torch procession: कोरबा । कुसमुंडा खदान के सामने नौकरी की मांग को लेकर आंदोलनरत भू-विस्थापितों ने आक्रोश सभा कर चार किलोमीटर मशाल जूलुस निकाला। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि एसईसीएल प्रबंधन वायदे के अनुसार 30 नवंबर तक रोजगार नहीं देती है तो एक दिसंबर को खदान बंद कराया जाएगा।

साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष भू-विस्थापितों का धरना लगातार जारी है। रोजगार एकता संघर्ष के बैनर ले आयोजित आंदोलन के 29 वें दिन आक्रोश सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक विकास परियोजना के नाम पर दस करोड़ से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया गया है और अपने पुनर्वास और रोजगार के लिए भू विस्थापित परिवार अभी भी भटक रहे हैं। सरकार की कारपोरेटपरस्त नीतियां गरीबों की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों को उनसे छीन रही है।

रोजगार एकता संघ के सचिव दामोदर और उपाध्यक्ष रेशम यादव ने कहा कि सरकार को विस्थापितों को ऐसा जीवन प्रदान करना चाहिए, जिससे उनको लगे कि उन्होंने अपनी जमीन नहीं खोया है। नियम बना कर प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य नौकरी दिया जाना चाहिए। रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष राधेश्याम कश्यप ने कहा कि रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं अब भू विस्थापित बिना रोजगार के घर वापस नहीं जाने वाले हैं। आंदोलन रोजगार मिलने तक जारी रहेगा।

मांग पूरी नहीं होने पर एक दिसंबर को कुसमुंडा खदान को पूर्ण रूप से बंद किया जाएगा। आक्रोश सभा को किसान सभा के दीपक साहू, जवाहर कंवर, जय कौशिक, अमरपाल, बलराम, दीनानाथ ने भी संबोधित किया। तदुपरांत भू विस्थापितों ने कुसमुंडा मुख्यालय के सामने से चार किलोमीटर तक निकाला। इस दौरान प्रमुख रूप से दीनानाथ कौशिक, मोहन लाल कौशिक, बलराम कश्यप, सनत, विजय, दीपक, अनिरुद्ध, रामप्रसाद, बजरंग सोनी, अनिल बिंझवार, अमरपाल, नरेंद्र, हरिशंकर, अश्वनी, अजय, हेमलाल, चंद्रशेखर, राजेश, रामेश्वर, कृष्णा बिंझवार, रवि शंकर, लंबोदर, ताकेश्वर, विनय उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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