कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोयला संकट की स्थिति को देखते हुए ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी ने भी तेजी से कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। मड़वा पावर प्लांट में 20 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने के बाद हसदेव ताप विद्युत संयंत्र कोरबा पश्चिम (एचटीपीपी) के बंद राखड़ बांध में सौर उर्जा संयंत्र लगाए जाने की योजना बनाई गई है। केंद्र ने इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

वर्ष 2022 में देश के विद्युत संयंत्रों को कोयला संकट का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में 10 प्रतिशत कोयला आयात करना पड़ रहा। कोल इंडिया यह पूरी कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह से विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति ज्यादा से ज्यादा की जा सके। इसके लिए खदानों में उत्पादन बढ़ाए जाने की कवायद की जा रही। इस बीच केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को हरित उर्जा को बढ़ावा देने कहा है। इस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। विद्युत कंपनी ने राजनांदगांव में 100 मेगावाट सौर उर्जा प्लांट के लिए सोलर एनर्जी कारपोरेशन आफ इंडिया के साथ एमओयू पहले ही किया है और इस पर कार्य शुरू हो चुका है। कंपनी के अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत संयंत्र (मड़वा प्रोजेक्ट) में भी 20 मेगावाट के सौर उर्जा संयंत्र की स्थापना हो चुकी है और दूसरे चरण का कार्य चल रहा है। इधर कोरबा में डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के छत में 300 किलोवाट क्षमता का सौर उर्जा प्लांट की योजना है, पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। एचटीपीपी के प्रभारी मुख्य अभियंता कमलेश डोंगरे ने बताया कि संयंत्र के बंद हो चुके राखड़ बांध लोतलोता व डंगनियाखार में सौर उर्जा प्लांट लगाने का केंद्र से नोटिफिकेशन हो चुका है, अब आगे की प्रक्रिया विद्युत कंपनी मुख्यालय स्तर पर पूरी की जा रही है। सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह संयंत्र के ऊपर सौर उर्जा प्लांट लगाने के भी जल्द सर्वे किया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यह कार्य भी शुरू हो जाएगा। इससे कंपनी को बिजली मिलेगी।

एनटीपीसी की सौर उर्जा प्लांट की योजना लटकी

एनटीपीसी कोरबा में भी सौर उर्जा प्लांट लगाने की योजना तो बनाई गई, पर अभी तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। संयंत्र परिसर में पहले 40 मेगावाट क्षमता का संयंत्र स्थापित होना था, पर यह योजना केवल दस्तावेजों में सिमट कर रह गई। इसके साथ ही बंद हो चुके राखड़ बांध व कुछ अन्य क्षेत्रों में भी संयंत्र स्थापित किया जाना था, उस पर भी अभी काम शुरू नहीं हो सका है।

एसईसीएल ने की 40 मेगावाट से शुरूआत

मौजूदा स्थिति में कोयले की कमी का संकट तो है ही, साथ ही उसके जलने के बाद निकलने वाले राख के निपटान की भी समस्या बनी हुई है। राख की वजह से प्रदूषण हो रहा। बिजली संयंत्रों के चिमनी से निकलने वाले धूएं की वजह से वातावरण में राख घूल रहा। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी सौर उर्जा बेहद कारगार साबित होगा। यही वजह है कि संयंत्रों को कोयला उपलब्ध कराने वाली कोल इंडिया भी अब हरित उर्जा का उपयोग की योजना बना ली है। इसकी शुरूआत एसईसीएल के भटगांव से की गई है। यहां 40 मेगावाट क्षमता का सौर उर्जा संयंत्र शुरू किया गया है।

हरित बिजली संयंत्र स्थापना में लागत भी कम

राज्य सरकार ने 7,700 मेगावाट जल विद्युत संयंत्र स्थापना का भी प्रस्ताव तैयार किया है। हरित बिजली के क्षेत्र में यह सबसे बड़ा कदम साबित होगा। चार जिले में पांच संयंत्र लगाए जाएंगे। अत्याधुनिक संयंत्र होने की वजह से पानी की खपत भी कम होगी। कोरबा के बांगो बांध में 1300 मेगावाट क्षमता का संयंत्र लगाया जाएगा। वर्तमान में यहां 40-40 मेगावाट के तीन संयंत्र संचालित हैं। यहां बताना होगा कि परंपरागत बिजली संयंत्र से सौर उर्जा व जल विद्युत संयंत्र की स्थापना में लागत कम आती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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