कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

विद्युत कंपनी के मड़वा प्रोजेक्ट को कोयला संकट से जल्द ही निजात मिलने लगेगी। रायग़ढ़ एरिया से संयंत्र में कोयला सप्लाई शुरू हो गई। रेल कॉरिडोर बनने के बाद पहली मालगाड़ी शनिवार को कोयला लेकर मड़वा परियोजना तथा दूसरी मालगाड़ी एनटीपीसी संयंत्र को रवाना की गई। वर्तमान में कोयला नहीं होने से मड़वा की 500 मेगावाट की एक तथा एनटीपीसी सीपत की 500-500 मेगावाट की दो इकाई बंद है।

रेल कॉरिडोर की पहली लाइन खरसिया-कारीछापर के बीच आज से गुड्स ट्रेन चलनी शुरू हो गई। फिलहाल रोजाना आठ हजार मीट्रिक टन कोयले का परिवहन किया जाएगा। रेलवे से जु़ड़े जानकारों का कहना है कि जल्द ही इस लाइन पर यात्री ट्रेनें चलनी शुरू हो जाएगी। पहले कुछ दिन तक प्रतिदिन दो रैक चलाया जाएगा। कोयले का पहला रैक शनिवार को सरकारी बिजली कंपनी मड़वा पावर प्लांट और दूसरी रैक एनटीपीसी पावर प्लांट को भेजी गई। इस मौके पर एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एपी पंडा, डायरेक्टर टेक्निकल एमके प्रसाद, जीएम जेजी सिंह और सीईआरएल के सीईओ जेएन झा मौजूद थे। रेलवे की ओर से सुपरवाइज करने शैलेष टोप्पो भी मौके पर उपस्थित रहे। रेल कॉरिडोर को सीईआरएल ने डेवलप और इरकन ने इसे एग्जीक्यूट किया है। 44 किलोमीटर लंबी खरसिया और कारीछापर के बीच दोहरी लाइन बिछाई जा चुकी है, पर रेल परिचालन के लिए अभी सिंगल लाइन की अनुमति मिली है। शनिवार को छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे कॉरिडोर लिमिटेड के अफसरों ने बिना किसी तामझाम के मालगाड़ी का परिचालन प्रारंभ कर दिया। कारीछापर से रोज दो रैक कोयला ट्रांसपोर्ट किया जाएगा। इस लाइन का विस्तार धरमजयगढ़ तक किया जाएगा। खरसिया से धरमजयगढ़ के बीच यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए गुरदा, छाल, घरघोड़ा, कारीछापर, कुटुमकेला और धरमजयगढ़ छह स्टेशन बनाए गए हैं। 74 किलोमीटर इस लाइन पर सात बड़े और 90 छोटे ब्रिज बनाए गए हैं। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि सीपत संयंत्र को एसईसीएल की दीपका खदान से कोयला आपूर्ति किया जाता है, पर खदान में पानी भरने के कारण कोयला आपूर्ति बाधित हो गई है और वर्तमान में सिर्फ दो रैक कोयला ही मिल रहा है। उधर मड़वा प्लांट की भी स्थिति काफी खराब है, इसलिए इन दोनों प्लांट की तीन यूनिट से 1500 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद है। रायगढ़ एरिया से कोयला मिलने पर उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों प्लांट की स्थिति में जल्द ही सुधार आएगा और यूनिट पुनः परिचालन में आएगी।

ढाई माह के अंदर चलेगी सवारी गाड़ी

कॉरिडोर से जुड़े जानकारों का कहना है कि दो-ढाई महीने में इस लाइन पर यात्री ट्रेनें भी चलनी शुरू हो जाएगी। ट्रेनों के परिचालन के लिए कमिश्नर रेल सेफ्टी की अनुमति लेनी पड़ती है। इसमें सीआरएस केंद्रीय पर्यटन विभाग के अफसर होते हैं। सीआरएस के क्लियरेंस के बाद ही यात्री ट्रेनें शुरू हो पाती है। सीआरएस इंस्पेक्शन के लिए आवेदन दिया गया है, निरीक्षण करने कभी भी तिथि निर्धारित की जा सकती है।

बिछेगी 800 किलोमीटर रेल लाइन

छत्तीसगढ़ ईस्ट रेल कॉरिडोर में एसईसीएल 64 फीसदी, इरकन 26 फीसदी और छत्तीसगढ़ की सीएसआइडीसी की 10 फीसदी की भागीदारी है। रेल कॉरिडोर के तहत 800 किलोमीटर रेल लाइन बिछनी है। कुछ लाइनों को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है। इसमें बड़ी संख्या में जंगल की कटाई को लेकर कई संगठन विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी पिछले दिनों रेल कॉरिडोर की समीक्षा में अफसरों से पूछा था कि इस प्रोजेक्ट से छत्तीसगढ़ को कितना लाभ होगा। उन्होंने मुख्य सचिव से 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताई थी कि कोयला जब खत्म हो जाएगा तो क्या यहां के उद्योगों के लिए उन्हीं लोगों से कोयला खरीदना पड़ेगा। लिहाजा, बाकी रेल लाइनों के बारे में सीएस की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ तय हो पाएगा।