कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारत का इतिहास और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम धरोहरों में एक है, जहां के प्राचीन पुराणों-पौराणिक गाथाओं में ही नहीं, बाइबिल समेत अन्य ग्रंथों में थर्ड जेंडर के वर्णन मिलते हैं। इनमें उनके गरिमामय स्थान की भी बातें लिखी हैं। समय के साथ बदलाव हुए और आज की स्थिति काफी विपरीत है। ट्रांस जेंडर भी हमारे समाज का अभिन्ना और महत्वपूर्ण अंग हैं, जिन्हें वह सारे अधिकार और सम्मान प्राप्त होने चाहिए, जो अन्य वर्ग को। इसके लिए हम सभी आगे आकर पहल करने की जरूरत अब भी महसूस की जा रही है।

शासकीय इंजीनियर विश्वेसरैया स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोरवा के समाजशास्त्र विभाग एवं आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में थर्ड जेंडर के विकास के लिए शासन की ओर से किए जा रहे प्रयास एवं सामाजिक चुनौतियां विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। शासकीय वीवाइटी आटोनामस कालेज दुर्ग की समाजशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका डा सुचित्रा शर्मा व छत्तीसगढ़ थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य रवीना बरीचा वेबिनार की मुख्य वक्ता रहीं। कार्यक्रम का प्रारंभ प्राचार्य डा आरके सक्सेना के उद्बोधन से हुआ। इसके पश्चात् शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डा साधना खरे ने विषय पर प्रकाश डालते हुए इसके वर्तमान समय पर चिंतन करते हुए संवेदनशील बिंदुओं पर प्रकाश डाला।

भारतीय संस्कृति में उनके सम्मानजनक स्थान

डा सुचित्रा शर्मा ने विषय पर विस्तृत रूप से विभिन्ना महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने रामायण व महाभारतकाल से थर्ड जेंडर की महत्ता बताते हुए भारतीय संस्कृति में उनके सम्मानजनक स्थान की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय स्वतंत्रता से इनकी स्थिति में परिवर्तन हुआ है। इनके उत्थान की दिशा में किए जा रहे शासकीय प्रयासों की चर्चा करते हुए डा शर्मा ने कहा कि वे तभी प्रभावशाली होंगे जब हम सब मिलकर प्रयास करेंगे। उन्होंने कालेज के विद्यार्थियों को भी इस दिशा में स्वयं जागरुक बन आगे आने को प्रेरित किया।

इन प्राचीन-पवित्र ग्रंथों में भी जिक्र

वेबिनार की द्वितीय विषय विशेषज्ञ रहीं तृतीय लिंग आधारित सामुदायिक संगठन छत्तीसगढ़ मितवा संकल्प समिति की सचिव रवीना वरिहा ने भारतीय पौराणिक ग्रंथों, विष्णुपुराण, बाइबिल, कुरान इत्यादि सभी में ट्रांसजेंडर के गरिमामय स्थान के वर्णन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इनके प्रति पुरातनकाल की जागरूकता एवं संवेदशीलता प्रसंशनीय रही है। वर्तमान में इसका आभाव है। उसका कारण वस्तुतः यह समुदाय वह है, जहां शरीर और मन के बीच तदातम्य नहीं। भारतीय कानून और उनके क्रियान्वयन में अंतर है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local