कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदूषण जांचने वाले वाहन जिनकी जांच से वाहन चालकों को प्रमाणपत्र मिलता था, वह खुद ही खराब निकले। काला धुआं निकलते देख अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदय किरण ने दो वाहन के दस्तावेजों की जांच की तो प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाणपत्र दिखाया गया। दोनों वाहन को परिवहन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके साथ ही इन चलित जांच केंद्रों के लाइसेंस भी निलंबित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदय किरण अपने दौर पर जमनीपाली की ओर जा रहे थे। इस बीच उनकी नजर एक अत्यधिक धुआं निकालने वाली टाटा इंडिका कार पर पड़ी। एएसपी ने उक्त प्रदूषण फैला रहे वाहन को रुकवाकर दस्तावेज की जांच की। कार चालक ने 2024 तक के लिए जारी प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र एएसपी को दिखाया, जिसे देख वे भी चौंक गए। उक्त प्रमाणपत्र जारी करने वाले के संबंध में जानकारी लेकर एएसपी ने तत्काल जिला परिवहन अधिकारी वीएन पाटले से संपर्क कर कार्रवाई के लिए कहा। आरटीओ के निर्देश पर परिवहन प्रवर्तन प्रभारी एसके झा ने चलित प्रदूषण जांच वाहन क्रमांक सीजी 12 एएन 3722 तथा सीजी 12 एवी 0140 की पड़ताल की। जांच के दौरान पाया गया कि दोनों वाहन में प्रदूषण की मात्रा जांच करने के लिए सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद कंप्यूटर व आंकड़ों में हेरफेर कर प्रदूषण मुक्त वाहन का प्रमाणपत्र बांटते फिर रहे थे। तकनीकी रूप से स्वयं त्रुटिपूर्ण चलित प्रदूषण जांच वाहन के इस तरह फर्जी प्रमाणपत्र बांटे जाने को गंभीरता से लेते हुए परिवहन प्रवर्तन प्रभारी ने दोनों वाहनों को सीज कर दिया है। वाहनों को धारा 207 के तहत जब्त कर चालानी कार्रवाई की गई है। झा ने बताया कि जिस टाटा इंडिका वाहन को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र दिया गया था, उसे भी निरस्त कर दिया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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