कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्राथमिक शाला भवन पहंदा का निर्माण कार्य तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। गुणवत्ता में लापरवाही के चलते यहां बच्चों की कक्षा नहीं लगाई जा सकी। छत का प्लास्टर अभी से उखड़कर गिरने लगा है। परिणाम स्वरूप पुराने शाला भवन में ही स्कूल संचालित हो रहा।

भवन निर्माण के लिए वर्ष 2018 में स्वीकृति मिली थी। यहां की शिक्षिका संध्या दिवाकर ने बताया कि भवन की कमी होने के कारण विभाग से नए स्कूल भवन किया गया था, पर निर्माण आज तक आधा अधूरा है। यहां पहली से पांचवीं तक 70 बच्चे दर्ज हैं। विकासखंड रामपुर अंतर्गत जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण शासकीय योजना पर पानी फिर रहा है।

भवन का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, जिसकी वजह से कम सुविधाओं में समझौता करने की मजबूरी स्कूल के छात्र-छात्राओं और उनके पालकों को सहन करनी पड रही। इस दिशा में उचित कदम लेकर सुविधा उपलबध कराने की बजाय प्रशासन के अधिकारी भी उदासीनता दिखा रहे।

लाकडाउन में रुक गया था काम

सरपंच धनसिंह कंवर ने बताया कि शिलान्यास मद से नवीन प्राथमिक शाला भवन 2018 में स्वीकृति हुआ था, जो लाकडाउन की वजह से पूरा नहीं हो पाया। बहुत जल्द पूरा करके शिक्षा विभाग को दे दिया जाएगा। स्कूल की हालत अभी से जर्जर स्थिति में है, तो बनने के बाद स्कूल भवन की स्थिति क्या होगी यह समझ्ना मुश्किल नहीं। इस गडबडी का खामियाजा बच्चे भुगतने मजबूर हैं।

पंचायतों में ऐसे कई संरचनाएं

जिले में ऐसे शासकीय निर्माण कार्य वाले विद्यालयों की कमी नहीं, जो लंबे समय से पूर्ण होने की प्रतीक्षा में जर्जर होते जा रहे। इनमें अधिकतर निर्माण कार्य पंचायत विभाग के ही हैं, जहां गडबडी के चलते स्वीकृत राशियां तो खर्च हो गईं, पर अधोसंरचनाएं आज भी अधूरी ही पडी हैं। इन अधूरे स्ट्रक्चर को पूर्ण कराने या जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बजाय अधिकारी भी मौन नजर आ रहे।

कई भवनों को ढहाने की जरूरत

निर्माणाधीन स्कूलों के कार्य अधूरे होने के साथ कई ऐसे पुराने भवन भी हैं, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। ऐसे भवनों का उपयोग कक्षाएं लगाने या कार्यालयीन कार्यों के लिए लंबे समय से नहीं किया जा रहा। पर यह पुराने भवन नए स्कूल के पास या परिसर में भी होने के कारण दुर्घटना का डर बना रहता है। आस-पास बच्चों के खेलते समय इनके गिरने का खतरा है, जिन्हें ढहाने की जरूरत है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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