कोरबा (नईदुनिया न्यूज)। देश के सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियां कक्षा सातवीं, कक्षा छठवीं, कक्षा आठवीं से गायब हो गई है। जबकि यह कहानियां पंच परमेश्वर, ईदगाह, नमक का दरोगा कई दशकों से स्कूलों के पाठ्यक्रम में विद्यमान थीं। इन्हें सत्ता परिवर्तन के बाद हटा देना दुर्भाग्यपूर्ण है समाजिक और राष्ट्रीय अपराध है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को पत्र लिखकर मांग की जाएगी कि कहानियों को स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए उक्त आशय की बातें सुरेशचंद्र रोहरा कार्यकारी अध्यक्ष प्रगतिशील लेखक संघ ने अपने वक्तव्य में कही। प्रगतिशील लेखक संघ के इकाई कोरबा के तत्वावधान में प्रगतिशील लेखक संघ के संरक्षक शिवशंकर अग्रवाल के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कार्यालय में जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित की गई। कथाकार कामेश्वर पांडेय ,कवि भास्कर चौधरी, सुरेशचंद्र रोहरा सम्पादक लोकसदन, सनंददास दीवान एल्डरमैन व कालमकार के महत्ती विशिष्ट आतिथ्य में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती का आगाज उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर आयोजित किया गया। सर्वप्रथमम नगर के साहित्यकार कामेश्वर पांडेय ने धनपत राय से लेकर मुंशी प्रेमचंद बनने की उनके जीवन संघर्षों को विस्तार से बताया साथ ही उन्होंने यह भी कहा मुंशी प्रेमचंद का विद्यालयीन पाठ्यक्रम से गायब होना शुभ संकेत नहीं, हम उनके लेखन व अवदान से लाभान्वित हो सकते है। इसी कड़ी में महादेवी सम्मान से नवाजी गई अंजना सिंह ने भी अपने उद्बोधन को काव्यरूप में प्रस्तुत कर महान कथाकार के साहित्य को बहुरंगी भारतीय समाज के लिए यथोचित बताया अपने उद्बोधन में साहित्य भवन समिति कोरबा के अध्यक्ष दिलीप अग्रवाल ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य के प्रति समाज की उदासीनता को घातक बताया। साहित्यकार भास्कर चौधुरी ने हमीद, लमही और प्रेमचंद कविता के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किये। सनंददास दीवान ने घर घर साहित्यकारों के साहित्य और चित्र भेजकर उनसे परिचित कराने की सलाह दी साथ ही उन्होंने यह भी कहा इस अभियान का श्री गणेश विद्यालय से होना चाहिए। कार्यक्रम में साहित्यकार घनश्याम तिवारी, प्रभात शर्मा ने अपने विचार व्यक्त कर मुंशी प्रेमचंद और उनके साहित्य के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।

Posted By: Nai Dunia News Network

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