कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एल्युमिनियम एंप्लाइज यूनियन (एटक) कार्यालय में कार्ल मार्क्स की जयंती पर संगोष्ठी आयोजित की गई है। इस दौरान प्रदेश महासचिव हरिनाथ सिंह ने कहा कि मार्क्स ने अपनी किताब में यह भी लिखा कि निजी हितों का विस्तार करने वाले अधिकार ही हैं, जो नागरिक समाज की आधारशिला रखते हैं। मार्क्स का मानना था कि अधिकार स्वयं चलकर नहीं आते बल्कि उन्हें अर्जित करना होता है। अधिकार जन्म से नहीं होते उन्हें संघर्ष करके पाना होता है।

एटक के प्रदेश महासचिव सिंह ने कहा कि मार्क्स की विश्वव्यापी प्रासंगिकता का कारण क्या है। मार्क्स के बारे में हम जितना सच जानते हैं, उससे ज्यादा असत्य जानते हैं। मार्क्स के नाम पर मिथमेकिंग और विभ्रमों का व्यापक प्रचार किया गया है। इसमें उनकी ज्यादा भूमिका है जो मार्क्स और मार्क्सवाद को फूटी आंख देखना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि मार्क्स के काम की महत्ता से वाकिफ भारत में ऐसे लोग हैं जो आए दिन अज्ञानता के कारण यह कहते हैं कि मार्क्स तो जनतंत्र के पक्षधर नहीं, तानाशाही के पक्षधर थे। यह बात एक सिरे से गलत और तथ्यहीन है। यह भी प्रचार किया जाता है कि मार्क्स की जनवाद में आस्था नहीं थी। नागरिक समाज में आस्था नहीं थी। कार्ल मार्क्स ने मजदूरवर्ग के नजरिए से लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर विचार किया है। मार्क्स ने नागरिक समाज पर लिखा है कि नागरिक अधिकार ऐसे व्यक्ति का अधिकार हैं जो अहंकारी मनुष्य है, जो अन्य व्यक्ति व समाज से कटा हुआ व्यक्ति है। वह ऐसा व्यक्ति है जो निजी आकांक्षाओं से घिरा है। यह आत्मकेंद्रित व्यक्ति है। यह आत्मनिर्भर एवं अलग-थलग पड़ा हुआ व्यक्ति है। संगोष्ठी में एटक के प्रदेश सचिव एमएल रजक, एसके सिंह, सुनील सिंह, पीके वर्मा, प्रकाश दास, आलेख मलिक, संतोष सिंह, सिंह रतन सिंह ने समाजवाद पर अपना अपना विचार रखा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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