कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एसईसीएल को चालू वित्तीय वर्ष में 170 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन का टारगेट हासिल करना है। इसे हासिल करने प्रतिदिन छह लाख टन कोयला उत्पादन करना है, पर पूरा जोर लगाने के बाद भी अधिकतम पांच लाख 28 हजार टन कोयला उत्पादन हो रहा है। इससे लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी के रूप में एसईसीएल का नाम है। नंबर वन पर काबिज एसइसीएल को इस बार टारगेट हासिल करने काफी संघर्ष करना रहा है। कंपनी की नजर गेवरा, दीपका, कुसमुंडा खदान पर टिकी हुई है, पर तीनों खदान अपने टारगेट से पीछे चल रही है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कंपनी को अपना निर्धारित टारगेट हासिल करना है, तो प्रतिदिन 6.03 लाख टन कोयला उत्पादन करना होगा। खदानों से एक दिन में अभी तक अधिकतम 528843 टन कोयला निकल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में यह पांचवी बार होगा, जब खदानों ने पांच लाख टन कोयला ज्यादा उगला है। इसमें गेवरा से 1.64 लाख, दीपका से 95 हजार, कुसमुंडा से 1.45 लाख तथा कोरबा से 19 हजार टन कोयले का उत्पादन हुआ। जानकारों का कहना है कि यदि चालू वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में टारगेट हासिल करना है, तो गेवरा व कुसमुंडा खदान को दो-दो लाख टन से तथा दीपका को एक लाख टन से ज्यादा कोयला उत्पादन करना होगा। एसईसीएल के 13 एरिया में जिले की चारों परियोजना को छोड़ दिया जाए तो शेष नौ एरिया से महज 22 लाख टन कोयला उत्पादन होता है। शेष गेवरा, दीपका, कुसमुंडा व कोरबा से पूरा किया जाता है। यानी 80 फीसदी से ज्यादा उत्पादन इन्हीं चारों परियोजनाओं पर टिका हुआ है और कोल प्रबंधन की भी नजर लगी रहती है। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि कोल इंडिया को 2022 तक एक बिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट हासिल करना है। इसमें एसईसीएल की भूमिका सबसे अहम रहेगी और इस कंपनी को 250 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना होगा। वर्तमान में जो स्थिति बनी हुई है, इससे 2022 तक लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है।

सौ एमटी से ज्यादा उत्पादन

एसईसीएल ने चालू वित्तीय वर्ष में सौ एमटी से ज्यादा कोयला उत्पादन कर लिया है। ढाई माह में लगभग 50 एमटी कोयला उत्पादन करना है, पर प्रतिदिन कम उत्पादन होने से लक्ष्य में लगातार इजाफा होते जा रहा है। इससे कंपनी प्रबंधन खासा चिंतित हो उठा है और लगातार खदानों का निरीक्षण कर उत्पादन बढ़ाए जाने पर जोर दिया जा रहा है। आगामी कुछ दिनों में सात लाख टन प्रतिदिन उत्पादन करना होगा, जो काफी मुश्किल भरा कार्य होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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