अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

जिले में एसईसीएल की पांच खुली व सात भूमिगत कोयला खदानें संचालित है। खुली व भूमिगत दोनों ही खदानों में कोयला उत्पादन के लिए बारूद लगा कर विस्फोट किया जाता है। यहां बताना होगा कि निर्धारित मात्रा से अधिक बारूद इस्तेमाल किए जाने की वजह से कंपन अधिक होता है और आसपास के रिहाइशी इलाके के मकान की दीवारों में गहरी दरार पड़ जाती है। खदान के अंदर से छिटक कर गिरे पत्थर से खपरेल छत क्षतिग्रस्त होने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इस पर अंकुश लगाने प्रबंधन ने अब नई तकनीक वाली माइक्रोमेट मशीन का इस्तेमाल करने जा रही। सभी खदानों के लिए दो- दो मशीन का आर्डर किया गया है। खास बात यह है कि यह मशीन स्वदेशी है। अभी इस्तेमाल किए जाने वाली मशीन रिक्टर स्केल सिस्टम से कंपन की तीव्रता मापती है। माइक्रोमेट को विस्फोट के वक्त एक किलोमीटर के दायरे में कही भी रख कर इस्तेमाल किया जा सकता है।

दोपहर डेढ़ से दो बजे विस्फोट

एसईसीएल की खदानों में मिट्टी निकासी के लिए विस्फोट दिन में ही किया जाता है। रात में विस्फोट करने का प्रावधान नहीं है। विस्फोट के दौरान कोई कर्मी खदान में न रहे, इसलिए प्रथम पाली ड्यूटी के खत्म होने व द्वितीय पाली ड्यूटी शुरू होने के पहले दोपहर 1.30 से दो बजे के मध्य विस्फोट करने का समय निर्धारित किया गया है। इस दौरान खदान में केवल विस्फोट करने वाले कर्मी ही मौजूद रहते हैं।

दो सौ टन बारूद प्रतिदिन खपत

कुसमुंडा, गेवरा व दीपका ओपनकास्ट खदान में ही प्रतिदिन 200 टन बारूद की खपत हो रही। हालांकि बारिश के दिनों में इसकी मात्रा घट जाती है। जानकारों का कहना है कि वर्तमान में सभी खदानों में लगभग 70 टन बारूद ही खपत हर रोज रहा है। इसकी मुख्य वजह मिट्टी के गीला होना को बताया जा रहा।

एक खदान में एक घंटे के अंदर 15 विस्फोट

प्रत्येक खदान में सावेल व ड्रील मशीन की उपलब्धता पर विस्फोट किया जाता है, क्योंकि हर सावेल के लिए अलग- अलग ड्रील मशीन होती है। बावजूद प्रत्येक खदान में एक दिन में एक घंटे के अंदर 15 विस्फोट किया जाता है। प्रबंधन का कहना है कि कोयला फेस में विस्फोट बंद कर दिया गया है, क्योंकि सरफेस माईनर कटिंग का इस्तेमाल किया जा रहा।

नहीं बदलेगा रिकार्ड, भेजेंगे पर्यावरण अधिकारी को

विस्फोट के बाद मशीन में जो रिकार्ड दर्ज होगा, उसे बदला नहीं जा सकेगा। कम्प्यूटर में जोड़ने से वहीं आंकड़े आएंगे, जो विस्फोट के दौरान मशीन में दर्ज होगा। इसमें फेरबदल नहीं किया जा सकेगा। एसईसीएल प्रबंधन के अलावा कंपन तीव्रता का रिकार्ड पर्यावरण संरक्षण मंडल के स्थानीय अधिकारी को भी नियमित तौर पर प्रेषित किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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