कोरबा Korba News:। शहर के भीतर गेरवा और सीतामढ़ी में से एक भी घाट की शुरूआत नहीं हुई है। गेरवा घाट में सर्वेश्वर एनीकट बनने और पानी भरने के कारण घाट नहीं खुला। वैकल्पिक नए घाट की अब तक तलाश नहीं हुई। सीतामढ़ी रेतघाट को चलाने के लिए ठेकेदार ने नवीनीकरण के लिए अभी तक आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए हैं। दोनो घाट के बंद होने से पंपहाइउस, दादरखुर्द, ढेंगुरनाला आदि स्थानों से रेत की चोरी हो रही है।

शहर के भीतर रेत घाट नहीं खुलने से रेत की अवैध उत्खनन और परिवहन में रेत माफियाओं की संलिप्तता बढ़ गई है। डेढ़ हजार रूपए ट्रेक्टर में बिकने वाला रेत की कीमत साढ़े तीन से चार हजार हो गई है। अधिक कीमत में रेत बिक्री की जानकारी होने के बावजूद खनिज विभाग अंजान बना है। घाट का शुरू नही होना वहां मालिको के लिए वरदान साबित हो रहा।

दरअसल शहर के निकट भैसा मुड़ा और तरदा घाट को खनिज ने स्वीकृति दे दी है, जहाँ से परिवहन कर शहर में रेत खपाना चालको को महंगा पड़ रहा। गेवरा घाट से रेत शहर में आसानी से पूर्ति हो जाती थी लेकिन सर्वेश्वर एनीकट के अस्तित्व में आने के बाद घाट में पानी भर गया है। वैकल्पिक तौर पर नए घाट की तलाश अभी तक नही हुई है। इससे शहर में रेटबकी किल्लत बढ़ गई है। इसी तरह सीतामढ़ी घाट के नवीनीकरण के लिए पूर्व ठेकेदार ने अभी तक आवश्यक दस्तावेज जमा नही किया है। जिससे घाट शुरू करने में देरी हो रही है।

मुख्य खनिज से राजस्व बटोरने के फिराक में गौण खनिज की उपेक्षा

जिला खनिज विभाग को इस वर्ष 2100 करोड़ राजस्व आय संग्रह का लक्ष्य मिला है। बीते वर्ष 1800 करोड़ का लक्ष्य मिला था जिसे विभाग ने कोरोना काल होते हुए भी पूरा कर लिया था। मुख्य खनिज कोयल से राजस्व आय की पूर्ति होम से गौण खनिज के संरक्षण को नजरअंदाज किया जा रहा। मुख्य खनिज से आय लक्ष्य पुरा हो जाने के कारण सरकारी विभागों के काम के लिये लिए गए रेत की रॉयल्टी क्लियरेंस में मनमानी बरती जा रही।

अमलो की कमी से समय पर नही हो रहा निरीक्षण

जिले में रेत के 22 घाट स्वीकृत हैं। जिसकी निगरानी के लिए नियमानुसार खनिज विभाग में तीन फील्ड इंस्पेक्टरों की जरूरत है। एक मात्र फील्ड इंस्पेक्टर की नियुक्ति से घाटों का सही समय पर निरीक्षण नही हो रहा। जिसका फायदा उठाते हुए दूर दराज के नदी नालों से दिन दहाड़े रेत की चोरी हो रही है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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