कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खदान प्रभावित गांव आमगांव के लंबित बसाहट, रोजगार व मुआवजा का तत्काल निराकरण करने की मांग की गई है। इस संबंध में पाली एसडीएम ,गेवरा व दीपका महाप्रबंधक को उर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने ज्ञापन सौंपा है। साथ ही कहा है कि विलंब करने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

ऊर्जाधानी संगठन ने बताया कि वर्ष 2004 व 2010 में दो चरणों में ग्राम आमगांव व आश्रित मुहल्ला जोकाहीडबरी का अर्जन किया गया था। किंतु 20 साल गुजर जाने के बावजूद रोजगार, बसाहट व मुआवजा का मुद्दा अभी तक निराकृत नहीं हो सका है। एसईसीएल व राजस्व विभाग एक दूसरे पर ठीकरा फोड़कर बचने की कोशिश करते रहे हैं, जबकि सभी स्तर के हर बैठकों में समाधान का झुनझुना थमाया जा रहा है । नियमों का हवाला देकर पात्र व अपात्र बताकर ग्रामीणों का शोषण किया जा रहा है। भू-अर्जन गेवरा क्षेत्र के कोयला उत्खनन के लिए किया गया था और अब उक्त स्थल को दीपका क्षेत्र में हस्तांतरित कर दिया गया है । आमगांव के सरपंच बृजकुंवर ने बताया कि आमगांव के लिए नेहरू नगर बतारी में बसाहट स्थल निर्धारित किया गया है, जहां पर बड़े झाड़ के जंगल है और उसकी कटाई व समतलीकरण करने वन विभाग में अनुमति के लिए पांच वर्षो से लंबित होना बताया जा रहा है। इसी तरह से जोकाहीडबरी के 100 लोगों के मुआवजा की फाइल को भी लटका कर रखा गया है, वहीं कुछ लोगों के रोजगार के प्रकरण भी लटके पड़े हैं। दीपका विस्तार के लिए हस्तांतरण होने के बाद मिट्टी हटाने काम चल रहा है, जिसे एक सप्ताह से रोक दिया गया है। उर्जाधानी संगठन ने कहा कि जब तक आमगांव और जोकाहीडबरी के लंबित मामलों का निराकरण नही हो जाता, तब तक ओबी का काम होने नही दिया जाएगा। समस्या का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन को उग्र करते हुए खदान को पूरी तरह से बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। प्रबंधन ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही समस्या का निराकरण करने मुख्यालय से चर्चा की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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