कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कनकी में आए प्रवासी पक्षियों के संरक्षण एवं बचाव की दिशा में पहल करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों ने एक मुहिम शुरू की है। कनकी इकाई के स्वयंसेवकों ने कनकी स्थित कनकेश्वर महादेव के मंदिर परिसर व गांव में अलग-अलग स्थानों पर वाल पेंटिंग कर जागरूकता लाने का प्रयास किया है। पक्षियों के आगमन के फायदे व पर्यावरण संरक्षण में उनका महत्व बताते हुए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा, ताकि क्षेत्र में देवदूत माने जाने वाले इन मेहमानों पर कोई हमला न करे।

वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार एक बार फिर एशियन ओपन बिल स्टॉर्क ने कनकी में आमद दे दी है। ये पंछी हर साल बड़ी संख्या में प्रवास पर पहुंचते हैं। जिन क्षेत्रों से लंबी उड़ान भरकर ब्लैक स्टॉर्क आते हैं, उनमें उत्तर भारत, एशियाई देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश शामिल हैं। ओपन बिल अपनी मनपसंद जगह कनकी स्थित भगवान शिव के कनकेश्वर महादेव मंदिर के करीब व नदी किनारे के ऊंचे पेड़ों में घोंसला बनाते हैं। आम तौर पर इनकी आमद जून से शुरू होती है, पर कई बार तापमान व जलवायु में अपने लिए अनुकूल परिवर्तन उन्हें वक्त से पहले ही खींच लाता है। मई-जून की भीषण गर्मी महसूस होते ही पक्षियों की बड़ी टोलियां लंबे सफर के बाद ऊंचे आसमान से आती दिखाई देती हैं, जो चूजों के बड़े होने के बाद अक्टूबर-नवंबर के मध्य ये वापस लौट जाते हैं। क्षेत्र के ग्रामीण इन्हें देवदूत मानते हैं, जो उनके लिए अच्छी बारिश और भरपूर खेती का संकेत होते हैं। दीवार लेखन कर कनकी के युवा स्वयंसेवक उन्हें बचाने के लिए मुहिम चला रहे हैं। प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए चलाई जा रही इस मुहिम में प्रमुख रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकी की एनएसएस इकाई से जुड़े स्वयंसेवकों में दम्मन राजवाड़े, राहुल राजवाड़े, सुभाष राजवाड़े, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बरपाली के महासचिव अमित मिंज व संतोष राजवाड़े शामिल हैं।

पिछले कुछ वर्ष से शिकार के मामले

किसानों के लिए शुभ संदेश लेकर आने वाले इन बेजुबान परिंदों पर अब शिकारियों की नजर गड़ गई है। वर्षों से यहां के किसानों की मान्यता है कि इन पक्षियों का आना भरपूर बारिश और अच्छी खेती का संदेश होता है। यही वजह है कनकी और इससे लगे आसपास एक एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों के लिए ये बेजुबान फरिश्ते आस्था और ईश्वर का दूत वंदनीय रहे हैं। जब कभी इन पक्षियों पर संकट दिखाई दिया, क्षेत्र के ग्रामीण मुखर होकर मदद मांगने सामने आए, पर अब संभवतः कुछ लोगों की आस्था और उनके विश्वास पर दरार बन रही है। यही वजह है जो पिछले कुछ वर्षों में इन पक्षियों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही है।

ग्रामीणों ने कहा- 70 से ज्यादा की मौत

इन विदेशी मेहमानों की मौत को लेकर वन विभाग अब तक संजीदा दिखाई नहीं दे रहा। गुजरे तीन-चार साल में आधा दर्जन मामले आ चुके हैं, जिसमें तीन मामले शिकार से जुड़े हुए रहे। कनकी के ग्रामीणों के अनुसार अलग-अलग कारणों से अब तक की स्थिति में 70 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है। कनकी मंदिर के पुजारी ने भी संभावना जताई थी कि पक्षियों पर हो रहा हमला शिकारियों का ही काम है, जिसकी वजह से ही उनके घायल होकर पेड़ के नीचे बार-बार गिरकर मरने की घटनाएं सामने आईं। एशियन ओपन बिल स्टॉर्क का शिकार प्रतिबंधित है, लिहाजा ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।

फिजिकल डिस्टेंस का नियम दरकिनार

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण की ये मुहिम निश्चित तौर पर स्वागतेय है, पर इस दौरान स्वयंसेवकों ने न तो मास्क लगा रखा था और न ही वे फिजिकल डिस्टेंस के नियम का पालन करते दिखे। कोरोना संकट के बीच उनकी एक-दूसरे के करीब रहना सुरक्षित नहीं, जिसका ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है। ऐसे में जब युवा गलती करें, तो बड़ों को चाहिए कि वे उन्हें सावधान व सतर्क करें ताकि किसी भी परिस्थिति में लॉकडाउन व कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित हो। इस तरह की लापरवाही कर वे स्वयं के साथ अपने परिवार को भी खतरे में डाल सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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