कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हम जो खाते हैं वह सुरक्षित है या नहीं, इसकी निगरानी तो सतत हो रही, पर जांच की अवधि इतनी लंबी है कि मिलावट का पता चलने तक देर हो चुकी होती है। फूड एनालिस्ट की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है। रायपुर की प्रयोगशाला में हो रही अनगिनत जांच का भारी दबाव प्रदेश में उपलब्ध सिर्फ एक फूड एनालिस्ट के कंधों पर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के पैमानों के तहत सैंपलिंग तो लगातार हो रही, पर नमूनों की जांच की गति काफी मंद है। कोरबा की ही बात करें तो यहां 1,500 से ज्यादा लाइसेंस व 8,000 से अधिक पंजीकृत फर्म हैं। यहां से भेजी गई सैंपल की रिपोर्ट आने में कम से कम 15 से 20 दिन व कई चीजों में एक माह का वक्त लग जाता है। ऐसे में जिला स्तर पर लैब की सुविधा प्रदान कर फूड एनालिस्ट की कमी पूरा करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

खासकर त्योहारों के लिए तैयार होने वाली मिठाइयां, स्नैक्स व अन्य व्यंजनों में मिलावट की संभावना अधिक होती है। इसके लिए स्थानीय तौर पर निगरानी कर रही खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम लगातार निरीक्षण कर सैंपल एकत्र करती रहती है। जांच के दौरान प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई का विधिवत ध्यान नहीं रखे जाने पर एफएसएसएआइ के नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं। समय-समय पर अर्थदंड की कार्रवाई भी की जाती है। त्योहार के मौके पर मिठाई की खपत अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिनकी गुणवत्ता परखने लिए गए मिठाइयों के सैंपल जांच के लिए रायपुर स्थित विभागीय प्रयोगशाला भेज दिए जाएंगे। लैब में जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट के आधार पर मानक या अमानक स्तर पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए मामले कोर्ट में पेश भी किए जाते हैं पर रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पाने के कारण अगर मिलावट साबित भी हुई तो उस वक्त तक लोगों के पेट में वह पच चुका होता है। यही वजह है जो एक अरसे से जिला स्तर पर प्रयोगशाला स्थापित करने की मांग भी की जा रही है। पर जानकारों का कहना है कि हर जिले में लैब स्थापित करना कोई बड़ी बात नहीं, पर फूड एनालिस्ट की अहम जरूरत को पूरा करना बड़ी चुनौती है, जिसकी कमी प्रदेशस्तर पर है।

लाइसेंस-पंजीयन से अब तक एक करोड़ राजस्व

वर्ष 2012 से लेकर जिले में अब तक की स्थिति में लाइसेंस व पंजीयन के जरिए ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शासन को करीब एक करोड़ (99 लाख 67 हजार) रुपये का राजस्व कमाकर दिया है। इनमें एक हजार 576 लाइसेंस व आठ हजार 118 पंजीयन का योगदान शामिल है। वर्तमान में भी जिले से प्रेषित छह प्रकरण कोर्ट हैं, जिनमें निर्णय आना बाकी है, जबकि सात प्रकरण में विवेचना की जा रही है। योग्यताधारी फूड एनालिस्ट के अभाव के कारण खाद्य पदार्थों के लिए गए सैंपलों की जांच कर की रिपोर्ट वक्त पर नहीं मिल पाने से कार्रवाई प्रकरण में भी देरी होती है, जिसका प्रभाव लोगों की सेहत पर दिखाई देता है। पिछले कुछ साल से मोबाइल लैब की सुविधा भी मिल रही, पर साल में पांच या छह बार ही जिले में उसका लाभ मिल पाता है।

गुणवत्ता खराब कर बिक्री के मामले ज्यादा

ज्यादातर मामलों में मिठाई व्यवसायी अपने सामान की गुणवत्ता को खराब करके बेचते हैं। इनमें वे मिठाई बनाने शुद्ध खोवा, छैने या मावा का इस्तेमाल करने की बजाय वनस्पति घी या नकली घी व सूजी मिला देते हैं। इस तरह यह भी देखा जाता है कि जो कीमत ग्राहकों से वसूली जाती है, वास्तव में ग्राहकों को विक्रय की गई मिठाई उसके मुकाबले कम गुणवत्ता का तो नहीं है। ऐसा प्रकरण पाए जाने पर होटल संचालक के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। त्योहारों में तैयार होने वाली मिठाइयों में मिलावट व खराब गुणवत्ता के सामानों का इस्तेमाल, खराब मावा व रासायनिक रंगों का प्रयोग सबसे ज्यादा संभावित होता है।

महामारी से लड़ने जुर्माने के ढाई लाख की मदद

लॉकडाउन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने जिला प्रशासन ने निगरानी दल का गठन किया है। इसमें खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, नगर निगम, राजस्व एवं पुलिस विभाग शामिल हैं। पिछले तीन माह में की गई कार्रवाई से करीब ढाई लाख रुपये जमा हुए। जुर्माने की रकम से जमा हुई राशि भी महामारी से लड़ने के लिए मदद स्वरूप प्रदान की गई है। समय-सारिणी के अनुरूप दुकानों के खुलने व बंद होने, प्रतिबंधित सामग्री विक्रय करते पाए जाने व फिजिकल डिस्टेंस के नियमों की अनदेखी पकड़े जाने पर जुर्माने की यह कार्रवाई लगातार की जा रही है। कोरोनाकाल में चले इस सघन जांच अभियान में प्रमुख रूप से विभाग में पदस्थ अभिहित अधिकारी भीष्मदेव सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरआर देवांगन व विकास भगत, नमूना सहायक निखिलेश साहू की टीम सतत कार्यरत है।

आठ वर्ष की अपेक्षा कोरोनाकाल में ज्यादा कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा अधिकारी विकास भगत ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 वर्ष 2011-12 से लागू है। जनता को सुरक्षित एवं सही खाद्य पदार्थ मिल सके, इसके लिए जिले में अब तक लगभग 300 खाद्य पदार्थों का नमूना जांच के लिए लिया गया, जिसमें 60 नमूने फेल हुए। इनका प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता रहा है। इस कार्रवाई में विभिन्न खाद्य कारोबारियों पर छह लाख 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। विभाग की ओर से लॉकडाउन के दौरान भी जिला प्रशासन व नगर निगम के सहयोग से जांच कार्रवाई की जा रही है, जिसमें लगभग दो लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया जा चुका है। समय-समय पर विभाग की ओर से प्रशिक्षण का आयोजन, लाइसेंस, पंजीयन शिविर का आयोजन भी किया जाता रहा है, जिससे लोगों को सुरक्षित खाद्य मिल सके।

फैक्ट फाइल

आंकड़ेवर्ष 2012 से अब तक

जिले में पंजीकृत फर्म8118

फूड लाइसेंस1576

इनसे राजस्व99.67 लाख रुपये

2012 से अब तक सैंपलिंग300

फेल रिपोर्ट60

जुर्माना राशि6.50 लाख रुपये

लॉकडाउन में जुर्माना2.50 लाख

वर्तमान में प्रकरण कोर्ट मेंछह

विवेचनाधीन प्रकरणसात

Posted By: Nai Dunia News Network

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