कोरबा, नईदुनिया प्रतिनिधि। बारिश की मौजूदा स्थिति पर गौर करें तो जिले में पानी कम है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र कटघोरा के कृषि वैज्ञानिक कम वर्षा वाले क्षेत्र के कृषकों का मार्गदर्शन किया। वर्तमान स्थित को देखते हुए कृषकों को उच्चहन खेतों में नमी का लाभ लेने शीघ्र जुताई वाली दलहनी फसलें जैसे अरहर, उड़द, मूंग की बोनी करने की सलाह दी है। इसके अलावा मक्का एवं तिल की बुआई करना भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

कृषि विज्ञानियों ने कृषकों को उच्चहन खेतों में परंपरागत खेती की मिश्रित विधि को अपनाने की बात कही। कृषि विज्ञान केंद्र कटघोरा कोरबा के संस्था प्रमुख एवं वैज्ञानिक डॉ. आरके महोबिया ने बताया कि इस विधि के तहत अरहर की दो लाइन के बीच में उड़द व लोबिया की फसल, मक्का के साथ लोबिया, मूंग व उड़द की मिश्रित खेती करने से लाभ मिलने की बात कही है। इस तरह वर्षा की अनिश्चितता से कृषक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

इससे पूर्व कृषि विज्ञानी कृषकों को धान की नर्सरी डालने की बजाय धान की सीधी बुआई करने की सलाह दी थी। कृषक अपने खेत की शीघ्र जुताई कर धान की सीधी बुआई से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। प्रक्रिया के अनुसार रोपा पद्धति के निए पहले धान नर्सरी की बोनी करते हैं, उसके 21-25 दिन बाद नर्सरी को उखाड़कर रोपाई हेतु तैयार खेत में रोपा लगाते हैं।

इस पद्धति में किसानों को लागत ज्यादा आती है। साथ ही वर्षा जल की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा यदि वर्षा अच्छी नहीं होती है तो नर्सरी ज्यादा दिनों की हो जाती है, जिसे रोपित करने पर उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। साथ ही यदि वर्षा नहीं हुर्ई तो नर्सरी खराब भी हो जाती है।

इस तरह से उपचार भी फायदेमंद

धान की सीधी बुआई करने से प्रारंभ के वर्षा जल का सीधा लाभ मिल जाता है। रोपाई के दौरान सिंचाई के संकट से किसान बच जा सकता है। धान की सीधी बुआई के लिए 110 से 115 दिन में पकने वाली किस्मों जैसे एमटीयू-1010, आइआर-36, इंदिरा ऐरोबिक, आइआर- 64 का प्रयोग कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किया जा सकता है। बीज बुआई के पूर्व धान बीज को बाविस्टिन दवा तीन ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोप्चार करना चाहिए। इसके बाद ऐजोस्पाइरीलम 03-05 ग्राम- किलो बीज की दर से एवं पीएसबी कल्चर 10-15 ग्राम-किलो बीज की दर से उपचार करने के लिए कहा गया था।

कम खर्च में धान उत्पादन पद्धति

धान की सीधी बुआई कर तीन दिन बाद धान के अंकुरण के पूर्व खरपतवारों नियंत्रण के लिए पेंडीमिथलीन 1200 मिली एकड़ या बूटाक्योर 1200 मिली एकड़ या पायरेजोसल्फ्यरान 10 फीसदी, डब्ल्यू सी 80 ग्राम एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। इससे अधिकतर संकरी पत्ती वाली घास व कुछ चौड़े पत्ते वाले खरपतरवार नष्ट हो जाते हैं। पुनः 20-25 दिन में बिसपायरोबिक सोडियम 100 ग्राम एकड़ की दर से खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव करें, जिससे पूर्व में बची घास व संकरे पत्ते एवं चौड़े पत्ते वाले खरपतरवार नष्ट हो जाएंगे। इस पद्धति से कम खर्चे में धान का उत्पादन संभव होगा।

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Posted By: Nai Dunia News Network