कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मीलों दूर से लंबी उड़ान भरकर कोरबा के कनकीधाम आने वाले प्रवासी पक्षी ओपन बिल स्टार्क की सुरक्षा सुनिश्चित करने वन विभाग ने एक नया इंतजाम किया है। तेज हवाएं चलने या मुसलाधार बारिश होने से इनके घोसलों से चूजे गिरकर चोटिल हो रहे थे। कुछ दिनों पूर्व ही मौसम के विपरीत होने पर घोंसलों से गिरे करीब 17 पक्षियों की मौत भी हो गई थी। घोंसले से गिरकर किसी पक्षी की मौत न हो, इसके लिए वन विभाग ने उन पेड़ों के नीचे जाल लगाया है, जिन पर उन्होंने अपना आसरा बना रखा है। उम्मीद की जा रही कि मौसम बदलने पर अगर पक्षी गिरे भी तो नीचे जाल होने से उन्हें जमीन से टकराने से बचाया जा सकेगा।

जिले में कनकी धाम परिसर में हर वर्ष 15 मई से एशियन ओपन बिलस्टार्क नामक प्रवासी पक्षियों का आना होता है। बारिश के खत्म होते- होते अक्टूबर माह के अंत तक इनकी वापसी हो जाती है। हर साल लगभग 25 सौ की संख्या में प्रवासी पक्षी यहां प्रजनन के लिए पहुंचते हैं। कनकी के उक्त स्थल को प्रवासी धाम के तौर पर कोरबा वन मंडल ने संरक्षित किया है। करतला वन परिक्षेत्र क्षेत्र के अंतर्गत यह इलाका आता है। पिछले दिनों की घटना से कनकी में आने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा एक बार फिर खतरे में पड़ती दिख रही थी। छह सितंबर की रात चली तेज हवा और गरज-चमक के साथ हुई मुसलाधार बारिश के चलते घोंसलों से चूजे नीचे गिर गए। बताया जा रहा कि 17 चूजों की मौत इस घटना में हो गई थी। इसके अलावा करीब दो दर्जन चीजों को वापस सुरक्षित पेड़ में छोड़ा गया था। इस तरह मौसम बिगड़ने पर घोंसलों पर बैठे पंछी ऊंचाई से गिरकर घायल न हों या उनकी मौत न हो, इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने जाल की व्यवस्था की गई है।

ग्रामीणों ने कहा- सभी पेड़ों पर लगाए जाएं

कनकी के ग्रामीणों ने वन विभाग की ओर से की गई इस पहल का स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की है। पर इसके साथ ही उनका कहना है कि वनकर्मियों ने मंदिर के आस-पास के कुछ चुनिंदा पेड़ों में ही जाल लगाए हैं। उनकी मांग है कि कनकी के उन सभी पेड़ों में इसी तरह जाल की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी भी पेड़ का पंछी इस तरह घायल न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का शत-प्रतिशत इंतजाम हो सके। यहां के ग्रामीण इन पंछियों को देवदूत मानते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए सतत सेवा व सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। इनका शिकार न हो, इस पर भी कड़ी निगाह रखते हैं।

मुख्यतः एक ही पेड़ में दिखाई दिया बसेरा

इस मामले में कोरबा वनमंडल की डीएफओ प्रियंका पांडेय का कहना है कि उन्होंने खुद जाकर कनकी में इन प्रवासी पक्षियों और उनके आवास का निरीक्षण किया था। उन्हें इस बात को लेकर हैरत भी हुई कि इतने सारे पेड़ों में लगभग सारे पंछी केवल कनकेश्वर महादेव के मंदिर के ठीक ऊपर लगे पीपल के पेड़ पर भी आकर घोंसला बनाते हैं और उनमें बच्चे देकर बड़ा करते हैं। पास के ही एक अन्य पेड़ में भी उन्हें तले पर कांटा तार लगा दिखा, जिसमें गाज गिरने के बाद से पक्षी घोसला नहीं बनाते हैं। यही वजह है जो पीपल के उस मुख्य पेड़ समेत कुछ में ही जाल की जरूरत दिखी।

सुरक्षित रहेंगे, उन्हें फिर घोंसले में चढ़ा देंगे

डीएफओ प्रियंका पांडेय ने कहा कि हमारे वनमंडल में आने वाले इन खूबसूरत परिंदों की सुरक्षा भी वन विभाग का ही है। यही दायित्व निभाते हुए यह पहल की गई है। नीचे जाल लगा होने से पक्षी या उनके चूजे घोंसले से गिरकर सीधे जमीन से नहीं टकराएंगे और घायल होने या चोटिल होने से बच जाएंगे। इसके बाद उन्हें पुनः पेड़ पर बैठा दिया जाएगा, जिसके बाद वे स्वयं ही अपने घोंसले तक चढ़ जाते हैं। इस इंतजाम के बाद उनकी गिरने से होने वाली मौतों की पूर्ण रूप से रोकथाम हो सकेगी। अगर अन्य पेड़ों में भी उनका आशियाना है, तो वहां के लिए भी व्यवस्था की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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