कोरबा । जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर स्थित कोसगाईगढ़ को छत्तीसढ़ में से एक गढ़ माना जाता है। यहां पहाड़ पर निर्मित दुर्ग किला में कोसगाई देवी का मंदिर है। आम तौर पर देवी मंदिरों में लाल ध्वज चढ़ाया जाता है। कोसगाई राज्य का एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां शांति का प्रतीक सफेद ध्वज चढ़ाया जाता है।

600 फीट ऊंचे पहाड़ के उपर प्रतिवर्ष चैत्र और क्वांर नवरात्र में ज्योतिकलश प्रज्ज्वलित की जाती है। नवरात्र के शुरूआत से ही यहां भक्तों की कतार लगी हुई। प्रकृति की गोद निर्मित किला की अन्य विशेषताएं भी हैं। पहाड़ 50 फीट की ऊंचाई में स्थित भीम सेन की प्रतिमा दर्शनीय है। यह एक मात्र पहाड़ है जहां भीमसेन की प्रतिमा है। केराझरिया, तोप जंजाल, लाटा पथना दर्शनीय स्थल है। पहाड़ के दक्षिण छोर बाबा कुटी भी है। इसके निकट ही सुरहीगाय की प्रतिमा है। गोमुखी स्वरूप इस प्रतिमा के मुख से लगातार पानी की धार बह रही है। इस वजह से पहाड़ उपर श्रद्धालुओं को पानी की की कभी कमी नहीं होती। मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। कोसगाई छुरी राजघराने की कुलदेवी है। राजघराने के सदस्य कुंवर राज्यवर्धन सिंह का कहना है देवी माता शांति का प्रतीक हैं। इसकी पूजा और आराधना से शांति की प्राप्ति होती है।

छत्र-छाया में रहना पसंद नहीं

पहाड़ उपर निर्मित मंदिर में गुंबद भी नहीं है। जन श्रुति के अनुसार देवी को छत्र-छाया में रहना पसंद नहीं है। जिला पुरातत्व विभाग के मार्गदर्शक हरिसिंह क्षत्रीय का कहना है कोसईगढ़ के बावनबडी किला का निर्माण तेरहवीं शताब्दी में हयहयवंशी राजाओं ने बनवाया था। इस वंश के सम्राट बहारसाय के कार्यकाल में यह क्षेत्र समृद्धि और उत्कर्ष पर था। मंदिर को पुरातात्विक दृष्टि से संरक्षण की जरूरत है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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